लखनऊ: यूपी पंचायत चुनाव 2021: यूपी में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है। इसके बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत के स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है
अपर मुख्य सचिव मनाेज कुमार सिंह की ओर से जारी आदेश में सभी जिलाधिकारियों को कहा गया है कि नियमावली के अनुसार, पंचायतों में आरक्षण चक्रानुक्रम रीति से ही होगा लेकिन जहां तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, 2000, 2010 और वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जाएगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जाएंगी। इसी तरह पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायतें पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जाएंगी।
अनुच्छेद 243-घ तथा तत्क्रम में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-11क तथा धारा-12(5) और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-6क, 7क, 18क व 19क में प्राविधानित व्यवस्था के अनुसार प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों और पदों के आरक्षण और आवंटन हेतु, दो नियमावलियां-उत्तर प्रदेश पंचायतराज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 (यथा संशोधित) एवम् उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 प्रख्यापित है। उक्त दोनों नियमावलियों के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों (चेयरपरसन) एवम् स्थानों (सदस्यों) के आरक्षण एवम् आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित है। त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत के स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन के सम्बन्ध में निम्नवत् निर्देश निर्गत किये जाते हैं|
आरक्षण की क्रमावली
(A) अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियां
(B) अनुसूचित जनजातियां
(C) अनुसूचित जातियों की स्त्रियां
(D) अनुसूचित जातियां
(E) पिछड़े वर्गों की स्त्रियां
(F) पिछड़े वर्ग
(G) स्त्रियां
जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों का आरक्षण की संगणनाः
1. राज्य में जिला पंचायतों में अनुसचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले अध्यक्षों के पदों की संख्या की संगणना उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 19-क के उपबन्धों के अनुसार प्रदेश में उनकी जनसंख्या के अनुपात में की जाएगी। यदि शेष, भाजक के आधे से कम न हो तो भागफल में एक बढ़ाया जायेगा और यदि शेष, भाजक के आधे से कम हो तो उसे छोड़ दिया जायेगा। परन्तु चूंकि पिछड़े वर्गों के लिए अध्यक्ष के पदों का आरक्षण अधिकतम 27 प्रतिशत अनुमन्य है इसलिए पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत आरक्षित किये जाने वाले अध्यक्ष के पदों की संगणना में मात्र भागफल के पूर्णांक को ही संज्ञान में लिया जायेगा और शेष को संज्ञान में नहीं लिया जायेगा।
इस प्रकार अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले अध्यक्ष के पदों की संख्या अवधारित हो जायेगी। उपर्युक्तानुसार अवधारित अध्यक्षों के पदों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अन्यून पद, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गो की स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जायेंगे और इस प्रकार स्त्रियों के लिये आरक्षित पदों को सम्मिलित करते हुए राज्य में अध्यक्षों के कुल पदों की संख्या के एक तिहाई से अन्यून पद स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जायेंगें। प्रत्येक आरक्षित वर्ग में स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले जिला पंचायत के अध्यक्षों के पदों और स्त्रियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले अध्यक्ष के कुल पदों की संगणना करने में यदि भाज्य, भाजक से पूर्णतया विभाजित न हो और कुछ शेष बचता हो तो भागफल में 1 बढ़ जायेगा।
2.उल्लिखित क्रमावली के क्रम में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिये जिला पंचायत के अध्यक्षों के आरक्षित पदों की संख्या राज्य में भिन्न-भिन्न जिला पंचायतों को उनके प्रादेशिक क्षेत्र की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में आवंटित की जानी है। अर्थात् राज्य में जिला पंचायतों में से वह जिला पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी और वह जिला पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी, और वह जिला पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी।
पंचायतों के सामान्य निर्वाचन वर्ष 2021 में आवंटन उपर्युक्त रीति से किया जायेगा किन्तु इस प्रकार कि जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात् सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 तथा वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और अनुसूचित जातियों को आवंटित जिला पंचायतें अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायतें पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगी।
3. उक्त के अधीन अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों को आवंटित जिला पंचायतों की एक तिहाई से अन्यून जिला पंचायतें यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों की स्त्रियों को आवंटित की जायेगी। उपर्युक्तानुसार स्त्रियों के लिये आवंटित जिला पंचायत के अध्यक्ष पदों को सम्मिलित करते हुए राज्य में जिला पंचायत के अध्यक्षों के पदों की कुल संख्या के एक तिहाई से अन्यून जिला पंचायत के अध्यक्षों के पदों को स्त्रियों को आवंटित किया जायेगा।
जिन जिला पंचायतों के प्रादेशिक क्षेत्रों में अधिक जनसंख्या (जिसमें अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है), वे स्त्रियों को आवंटित की जायेगी। किन्तु इस प्रकार कि जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 तथा वर्ष 2015 में स्त्रियों को आवंटित जिला पंचायतें स्त्रियों को आवंटित नहीं की जायेंगी।
4.उपर्युक्तानुसार ही पंचायतों के आगामी सामान्य निर्वाचन वर्ष 2021 के आरक्षण में चक्रानुक्रम (रोटेशन) लागू किया जायेगा। इसके फलस्वरूप पिछले सामान्य निर्वाचनों (वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 तथा वर्ष 2015) में आरक्षित वर्गों (अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों तथा स्त्रियों) के लिये जो जिला पंचायतें आरक्षित की गयी थीं, उन्हें आगामी निर्वाचन में संबंधित आरक्षित वर्ग के लिये आरक्षित नहीं किया जायेगा बल्कि अवरोही क्रम में अगले स्टेज पर आने वाली जिला पंचायत से आरक्षण शुरू किया जायेगा।
जिला पंचायत के अध्यक्षों के आरक्षण की संगणना (कुल पदों की संख्या-75)
5.पदों के आवंटन हेतु प्रदेश की समस्त जिला पंचायतों को अनुसूचित जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पद का आवंटन उन जिला पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी भी अनुसूचित जाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित हुई जिला पंचायतों में ऊपर से अनुमन्य संख्या में जिला पंचायतें अनुसूचित जाति स्त्री के लिए आरक्षित कर दी जायेंगी।
इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त जिला पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और अनुसूचित जाति के जिला पंचायत अध्यक्ष पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए प्रदेश की जिला पंचायतों के अनुसूचित जाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन जिला पंचायतों को आरक्षित किया जायेगा, जो कि वर्ष 2015 में अनुसूचित जाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों। अगर इस प्रकार आरक्षित करते समय यदि किसी मण्डल की समस्त जिला पंचायतें अनुसूचित जाति की श्रेणी में आरक्षित हो जाती हैं तो उस मण्डल के समस्त जिलों को कुल आबादी के आरोही क्रम में लगाते हुए उस जिले को अनारक्षित कर दिया जायेगा जिसकी आबादी सबसे कम है।
6.इसी प्रकार पिछड़ी जाति के जिला पंचायत अध्यक्ष पदों के आवंटन के लिए अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित जिला पंचायतों को हटाते हुए शेष बची जिला पंचायतों को पिछड़ी जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पदों का आवंटन उन जिला पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी पिछड़ी जाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। आवंटित जिला पंचायतों में ऊपर से पिछड़ी जाति महिला पदों के लिए आरक्षित कर दी जायेगी।
इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त जिला पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और प्रदेश में पिछड़ी जाति के जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए शेष बची हुई जिला पंचायतों को पिछड़ी जाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन जिला पंचायतों को अब आरक्षित किया जाएगा जो कि वर्ष 2015 में पिछड़ी जाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों। अगर इस प्रकार आरक्षित करते समय यदि किसी मण्डल की समस्त जिला पंचायतें पिछड़ी जाति की श्रेणी में आरक्षित हो जाती हैं तो उस मण्डल के समस्त जिलों को कुल आबादी के आरोही क्रम में लगाते हुए उस जिले को अनारक्षित कर दिया जायेगा जिसकी आबादी सबसे कम है।
7. स्त्रियों के लिए आरक्षित जिला पंचायत अध्यक्ष पदों का आवंटन प्रदेश की जिला पंचायतें, जो अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हो चुकी हैं उनको हटाते हुए जो शेष हैं, उन्हें सामान्य की जनसंख्या के आधार पर अवरोही क्रम में लगाया जायेगा। सर्वप्रथम स्त्री पद का आवंटन उन जिला पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी स्त्री श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं।
इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त जिला पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और प्रदेश में स्त्री श्रेणी के जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए प्रदेश में शेष जिला पंचायतों को सामान्य की जनसंख्या के आधार पर अवरोही क्रम में उन जिला पंचायतों को अब आरक्षित किया जाएगाा, जो वर्ष 2015 में स्त्री श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हैं। अगर इस प्रकार आरक्षित करते समय यदि किसी मण्डल की समस्त जिला पंचायतें स्त्री श्रेणी में आरक्षित हो जाती हैं तो उस मण्डल के समस्त जिलों को कुल आबादी के आरोही क्रम में लगाते हुए उस जिले को अनारक्षित कर दिया जायेगा, जिसकी आबादी सबसे कम है।
बता दें कि इस नियमावली के आधार पर ही अगले एक माह में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के वार्डों का आरक्षण निर्धारण होगा। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करके 30 अप्रैल तक पंचायतों के चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में अप्रैल माह में 58194 ग्राम पंचायतों, 731813 ग्राम पंचायत सदस्यों, 75855 क्षेत्र पंचायत सदस्यों, 3051 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद 826 ब्लाक प्रमुखों व 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन होगा।