लखनऊ: यूपी पंचायत चुनाव 2021: यूपी में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है। इसके बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत के स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है|
अपर मुख्य सचिव मनाेज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में सभी जिलाधिकारियों को कहा गया है कि नियमावली के अनुसार, पंचायतों में आरक्षण चक्रानुक्रम रीति से ही होगा लेकिन जहां तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, 2000, 2010 और वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जाएगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जाएंगी। इसी तरह पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायतें पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जाएंगी।
बता दें कि इस नियमावली के आधार पर ही अगले एक माह में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के वार्डों का आरक्षण निर्धारण होगा। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करके 30 अप्रैल तक पंचायतों के चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में अप्रैल माह में 58194 ग्राम पंचायतों, 731813 ग्राम पंचायत सदस्यों, 75855 क्षेत्र पंचायत सदस्यों, 3051 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद 826 ब्लाक प्रमुखों व 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन होगा।
आरक्षण की क्रमावली
(A) अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियां
(B) अनुसूचित जनजातियां
(C) अनुसूचित जातियों की स्त्रियां
(D) अनुसूचित जातियां
(E) पिछड़े वर्गों की स्त्रियां
(F) पिछड़े वर्ग
(G) स्त्रियां
राज्य में प्रधान पदों के आरक्षण की गणना:
राज्य स्तर पर ग्राम पंचायतों में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के पदों की संख्या की संगणना उत्तर प्रदेश पंचायतराज अधिनियम, 1947 की धारा 11-क के उपबन्धों के अनुसार राज्य में उनकी जनसंख्या का कुल जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा।
यह गणना इस प्रकार की जायेगी कि यदि शेष, भाजक के आधे से कम न हो तो भागफल में एक बढ़ाया जायेगा और यदि शेष, भाजक के आधे से कम हो तो इसे छोड़ दिया जायेगा परन्तु चूंकि पिछड़े वर्गों के लिए प्रधान के पदों का आरक्षण अधिकतम 27 प्रतिशत अनुमन्य है इसलिए पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत पद आरक्षित किये जाने की दशा में आरक्षित किये जाने वाले प्रधान के पदों की संगणना में मात्र भागफल के पूर्णांक को ही संज्ञान में लिया जायेगा और शेष को संज्ञान में नहीं लिया जायेगा।
इस प्रकार अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के पदों की संख्या अवधारित हो जायेगी। उपर्युक्तानुसार अवधारित प्रधानों के पदों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अन्यून पद, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जायेंगे। इस प्रकार इन जातियों/वर्गों की स्त्रियों के लिये आरक्षित पदों को सम्मिलित करते हुए राज्य में प्रधानों के कुल पदों की संख्या के एक तिहाई से अन्यून पद स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जायेंगें। प्रत्येक आरक्षित वर्ग में स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के पदों और स्त्रियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधान के कुल पदों की संगणना करने में यदि भाज्य, भाजक से पूर्णतया विभाजित न हो और कुछ शेष बचता हो तो भागफल में 1 बढ़ जायेगा।
उदाहरण : वर्तमान में प्रदेश की कुल ग्राम पंचायतें 58194 हैं। अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या प्रदेश की जनसंख्या का 0.5677 % है। अतः प्रदेश में प्रधानों के पदों की कुल संख्या का 0.5677 % पद अर्थात 330 पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होगी। इसी प्रकार प्रदेश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या का कुल जनसंख्या में 20.6982 प्रतिशत है, अतः प्रधान के कुल पदों में 20.6982 % यानि कि 12045 पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होंगे। पिछड़े वर्ग के लिए प्रधान के कुल पदों का अधिकतम 27 % जो कि 15712 बनता है, आरक्षित होंगे। अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों की स्त्रियों के लिए आरक्षित पदों को सम्मिलित करते हुए प्रदेश में प्रधानों के पदों की कुल संख्या के एक तिहाई से अन्यून पद स्त्रियों के लिए आरक्षित किये जाएगें।
राज्य में ग्राम प्रधानों के पदों की श्रेणीवार आरक्षण की संगणना (कुल पदों की संख्या-58194)
A. अनुसूचित जन जाति (ST) के लिए कुल 330 पद आरक्षित है
B. अनुसूचित जाति (SC) के लिए कुल 12045 पद आरक्षित है
C. पिछड़ी जाति (OBC) के लिए कुल 15712 पद आरक्षित है
विकास खण्ड में प्रधान पदों के आरक्षण की गणनाः किसी खण्ड (ब्लॉक) में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के पदों की संगणना सर्वप्रथम निम्नलिखित फार्मूला से की जाएगी:
खण्ड (ब्लाक) में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों की संख्या= खण्ड (ब्लाक) में कुल ग्राम पंचायतों की
संख्या x खण्ड (ब्लाक) में अअनुसूचित जनजातियों की ग्रामीण जनसंख्या / खण्ड (ब्लाक) की कुल ग्रामीण की
जनसंख्या
परन्तु इस प्रकार अनूसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के संगणित पदों की संख्या यदि खण्ड (ब्लॉक) की ग्राम पंचायतों की कुल संख्या के 0.5677 % से अधिक आती हैं तो उसे 0.5677 % तक सीमित रखा जायेगा। उपर्युक्तानुसार प्रधानों के पदों की संख्या की संगणना के उपरान्त भी राज्य स्तर पर अनूसूचित जनजातियों के लिए संगणित पदों की संख्या अवितरित रहने की दशा में, उन्हें खण्ड (ब्लॉक) की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों की ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात के अवरोही कम में, मात्र उन्हीं खण्डों (ब्लॉक) में पुनर्वितरण किया जायेगा जिनमें अनुसूचित जनजातियों की ग्रामीण जनसंख्या का खण्ड ब्लॉक की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुपात राज्य में उनकी जनसंख्या का राज्य की कुल जनसंख्या के अनुपात जो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 0.5677 है, से अधिक हो। पुनर्वितरण हेतु ऐसे खण्डों (ब्लॉक) को सर्वप्रथम एक-एक पद का वितरण किया जायेगा तथा यथावश्यक यह प्रक्रिया तब तक चलायी जायेगी जब तक समस्त अवितरित पदों का वितरण नहीं हो जाता है।
उदाहरण:-सर्वप्रथम प्रत्येक खण्ड ब्लॉक में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार परन्तु अधिकतम 0.5677 प्रतिशत पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी। इसके उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जनजातियों के लिए संगणित पदों में आने वाली कमी को ऐसे खण्डों (ब्लॉक) जहां अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का प्रतिशत 0.5677 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा। यदि किसी खण्ड (ब्लॉक) में प्रधानों के कुल पदों की संख्या 100 तथा खण्ड में अनुसूचित जनजातियों की ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 5 हो तो भी सर्वप्रथम खण्ड (ब्लॉक) में प्रधानों के कुल पदों के 0.5677 प्रतिशत पद अर्थात 1 पद की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी और इसके उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जनजातियों के लिए संगणित पदों अर्थात् 330 पदों में आने वाली कमी को इस खण्ड (ब्लॉक) सहित ऐसे सभी खण्डों (ब्लॉक) जहां अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का प्रतिशत 0.5677 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा।'
विकास खण्ड ब्लॉक में अनुसूचित जातियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के 12045 पदों की संगणना सर्वप्रथम निम्नलिखित फार्मूला से की जाएगी:
खण्ड (ब्लाक) में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों की संख्या= खण्ड (ब्लाक) में कुल ग्राम पंचायतों की
संख्या x खण्ड (ब्लाक) में अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या / खण्ड (ब्लाक) की कुल ग्रामीण की
जनसंख्या
परन्तु इस प्रकार अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के संगणित पदों की संख्या यदि खण्ड (ब्लाक) की ग्राम पंचायतों की कुल संख्या के 20.6982 प्रतिशत से अधिक आती हैं तो उसे 20.6982 प्रतिशत तक सीमित रखा जायेगा। उपर्युक्तानुसार प्रधानों के पदों की संख्या की संगणना के उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति के लिए संगणित पदों की संख्या अवितरित रहने की दशा में, उन्हें खण्ड (ब्लाक) की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुसूचित जाति की ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में, मात्र उन्हीं खण्डों (ब्लाक) में पुनर्वितरण किया जायेगा जिनमें अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या का खण्ड (ब्लाक) की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुपात, राज्य में उनकी जनसंख्या का राज्य की कुल जनसंख्या के अनुपात, जो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 20.6982 है, से अधिक हो।
पुनर्वितरण हेतु ऐसे खण्डों (ब्लाक) को सर्वप्रथम एक-एक पद का वितरण किया जायेगा तथा यथावश्यक यह प्रक्रिया तब तक चलायी जायेगी जबतक समस्त अवितरित पदों का वितरण नहीं हो जाता है। उदाहरण :सर्वप्रथम प्रत्येक खण्ड (ब्लाक) में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार परन्तु अधिकतम् 20.6982 प्रतिशत पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी। इसके उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जातियों के लिए संगणित पदों में आने वाली कमी को ऐसे खण्डों (ब्लाक) जहाँ अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का प्रतिशत 20.6982 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा।
यदि किसी खण्ड (ब्लाक) में प्रधानों के कुल पदों की संख्या 100 तथा अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 25.00 हो तो भी सर्वप्रथम खण्ड (ब्लाक) में प्रधानों के कुल पदों के 20.6982 प्रतिशत पद अर्थात 21 पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी और इसके उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जातियों के लिए संगणित पदों अर्थात् 12045 पदों में आने वाली कमी को, इस खण्ड (ब्लाक) सहित ऐसे सभी खण्डों (ब्लाक) जहाँ अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का प्रतिशत 20.6982 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा।
विकास खण्ड (ब्लाक) में पिछड़ी जातियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के 15712 पदों की संगणना सर्वप्रथम निम्नलिखित फार्मूला से की जायेगी:
खण्ड (ब्लाक) में पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों की संख्या= खण्ड (ब्लाक) में कुल ग्राम पंचायतों की
संख्या x खण्ड (ब्लाक) में पिछड़े वर्गो की ग्रामीण जनसंख्या / खण्ड (ब्लाक) की कुल ग्रामीण की जनसंख्या
परन्तु इस प्रकार पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रधानों के संगणित पदों की संख्या यदि खण्ड (ब्लाक) की ग्राम पंचायतों की कुल संख्या के 27 प्रतिशत से अधिक आती है तो उसे 27.00 प्रतिशत तक ही सीमित रखा जायेगा। उपर्युक्तानुसार प्रधानों के पदों की संख्या की संगणना के उपरान्त राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए संगणित पदों की संख्या अवितरित रहने की दशा में, उन्हें खण्ड (ब्लाक) की ग्रामीण जनसंख्या में पिछड़े वर्ग की ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में, मात्र उन्हीं खण्डों (ब्लाक) में पुनर्वितरण किया जायेगा जिनमें पिछड़े वर्गो की ग्रामीण जनसंख्या का खण्ड (ब्लाक) की ग्रामीण जनसंख्या में अनुपात, राज्य में उनकी जनसंख्या का राज्य की कुल ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात, जो वर्ष 2015 के त्वरित सर्वेक्षण के अनुसार 53.33 है, से अधिक हो। पुनर्वितरण हेतु ऐसे खण्डों (ब्लाक) को सर्वप्रथम एक-एक पद का वितरण किया जायेगा तथा यथावश्यक यह प्रक्रिया तब तक चलायी जायेगी जबतक समस्त अवितरित पदों का वितरण नहीं हो जाता है।
उदाहरण : सर्वप्रथम प्रत्येक खण्ड (ब्लाक) में पिछड़े वर्गो की जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार परन्तु अधिकतम् 27.00 प्रतिशत पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी। इसके उपरान्त राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए संगणित पदों में आने वाली कमी को ऐसे खण्डों (ब्लाक) जहाँ पिछड़े वर्गो की जनसंख्या का प्रतिशत 53.33 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा। यदि किसी खण्ड (ब्लाक) में प्रधानों के कुल पदों की संख्या 100 तथा पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का प्रतिशत 35.00 हो तो भी सर्वप्रथम खण्ड (ब्लाक) में प्रधानों के कुल पदों के 27.00 प्रतिशत अर्थात 27 पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी और इसके उपरान्त राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए संगणित पदों अर्थात् 15712 पदों में आने वाली कमी को ऐसे सभी खण्डों (ब्लाक) जहाँ पिछड़े वर्गो की जनसंख्या का प्रतिशत 53.33 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा।
खण्ड के अन्तर्गत प्रधान के पदों का आवंटन :
1. अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिये प्रधानों के आरक्षित पदों की संख्या उस खण्ड (ब्लाक) में भिन्न-भिन्न ग्राम पंचायतों को उनके प्रादेशिक क्षेत्र की कुल जनसंख्या में क्रमशः अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गो की जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में आवंटित की जायेगी अर्थात् उस खण्ड (ब्लाक) की ग्राम पंचायतों में से वह ग्राम पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी और वह ग्राम पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी और वह ग्राम पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी, किन्तु इस प्रकार कि, जहाँ तक हो सके, पंचायतों के सामान्य निर्वाचनों वर्ष 1995, 2000, 2005, 2010 एवं 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित ग्राम पंचायत अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जायेगी, अनुसूचित जातियों को आवंटित ग्राम पंचायत अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और पिछड़े वर्गों को आवंटित ग्राम पंचायत पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगी।
2. प्रतिबन्ध यह है कि अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गो की किसी पंचायत क्षेत्र में जनसंख्या दो व्यक्ति से कम हो तो ऐसे पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत के प्रधान का पद, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं किया जायेगा।
3.उक्त के अधीन अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों को आवंटित ग्राम पंचायत के प्रधानों के पदों के एक तिहाई से अन्यून पद, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियां,अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की स्त्रियों को आवंटित किये जायेंगे।
उपर्युक्तानुसार स्त्रियों के लिये आवंटित प्रधानों के पदों को सम्मिलित करते हुए खण्ड (ब्लाक) में प्रधानों के पदों की कुल संख्या के एक तिहाई से अन्यून प्रधानों के पदों को स्त्रियों को आवंटित किया जायेगा किन्तु इस प्रकार कि जिन ग्राम पंचायतों के प्रादेशिक क्षेत्रों में सामान्य वर्ग की अधिक जनसंख्या, (जिसमें अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है), वे उनको आवंटित की जायेगी, किन्तु इस प्रकार कि, जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती पंचायतों के सामान्य निर्वाचनों वर्ष 1995, 2000, 2005, 2010 एवं 2015 में स्त्रियों को आवंटित ग्राम पंचायतें स्त्रियों को आवंटित नहीं की जायेंगी। सामान्य जनसंख्या का अवरोही क्रम बनाने में यदि एक से अधिक ग्राम पंचायतों की सामान्य जनसंख्या समान अथवा शून्य हो तो उस दशा में ऐसी ग्राम पंचायतों को उनकी कुल जनसंख्या के आधार पर उन्हें अवरोही क्रम में व्यवस्थित कर पदों का आवंटन किया जायेगा।
उदाहरण: ___ खण्ड (ब्लाक) के लिये आरक्षित पदों को विभिन्न ग्राम पंचायतों में आवंटन करने हेतु सर्वप्रथम ग्राम पंचायतों को, ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जायेगा तथा प्रत्येक वर्ग के लिये आरक्षित पदों की संख्या क्रमावली के अनुसार उपर्युक्तानुसार व्यवस्थित ग्राम पंचायतों में आवंटित की जायेगी परन्तु, जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात् पंचायतों के सामान्य निर्वाचनों वर्ष 1995, 2000, 2005, 2010 एवं 2015 में अनुसूचित जनजातियों या अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गो को आवंटित ग्राम पंचायत, पंचायतों के सामान्य निर्वाचन 2021 में अनुसूचित जनजातियों या अनुसूचित जातियों या पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगी।
स्त्रियों के लिये आरक्षित पदों का आवंटन करने हेतु ग्राम पंचायत की कुल जनसंख्या में से अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों की जनसंख्या को घटाते हुए सामान्य जनसंख्या का ग्राम पंचायतवार अवरोही क्रम तैयार किया जायेगा तथा इस प्रकार तैयार किये गये अवरोही क्रम में अधिक सामान्य जनसंख्या वाली ग्राम पंचायतें स्त्रियों को आवंटित की जायेगी परन्तु जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात पंचायतों के सामान्य निर्वाचनों 1995, 2000, 2005, 2010 एवं वर्ष 2015 में स्त्रियों को आवंटित ग्राम पंचायतें पंचायतों के सामान्य निर्वाचन वर्ष 2021 में स्त्रियों को आवंटित नहीं की जायेंगी।
4. प्रधान के पदों के आवंटन के लिए खण्ड की समस्त ग्राम पंचायतों को अनुसूचित जनजाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पद का आवंटन उन ग्राम पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी भी अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित हुई ग्राम पंचायतों में ऊपर से अनुमन्य संख्या में ग्राम पंचायतें अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित कर दी जायेंगी। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त ग्राम पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और अनुसूचित जनजाति के ग्राम प्रधान पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए खण्ड की ग्राम पंचायतों को अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन ग्राम पंचायतों को अब आरक्षित किया जायेगा, जो कि वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों।
5. खण्ड की समस्त ग्राम पंचायतों को अनुसूचित जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पद का आवंटन उन ग्राम पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी भी अनुसूचित जाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित हुई ग्राम पंचायतों में ऊपर से अनुमन्य संख्या में ग्राम पंचायतें अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दी जायेंगी। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त ग्राम पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और अनुसूचित जाति के ग्राम प्रधान पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए खण्ड की ग्राम पंचायतों को अनुसूचित जाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन ग्राम पंचायतों को अब आरक्षित किया जायेगा, जो कि वर्ष 2015 में अनुसूचित जाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों।
6. खण्ड में पिछड़ी जाति के ग्राम पंचायत प्रधान पदों के आवंटन के लिए अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित ग्राम पंचायतों को हटाते हुए शेष बची ग्राम पंचायतों को पिछड़ी जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पदों का आवंटन उन ग्राम पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी पिछड़ी जाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित ग्राम पंचायतों में ऊपर से एक तिहाई से अन्यून संख्या में पिछड़ी जाति महिला पदों के लिए आरक्षित कर दी जायेगी। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त ग्राम पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और खण्ड में पिछड़ी जाति के ग्राम प्रधान के पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए शेष बची हुई ग्राम पंचायतों को पिछड़ी जाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन ग्राम पंचायतों को अब आरक्षित किया जाएगा जो कि वर्ष 2015 में पिछड़ी जाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों।
7.स्त्री के लिए आरक्षित ग्राम पंचायत प्रधान पदों का आवंटन खण्ड की ग्राम पंचायतें, जो अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हो चुकी हैं उनको हटाते हुए जो शेष हैं, उन्हें सामान्य वर्ग की जनसंख्या के आधार पर अवरोही क्रम में लगाया जायेगा। सर्वप्रथम स्त्री पद का आवंटन उन ग्राम पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी स्त्री श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त ग्राम पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और खण्ड में स्त्री श्रेणी के ग्राम प्रधान पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए खण्ड में शेष ग्राम पंचायतों को सामान्य वर्ग की जनसंख्या के आधार पर अवरोही क्रम में उन ग्राम पंचायतों को अब आरक्षित किया जाएगा, जो वर्ष 2015 में स्त्री श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हैं।
उपर्युक्तानुसार ही पंचायतों के सामान्य निर्वाचन 2021 के आरक्षण में चक्रानुक्रम (रोटेशन) लागू किया जायेगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष, क्षेत्र पंचायत प्रमुख एवं ग्राम पंचायत प्रधान पदों के आवंटन के दौरान यदि दो जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों एवं ग्राम पंचायतों के समान प्रतिशत होने की दशा में जिला पंचायतों/क्षेत्र पंचायतों/ ग्राम पंचायतों को अकारादि क्रम में क्रमांकित किया जायेगा और कम क्रमांक वाली जिला पंचायत/क्षेत्र पंचायत/ग्राम पंचायत को आरक्षित किया जायेगा।