नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के 'प्रदर्शन कर रहे किसान नहीं मवाली हैं' बयान पर किसान नेता राकेश टिकैत ने पलटवार किया है| उन्होंने कहा,''हम किसान हैं, मवाली नहीं| किसान के बारे में ऐसी बात न करें| राकेश टिकैत ने कहा ,''मवाली वे हैं जिनके पास कुछ नहीं है। किसानों के लिए इस तरह की टिप्पणी करना गलत है। हम किसान हैं, मवाली नहीं। किसान हैं जमीन के 'अन्नदाता'
गुरुवार को केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी के बयान पर बोलते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा,''मवाली नहीं किसान हैं, किसान के बारे में ऐसी बात नहीं कहनी चाहिए। किसान देश का अन्नदाता है|
कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों द्वारा 'किसान संसद' लगाने पर राकेश टिकैत ने कहा,''शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने का ये भी एक तरीका है। जब तक संसद चलेगी हम यहां आते रहेंगे। सरकार चाहेगी तो बातचीत शुरू हो जाएगी|
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा,'' देश की सरकार किसान विरोधी सरकार है। किसानों को प्रदर्शन करते 8 महीने हो गए हैं लेकिन सरकार के पास समय नहीं है। संसद के सदस्यों को हमने कहा कि आप इस मुद्दे पर दबाव डाले ताकि सरकार बात करें|
दरअसल गुरुवार को कृषि क़ानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसानों पर केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, वे किसान नहीं हैं, वे मवाली हैं... ये आपराधिक कृत्य हैं। उन्होंने कहा कि ,'' 26 जनवरी को जो हुआ वह भी शर्मनाक आपराधिक गतिविधियां थी। विपक्ष ने ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया|
बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल के जवाब में लेखी ने कहा, “पहली बात तो आप उनको किसान कहना बंद कीजिए|क्योंकि वे किसान नहीं है, वे मवाली हैं|
केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा,''वे किसान नहीं मवाली हैं। इसका संज्ञान भी लेना चाहिए, ये आपराधिक गतिविधियां हैं, जो कुछ 26 जनवरी को हुआ वो भी शर्मनाक था, आपराधिक गतिविधियां थी, उसमें विपक्ष द्वारा ऐसी चीजों को बढ़ावा दिया गया|
बता दें कि,''केंद्र द्वारा पारित नए कृषि कानूनों को लेकर पिछले साल नवंबर से प्रदर्शन कर रहे किसान गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच जंतर-मंतर पहुंचे और इस कानून के खिलाफ अपना आंदोलन तेज किया।
पुलिस ने मध्य दिल्ली के चारों ओर सुरक्षा बढ़ा दी है और वाहनों की आवजाही पर कड़ी नजर रखी जा रही है। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अधिकतम 200 किसानों को नौ अगस्त तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति दे दी है। संसद भवन इससे कुछ ही मीटर की दूरी पर है।
'किसान संसद' की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा,''किसानों की बात संसद नहीं सुन रही है इसलिए सभी सांसदों को हमने चिट्ठी दिया है कि हमारे वोट से जीते हैं तो ऐसा करें कि हम वोट देते समय याद रखें। ईमानदार हैं तो हमारा सवाल उठाएं। आज हम यहां आए|
अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कहा,''यह 13 अगस्त तक लगातार चलेगा। प्रतिदिन 200 किसान सिंघु बॉर्डर से आएंगे और किसानों के मुद्दे पर चर्चा होगी। आज 3 कानूनों के पहले कानून APMC पर चर्चा हुई। इसके बाद हम कानून को संसद में खारिज करेंगे और संसद से अपील करेंगे कि 'किसान संसद' की बात मानकर कानून खारिज करे|