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25 अगस्त 2026

बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा ने अखिलेश यादव से की मुलाकात, अखिलेश सरकार को बताया 'डायनमिक‘

लखनऊ: जाने माने फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने आज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से पार्टी मुख्यालय लखनऊ में भेंट की। इस अवसर पर राजेन्द्र चौधरी तथा एस के राय भी थे। अभिनेता संजय मिश्…

बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा ने अखिलेश यादव से की मुलाकात, अखिलेश सरकार को बताया 'डायनमिक‘
बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा ने अखिलेश यादव से की मुलाकात, अखिलेश सरकार को बताया 'डायनमिक‘ | फ़ोटो: TVL News

लखनऊ: जाने माने फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा ने आज समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से पार्टी मुख्यालय लखनऊ में भेंट की। इस अवसर पर राजेन्द्र चौधरी तथा एस के राय भी थे। अभिनेता संजय मिश्रा ने अखिलेश यादव के नेतृत्व को ‘डायनमिक‘ बताते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्रित्वकाल में फिल्मों को काफी प्रोत्साहन दिया गया था। उत्तर प्रदेश में शूटिंग के लिए विशेष सुविधाएं दी गई। कम बजट की फिल्मों पर भी मदद दी गईं। कई फिल्मों को टैक्स फ्री किया गया था।





अखिलेश यादव ने ‘कड़वी हवा, आंखों देखी, मसान, कामयाब, गोलमाल और अंग्रेजी में कहते हैं‘ आदि फिल्मों के अभिनेता संजय मिश्रा को मुनस्यारी पिथौरागढ़ स्थित उनकी जमीन में लगाने के लिए चिनार के चार वृक्ष भेंट दिए। अखिलेश यादव ने सैफई और समाजवादी पार्टी मुख्यालय में लगाने के लिए चिनार के पेड़ कश्मीर से मंगाये है।





चिनार को कश्मीर में शाही वृक्ष माना जाता है। सन्1586 में सम्राट अकबर ने 1200 चिनार वृक्ष लगवाए थे। डल झील के किनारे बादशाह जहांगीर ने चारों तरफ चिनार वृक्ष लगाए थे। इस चिनार वृक्ष का गठिया और अन्य रोगों की औषधियों में भी प्रयोग होता है। शाल, कपड़ों पर कशीदाकारी में चिनार का प्रयोग होता है। स्मरणीय है, कश्मीर की खूबसूरती में चिनार ने चार चांद लगाए है। रंगबिरंगे चिनार की खूबसूरती को कई हिन्दी फिल्मों में भी प्रदर्शित किया गया है। कश्मीर में सैकड़ों चिनार दरख्तों की उम्र 300 से 700 साल तक है। गिलगित में मिले 1700 साल पुराने शिलालेखों पर भी चिनार की आकृतियां हैं। पतझड़ में भी इसके सुर्ख लाल पŸो अलग छटा बिखेरते हैं।




कश्मीर के सभी धर्मस्थलों पर, पवित्र चश्मों में चिनार होता है। इसे भवानी का प्रसाद भी मानते हैं। दुनिया का सबसे पुराना चिनार का पेड़ बडगाम के छत्रगाम में है। इसकी आयु 632 साल बताई जाती है। डोगरा शासकों के समय चिनार को राजस्व में दर्ज किया जाता था। हिन्दू-मुस्लिम-बौद्धधर्म के तमाम साधकों एवं सूफी संतो ने भी इसके नीचे तपस्या की जाती थी।






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