लखनऊ: उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर रोक लगा दी गई है। शुक्रवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इन चुनावों के लिए आरक्षण प्रकिया पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने आरक्षण और आवंटन कार्रवाई पर रोक दी है। इस बारे में सभी जिलों के डीएम को आदेश भेज दिया गया है। अदालत ने आरक्षण प्रकिया पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार भी लगाई। अजय कुमार की जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने यह फैसला लिया है। सोमवार को यूपी सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी।
गौरतलब है कि 17 मार्च को यूपी सरकार पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण की अंतिम सूची जारी करने वाली थी। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब इस पर ब्रेक लग गया है। सोमवार को सरकार के जवाब दाखिल करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने हाई कोर्ट के फैसले के बाद सभी डीएम को आरक्षण प्रकिया पर रोक लगाने संबंधी आदेश जारी कर दिया है।
अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने बयान जारी कर कहा,'' त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत के स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन के सम्बन्ध में निर्गत शासनादेश संख्या -12/2021/324/33-3-2021-62/2020 दिनांक 11.02.2021 के विरूद्ध मा0 उच्च न्यायालय में जनहित याचिका सं0-6929/2021 अजय कुमार बनाम राज्य सरकार व अन्य योजित की गयी है। उक्त याचिका मा० न्यायालय द्वारा सुनवाई के उपरान्त आदेश दिनांक 12.03.2021 निर्गत किए गए हैं| इस सम्बन्ध में मुझे यह कहने का निदेश हुआ है कि मा० उच्च न्यायालय द्वारा पारित उक्त आदेश दिनांक 12.03.2021 के अनुपालन में शासन के अग्रिम आदेशों तक पंचायत सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु आरक्षण एवं आवंटन की कार्यवाही को अन्तिम न किया जाए।
बता दें ,''अजय कुमार की पीआईएल में आरक्षण की नियमावली को चुनौती दी गई है। पीआईएल में फरवरी महीने में जारी किए गए शासनादेश को चुनौती दी गई है।सीटों का आरक्षण साल 2015 में हुए पिछले चुनाव के आधार पर किए जाने की मांग की गई है।इतना ही नहीं पीआईएल में 1995 से आगे के चुनावों को आधार बनाए जाने को गलत बताया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस ऋतुराज अवस्थी और जस्टिस मनीष माथुर की डिवीजन बेंच में हुई।
बता दें ,'',''17 मार्च तक फाइनल आरक्षण लिस्ट आने के बाद 25-26 मार्च तक पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी कर देने की संभावना जताई जा रही थी, पर अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद पंचायत चुनाव की तारीखें और लंबी खिंच सकती हैं। इससे पहले त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जिलों में आरक्षण सूची जारी कर दी गई थी। इसके बाद कई जिलों से आपत्ति आने के बाद अब सभी आपत्तियों के निस्तारण का काम गति पकड़ चुका था। साल 2015 में 59 हजार 74 ग्राम पंचायतें थीं, वहीं इस बार इनकी संख्या घटकर 58 हजार 194 रह गई है।