महाकुंभ के आखिरी अमृत स्नान माघी पूर्णिमा पर स्टेशनों पर चौतरफा श्रद्धालुओं की भीड़ टूटी। हर प्लेटफार्म खचाखच रहे।
फुट ओवरब्रिज व सीढ़ियों पर भी पैर रखने की जगह नहीं रही। रस्सा टीमें, क्यूआरटी, पीएसी, आरपीएफ, जीआरपी व रेलवे कर्मी की मुस्तैदी हर कोने पर रही।
आवाजाही के कारण सुबह-शाम और रात में भीड़ संभालने में सुरक्षाकर्मियों के पसीने छूटे। दिन में कुछ राहत रही। बुधवार शाम से वापसी के कारण विभिन्न रूटों पर स्पेशल मेमू रवाना की गई।
माघी पूर्णिमा पर रूटीन, महाकुंभ और मेला स्पेशल सहित 129 ट्रेनों से श्रद्धालु प्रयागराज गए। इसमें 46 मेला स्पेशल भी रहीं।
सेंट्रल से 28 और गोविंदपुरी से 18 मेला स्पेशल से श्रद्धालु प्रयागराज गए। अमृत स्नान के लिए मंगलवार देर रात 12 बजे से ही सेंट्रल व गोविंदपुर स्टेशनों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी।
यह सिलसिला बुधवार दिनभर चला। शाम से वापसी की भीड़ आने पर प्लेटफार्म फुल रहे।
प्लेटफार्म 3 से 7 तक रस्सा टीमें मुस्तैद रहीं। वहीं क्यूआरटी, पीएसी, आरपीएफ व जीआरपी ने मोर्चा संभाला। ट्रेनों से उतारने व बैठाने के साथ सुरक्षा के बीच गतव्य को रवाना किया।
सेंट्रल परिक्षेत्र की सीसीटीवी से निगरानी के साथ निकास व प्रवेश द्वारों पर विशेष सुरक्षा कर्मी मुस्तैद रहे। वहीं फुट ओवरब्रिज और सीढ़ियों पर सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने नजर रखी।