लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपी में हाल ही में हुए आजमगढ़ व रामपुर लोकसभा उपचुनाव के आये परिणाम के तीन दिन बाद ही आज वृहस्पतिवार 30 जून 2022 को प्रदेश के सभी 18 मण्डलों के वरिष्ठ पदाधिकारियों व अन्य प्रमुख ज़िम्मेवार लोगों की बैठक में पार्टी संगठन को ज़मीनी स्तर पर मजबूत बनाने व जनाधार के विस्तार के काम को और अधिक तेजी से आगे बढ़ाने के सम्बंध में नये जरूरी दिशा-निर्देश देते हुये कहा कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कारवाँ को बिना रुके व थके-हारे आगे बढ़ाते रहने का प्रयास लगातार जारी रखना ही हमारा मिशनरी लक्ष्य है ताकि देश के मानवतावादी संविधान व इसके लोकतंत्र का सही लाभ, यहाँ केवल कुछ मुट्ठी भर लोगों तक ही सीमित नहीं रहे बल्कि उसका आपेक्षित फायदा जन-जन को मिल सके।
बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि,''वैसे तो बी.एस.पी. का यह प्रयास मजबूत सैद्धान्तिक व राजनीतिक आधारों पर टिका हुआ है, परन्तु विरोधी शक्तियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि के अलावा जातिवादी संकीर्ण हथकण्डों आदि के दुरुपयोग के कारण यह अपार जनसमर्थन सही समय पर वोट में ट्रांसफर होने से रह जाता है, जिसको खास ध्यान में रखकर पार्टी को काफी सजग होकर आगे काम करना है।
उन्होंने कहा,''अर्थात् अब लोगों को हर विपरीत परिस्थिति से निपटने के साथ-साथ इनके मिथ्या प्रचार एवं गलत प्रोपागण्डा आदि से खासकर चुनाव के समय लोगों को भटकने आदि से बचाना होगा, क्योंकि विरोधी जातिवादी पार्टियाँ किसी भी कीमत पर बी.एस.पी. व उसके मानवतावादी मूवमेन्ट के ख़ासकर चुनावी सफलताओं के खिलाफ हैं तथा इस मुद्दे पर अन्ततः एक हो जाती हैं। एक समुदाय विशेष को खासकर इस प्रकार के घोर पार्टी विरोधी हथकण्डों के कारण गुमराह होने से बचाना होगा।
मायावती ने पार्टी कार्यालय में आयोजित लम्बे समय तक चली इस पार्टी बैठक में अन्य बातों के अलावा खासकर 27 मार्च व 29 मई 2022 की मीटिंगों में दी गई हिदायतों के सम्बंध में प्रगति रिपोर्ट की मण्डलवार गहन समीक्षा की तथा इनके अमल में पाई जाने वाली कमियों को यथासमय दूर करने का निर्देश दिया।
देश में अगले राष्ट्रपति के लिए हो रहे चुनाव की चर्चा करते हुए मायावती ने कहा कि इस बारे में बी.एस.पी. का अनसचित जनजाति समाज की महिला द्रौपदी मुर्मू को समर्थन देने का फैसला किसी व्यक्ति अथवा पार्टी विशेष की बजाय उपेक्षित एसटी समुदाय के बहुजन समाज के अभिन्न अंग होने के नाते ही लिया गया है। बी.एस.पी. ने यह फैसला स्वतंत्र होकर लिया है तथा यह न तो सत्ताधारी एनडीए के पक्ष में है और ना ही विपक्षी यूपीए के विरुद्ध।
उन्होंने कहा,''इतना जरूर है कि यूपीए ने अपना साझा उम्मीदवार तय करते समय बी.एस.पी. को कभी भी विश्वास में नहीं लिया और ना ही सलाह-मशवरा ही किया। पार्टी के आत्म-सम्मान को बरकरार रखने के लिए बी.एस.पी. द्वारा लिए गए इस स्वतंत्र व निडर फैसले की बैठक में सराहना की गई।
UP सरकार की गलत नीतियों व अहंकारी रवैयों आदि के कारण दिन-प्रतिदिन यहाँ गंभीर होती जा रही गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी:
बैठक में देश व खासकर विशाल आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में सरकारों की गलत नीतियों व अहंकारी रवैयों आदि के कारण लगातार बिगड़ते हुये हालात तथा दिन-प्रतिदिन यहाँ गंभीर स्तर पर पहुँचती जा रही गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी व अशान्ति का भी संज्ञान लिया गया, जिसके प्रति सरकार की लापरवाही व संलिप्तता को अति-दुःखद बताते हुए अराजक/नफरती तत्वों के प्रति तुष्टीकरण की बजाय उन पर केवल दिखावे के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह से सख्ती से निपटने की माँग सरकार से की गई।
उन्होंने कहा,"जबकि इस प्रकार के दुःखद माहौल पर से लोगों का ध्यान बांटने के लिए अपनाई जा रही सरकार की दमनकारी गिरफ्तार करो, जेल भेजो तथा मकान ध्वस्त करने आदि की गलत नीति एवं साम्प्रदायिक/जातिवादी कार्यशैली लगातार जारी है तथा सरकार चुनाव जीतने को ही कल्याणकारी राज्य होने का एक अकेला मापदण्ड मानकर संतुष्ट है, जो संवैधानिक व मानवीय दृष्टि से सर्वथा अनुचित व अशोभनीय।
केन्द्र व यूपी सहित सभी राज्य सरकारों से खासकर साम्प्रदायिक व जातिवादी नफरत, हिंसा व वैमन्स्य फैलाने वालों के खिलाफ बिना भेदभाव के तथा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सख्त कार्रवाई करने की माँग करते हुए मायावती ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों के अभाव में जनता का खासकर कानून-व्यवस्था के मामले में विश्वास जीतना कैसे संभव हो सकता है? उन्होंने लोगों से भी हर कीमत पर शान्ति-व्यवस्था बनाए रखने की भी अपील की।
अब सेना में भी ठेके की अस्थाई तौर पर 'अग्निवीरों' की भर्ती के विरुद्ध नौजवानों में आक्रोश को सरकार गंभीरता से लेकर इसका सही समाधान निकाले:
इसी प्रकार, सरकारी नौकरियों आदि की तरह ही सेना में भी ठेके की अस्थाई तौर पर 'अग्निवीरों की भर्ती के बारे में मायावती ने कहा कि केन्द्र सरकार को देश की सुरक्षा से सम्बंधित ऐसी दूरगामी प्रभाव वाली रक्षा नीति बनाने व उस पर अमल करने से पहले विस्तार से व पूरी गंभीरता के साथ सभी पक्षों से जरूर विचार-विमर्श कर लेना चाहिए था। ऐसा न होने का ही परिणाम है कि इस नई नीति को लेकर, पहले भूमि अधिग्रहण व फिर उसके बाद किसान आन्दोलन की तरह ही, पूरे देश में खासकर ग्रामीण नौजवानों व उनके परिवार वालों में काफी आक्रोश व्याप्त है। सरकार इसका सही व संतोषजनक समाधान जितना जल्द निकाल ले उतना ही बेहतर।