नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता आर.पी.एन. सिंह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। भाजपा में शामिल होने के बाद आर.पी.एन. सिंह ने कहा,''32 सालों तक मैंने एक पार्टी में रहा ईमानदारी से, लगन से मेहनत की। परन्तु जिस पार्टी में इतने साल रहा अब वो पार्टी रह नहीं गई ना वो सोच रह गई जहां मैंने शुरूआत की थी|
आर.पी.एन. सिंह ने कहा,''अगर देश में राष्ट्र निर्माण करना है और देश को आगे बढ़ाना है तो मैं एक छोटे कार्यकर्ता की हैसियत से हमारा प्रधानमंत्री मोदी के सपनों को पूरा करने के लिए जो भी प्रयास होगा अवश्य करूंगा|
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा,'भारतीय जनता पार्टी आर.पी.एन. सिंह जी का मैं भारतीय जनता पार्टी परिवार में स्वागत करता हूं। उनके साथ 2 अन्य साथी भी भाजपा में शामिल हुए हैं, मैं उनका भी पार्टी में स्वागत करता हूं|
पूर्व केंद्रीय मंत्री आर. पी. एन. सिंह ने ट्वीट कर कहा, "मैं प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन में राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान के लिए तत्पर हूं।"
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले आरपीएन सिंह का इस्तीफा कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है| पूर्वी यूपी के कुशीनगर से ताल्लुक रखने वाले आरपीएन सिंह राज्य में कांग्रेस के बड़े नेताओं में से एक थे और सोमवार को जारी की गई पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची में उनका नाम था| बताया जा रहा है कि भाजपा उन्हें उनके गढ़ पडरौना विधानसभा सीट से चुनाव लड़वा सकती है, जहां से सपा ने स्वामी प्रसाद मौर्य को उतारा है| स्वामी प्रसाद मौर्य ने हालही योगी कैबिनेट छोड़कर सपा का दामन थामा है|
आरपीएन सिंह पडरौना सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं| वह साल 2009 में कुशीनगर से सांसद चुने गए लेकिन 2014 में हार गए| स्वामी प्रसाद मौर्य ने पिछले दो विधानसभा चुनाव में पडरौना सीट से जीत हासिल की है, पहले मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पार्टी से और दूसरी बार भाजपा के टिकट पर उन्होंने चुनाव लड़ा था| 2009 के लोकसभा चुनाव में आरपीएन सिंह ने स्वामी प्रसाद मौर्य को हराया था| आर. पी. एन. सिंह के पिता कुंवर सीपीएन सिंह कुशीनगर से सांसद थे| वह 1980 में इंदिरा गांधी की कैबिनेट में रक्षा राज्यमंत्री थे|
पहले आर. पी. एन. सिंह ने अपने टि्वटर बायो से कांग्रेस का नाम हटा दिया था| पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह झारखंड कांग्रेस प्रभारी थे| रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह अपने सहयोगियों को उत्तर प्रदेश चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर पार्टी नेतृत्व से नाराज चल रहे थे|