नई दिल्ली: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एयर इंडिया को टाटा समूह को आधिकारिक रूप से सौंपे जाने से पहले आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। पीएमओ इस मुलाकात की तस्वीर शेयर की है| सरकार एयर इंडिया को आज टाटा समूह (Tata Group) को सौंप देगी|सरकार ने कहा, "एयर इंडिया के मौजूदा बोर्ड की अंतिम मीटिंग आज दोपहर करीब 2.30 बजे होगी| एयर इंडिया के बोर्ड के सरकारी सदस्य इस्तीफा देंगे| साथ ही टाटा संस द्वारा नामित नया बोर्ड नियंत्रण संभालेगा| इसके बाद टाटा संस एयर इंडिया के नए सीएमडी और शीर्ष पदों पर नियुक्ति करेगा|
सरकार ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के बाद आठ अक्टूबर को 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया को Talace प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया था| यह टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी की अनुषंगी इकाई है| इसके बाद, टाटा समूह को एक आशय पत्र (LoI) जारी किया गया था, जिसमें सरकार की एयरलाइन में अपनी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की इच्छा की पुष्टि की गई थी| फिर, केंद्र ने इस सौदे के लिए शेयर खरीद समझौते (SPA) पर हस्ताक्षर किए|
डील के तहत, एयर इंडिया के साथ उसकी किफायती विमान सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस की भी 100 हिस्सेदारी की बिक्री की जाएगी| साथ ही उसकी ग्राउंड हैंडलिंग कंपनी एआईएसएटीएस की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा समूह को दी जाएगी| सरकार ने 25 अक्टूबर को 18,000 करोड़ रुपये में एयर इंडिया की बिक्री के लिए टाटा संस के साथ खरीद समझौता किया था| टाटा सौदे के एवज में सरकार को 2,700 करोड़ रुपये नकद देगी और एयरलाइन पर बकाया 15,300 करोड़ रुपये के कर्ज की देनदारी लेगी|
1932 में शुरू हुई थी एअर इंडिया
एअर इंडिया के इतिहास की बात करें तो इसकी शुरुआत अप्रैल 1932 में हुई थी। इसकी स्थापना उद्योगपति JRD टाटा ने की थी। उस वक्त नाम टाटा एयरलाइंस हुआ करता था। JRD टाटा ने महज 15 की उम्र में साल 1919 में पहली बार शौकिया तौर पर हवाई जहाज उड़ाया था, लेकिन शौक जुनून बन गया और JRD टाटा ने अपना पायलट का लाइसेंस ले लिया।
15 अक्टूबर 1932 को पहली उड़ान
एयरलाइन की पहली कॉमर्शियल उड़ान 15 अक्टूबर 1932 को भरी गई थी। तब सिर्फ सिंगल इंजन वाला 'हैवीलैंड पस मोथ' हवाई जहाज था, जो अहमदाबाद-कराची के रास्ते मुंबई गया था। प्लेन में उस वक्त एक भी यात्री नहीं था बल्कि 25 किलो चिट्ठियां थीं। चिट्ठियों को लंदन से 'इम्पीरियल एयरवेज' से कराची लाया गया था। यह एयरवेज ब्रिटेन का राजसी विमान था। इसके बाद साल 1933 में टाटा एयरलाइंस ने यात्रियों को लेकर पहली उड़ान भरी। टाटा ने दो लाख रुपए की लागत से कंपनी स्थापित की थी।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद नाम पड़ा एअर इंडिया
दूसरे विश्व युद्ध के बाद इंडिया से सामान्य फ्लाइट्स शुरू की गईं और तब इसका नाम एअर इंडिया रखा गया। इसे सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बनाया गया। साल 1947 में आजादी के बाद एक नेशनल एयरलाइंस की जरूरत थी। भारत सरकार ने इसमें 49% हिस्सेदारी ली। इसके बाद 1953 में भारत सरकार ने एअर कॉर्पोरेशन एक्ट पास किया और टाटा समूह से इस कंपनी में ज्यादातर हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह यह पूरी तरह से एक सरकारी कंपनी बनी।
घाटे की शुरुआत
1954 में जब इसका राष्ट्रीयकरण हुआ, उसके बाद सरकार ने दो कंपनियां बनाईं। इंडियन एअरलाइंस घरेलू सेवा के लिए और एअर इंडिया विदेशी रूट के लिए तय की गई। साल 2000 तक यह कंपनी मुनाफे में रही। पहली बार 2001 में इसे 57 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। तब विमानन मंत्रालय ने इसके लिए उस समय के एमडी माइकल मास्केयरनहास को दोषी मानते हुए पद से हटा दिया था।
2007 में इंडियन एअरलाइंस को मिलाया गया
साल 2007 में एअर इंडिया को इंडियन एअरलाइंस के साथ मिला दिया गया। उस समय दोनों का घाटा 771 करोड़ रुपए था। मिलने से पहले इंडियन एअर लाइंस 230 करोड़ के घाटे में थी। जबकि एअर इंडिया 541 करोड़ के घाटे में थी। इसके बाद से घाटा लगातार बढ़ता गया और कंपनी कर्ज पर कर्ज लेती गई।