प्रदेश की बिजली कंपनियों की तरफ से वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) वर्ष 2025-26 पर विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के कार्रवाई शुरू करने के साथ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की चिंता बढ़ गई है।
उसके निजीकरण के निर्णय पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
इस बीच उपभोक्ता परिषद ने पावर कारपोरेशन को एनर्जी टास्क फोर्स फोर्स में सबसे पहले मंजूर कराए गए मसौदे की पोल खोलने की चेतावनी दे डाली है।
पावर कारपोरेशन के एनर्जी टास्क फोर्स की बैठक में 5 दिसंबर 2024 को पास किए गए मसौदे में पहले ही कई कमियों का खुलासा हो चुका है।
उपभोक्ता परिषद लगातार इसका विरोध करता रहा। इसके बाद फिर 9 जनवरी 2025 को एनर्जी टास्क फोर्स से एक नया मसौदा पास कराते नए सिरे से ट्रांजैक्शन एडवाइजर रखने की कार्रवाई शुरू की गई।
उपभोक्ता परिषद ने कहा है कि पावर कारपोरेशन अगर ये सोचता है कि इस तरह अब पुराना मुद्दा दब गया है, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है।
पुराने मामले में जो भी मंजूरी एनर्जी टास्क फोर्स से ली गई है, उसकी सीबीआई जांच कराई जाए।
परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जितने भी मामले पहले एनर्जी टास्क फोर्स में मंजूर कराए गए थे,
उन सभी मुद्दों को उपभोक्ता परिषद आम जनता के बीच में ले जाएगा। बिजली दर की सुनवाई शुरू होते ही विद्युत नियामक आयोग की आपत्तियों में भी उन्हें प्रमुख आधार बनाया जाएगा।