लखनऊ: लखीमपुर खीरी के तिकुनिया में किसानों को कुचलने का आरोपी गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी का बेटा आशीष मिश्रा मोनू रिहा हो गया है। लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा जेल से जमानत पर रिहा हुए। लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा जमानत पर रिहा होने के बाद जेल से बाहर आए। गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी अपने बेटे आशीष मिश्रा से मिलने उनके आवास पर पहुंचे।
आज यानी मंगलवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा के वकील अवधेश कुमार सिंह ने बताया,''कोर्ट ने दो बार तीन लाख रुपये की जमानत राशि की मांग की थी। शहर से बाहर जाने पर कोई पाबंदी नहीं होगी|
सोमवार को जिला जज ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए 3 लाख के दो जमानतदार और इतनी ही धनराशि के दो निजी मुचलके दाखिल करने का आदेश दिया था। जिस पर आशीष मिश्रा के अधिवक्ता अवधेश सिंह ने न्यायालय की प्रक्रिया पूरी करते हुए जमानत दाखिल कर दी है। आशीष के शहर से बाहर जाने पर भी पाबंदी नहीं होगी।
9 अक्टूबर को पकड़ा गया था आशीष
आशीष को SIT ने 9 अक्टूबर को पूछताछ के लिए पुलिस लाइन स्थित क्राइम ब्रांच बुलाया था। जहां करीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया था। तभी से आशीष लखीमपुर जेल में बंद था। जेल में आशीष को एक विशेष वर्ग की सेल में रखा गया था। यहां पर अन्य कैदियों का जाना मना था। जेल प्रशासन का कहना था कि यह सब सुरक्षा के लिहाज से किया गया था। 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आशीष को जमानत दी थी। इसके बाद संशोधित जमानत ऑर्डर 14 फरवरी को जारी किया गया था।
लखीमपुर खीरी में क्या हुआ था ?
जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर नेपाल की सीमा से सटे तिकुनिया गांव में 3 अक्टूबर 2021 की दोपहर करीब तीन बजे किसान भारी मात्रा में प्रदर्शन कर रहे थे, तभी अचानक से तीन गाड़ियां (थार जीप, फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो) किसानों को रौंदते चली गईं। घटना से आक्रोशित किसानों ने जमकर हंगामा किया। इस हिंसा में कुल 8 लोगों की मौत हो गई। इसमें 4 किसान, एक स्थानीय पत्रकार, दो भाजपा कार्यकर्ता शामिल थे|घटना के बाद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपना दौरा रद्द कर दिया था।
'सोची समझी साजिश' के तहत किसानों को गाड़ी से कुचला गया था: SIT
लखीमपुर खीरी के मामले में जांच कर रही एसआईटी की टीम ने 14 दिसंबर, 2021 को बड़ा खुलासा किया था| लखीमपुर खीरी मामले में किसानों पर गाड़ी चढ़ाना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी| स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (SIT) ने यह बात कही थी| लखीमपुर हिंसा को SIT ने सोची समझी साजिश बताया था।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच कर रही टीम का कहना था कि यह घटना एक "पूर्व नियोजित साजिश" थी, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। जांच अधिकारी ने आरोपियों के खिलाफ धाराएं बढ़ाने के लिए सीजीएम कोर्ट में अर्जी दी थी।
लखीमपुर SIT ने हत्या कांड के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा और बाकी साथियों पर IPC की धाराओं 279,338,304A को हटाकर 307, 326, 34 जैसी सख़्त धाराएँ लगाने के लिए कोर्ट में ऐप्लिकेशन डाली थी। SIT ने कहा था कि लखीमपुर नरसंहार जानबूझकर प्लानिंग करके किया गया था।
गौर हो कि, बीते साल तीन अक्टूबर की तारीख को लखीमपुर खीरी के तिकुनिया गांव में किसानों के प्रदर्शन आंदोलन के दौरान गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा ने एसयूवी कार से किसानों को कुचल दिया गया था। जिसमें चार किसानों की मौके पर मौत हो गई थी, इस घटना में एक स्थानीय पत्रकार रमन कश्यप की मौत भी हो गई थी। किसानों ने आरोप लगाते हुए कहा था कि गाड़ी केंद्रीय गृहराज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की थी और उसमें उनका बेटा आशीष मिश्रा भी मौजूद था।
इस मामले में खूब बवाल हुआ,काफी विरोध के बाद में मामले सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आया। शीर्ष अदालत ने हिंसा मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की और एक जांच टीम गठित की। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार मामले की सुनवाई करने के दौरान राज्य सरकार को फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी सख्ती के बाद हिंसा के कई दिनों के बाद आशीष मिश्रा उर्फ मोनू को कई घंटों की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था।