लखनऊ: यूपी पंचायत चुनाव 2021: यूपी में होने वाले पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है। इसके बाद अब आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत के स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन आरक्षण नियमावली जारी कर दी गई है|
अनुच्छेद 243-घ तथा तत्क्रम में उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-11क तथा धारा-12(5) और उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-6क, 7क, 18क व 19क में प्राविधानित व्यवस्था के अनुसार प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों के स्थानों और पदों के आरक्षण और आवंटन हेतु, दो नियमावलियां-उत्तर प्रदेश पंचायतराज (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 (यथा संशोधित) एवम् उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत (स्थानों और पदों का आरक्षण और आवंटन) नियमावली, 1994 प्रख्यापित है। उक्त दोनों नियमावलियों के अन्तर्गत त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों (चेयरपरसन) एवम् स्थानों (सदस्यों) के आरक्षण एवम् आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित है। त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2021 हेतु जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं ग्राम पंचायत के स्थानों और पदों का आरक्षण व आवंटन के सम्बन्ध में निम्नवत् निर्देश निर्गत किये जाते हैं|
आरक्षण की क्रमावली
(A) अनुसूचित जनजातियों की स्त्रियां
(B) अनुसूचित जनजातियां
(C) अनुसूचित जातियों की स्त्रियां
(D) अनुसूचित जातियां
(E) पिछड़े वर्गों की स्त्रियां
(F) पिछड़े वर्ग
(G) स्त्रियां
विकास खण्ड के प्रमुख पदों के आरक्षण की संगणना:
राज्य स्तर पर क्षेत्र पंचायतों में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संख्या की संगणना उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा 7-क के उपबन्धों के अनुसार प्रदेश में उनकी जनसंख्या के अनुपात में किया जाएगा। यदि शेष, भाजक के आधे से कम न हो तो भागफल में एक बढ़ाया जायेगा और यदि शेष, भाजक के आधे से कम हो तो उसे छोड़ दिया जायेगा परन्तु चूंकि पिछड़े वर्गों के लिए प्रमुख के पदों का आरक्षण अधिकतम 27 प्रतिशत अनुमन्य है, इसलिए पिछड़े वर्गों के लिए 27 प्रतिशत पद आरक्षित किये जाने की दशा में आरक्षित किये जाने वाले प्रमुख के पदों की संगणना में मात्र भागफल के पूर्णांक को ही संज्ञान में लिया जायेगा और शेष को संज्ञान में नहीं लिया जायेगा।
इस प्रकार अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संख्या अवधारित हो जायेगी। उपर्युक्तानुसार अवधारित प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के एक-तिहाई से अन्यून पद,यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जायेंगे और इस प्रकार स्त्रियों के लिये आरक्षित पदों को सम्मिलित करते हुए राज्य में कुल प्रमुखों के पदों की संख्या के एक तिहाई से अन्यून पद स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जायेंगें। प्रत्येक आरक्षित वर्ग में स्त्रियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों और स्त्रियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रमुख के कुल पदों की संगणना करने में यदि भाज्य, भाजक से पूर्णतया विभाजित न हो और कुछ शेष बचता हो तो भागफल में 1 बढ़ जायेगा।
राज्य स्तर पर खण्डों में प्रमुखों के पदों के आरक्षण की संगणना (कुल पदों की संख्या-826)
1.अनुसूचित जनजातियों हेतु संगणित प्रमुखों के पदों की संख्या क्षेत्र पंचायतों के मध्य वितरित करने के लिये जिले को ईकाई माना जायेगा और यह वितरण इस प्रकार से किया जायेगा कि जिले में अनुसूचित जनजातियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संख्या का अनुपात उपर्युक्तानुसार राज्य में संगणित प्रमुखों के पदों की संख्या से यथासाध्य वही होगा जो जिले में अनुसूचित जनजातियों की ग्रामीण जनसंख्या का राज्य में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या से है।
उदाहरण:-यदि किसी जनपद में अनुसूचित जनजातियों की ग्रामीण जनसंख्या राज्य में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या का 20 प्रतिशत है तो राज्य स्तर पर अनुसूचित जनजातियों के संगणित 5 पदों के 20 प्रतिशत अर्थात् 1 पद उस जनपद के लिए आरक्षित किया जायगा।
प्रत्येक जिले में अनुसूचित जातियों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संगणना सर्वप्रथम निम्नलिखित फार्म??ला से की जाएगी :
जिलों में अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संख्या = जिलों में कुल क्षेत्र पंचायतों की संख्या * जिला में अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या/ जिला की कुल ग्रामीण जनसंख्या
परन्तु इस प्रकार अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के संगणित पदों की संख्या यदि जिले की कुल क्षेत्र पंचायतों की संख्या के 20.6982 प्रतिशत से अधिक आती हैं तो उसे 20.6982 प्रतिशत तक सीमित रखा जायेगा।
परन्तु इस प्रकार अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के संगणित पदों की संख्या यदि जिले की कुल क्षेत्र पंचायतों की संख्या के 20.6982 प्रतिशत से अधिक आती हैं तो उसे 20.6982 प्रतिशत तक सीमित रखा जायेगा।
उपर्युक्तानुसार प्रमुखों के पदों की संख्या की संगणना के उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति के लिए संगणित पदों की संख्या अवितरित रहने की दशा में, उन्हें जिले की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुसूचित जाति की ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में, मात्र उन्हीं जिलो में पुनर्वितरण किया जायेगा जिनमें अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या का जिले की कुल ग्रामीण जनसंख्या में अनुपात, राज्य में उनकी जनसंख्या का राज्य की कुल जनसंख्या के अनुपात, जो वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 20.6982 है, से अधिक हो। पुनर्वितरण हेतु ऐसे जिले को सर्वप्रथम एक-एक पद का वितरण किया जायेगा तथा यथावश्यक यह प्रक्रिया तब तक चलायी जायेगी जबतक समस्त अवितरित पदों का वितरण नहीं हो जाता है।
उदाहरण : सर्वप्रथम प्रत्येक जिले में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार परन्तु अधिकतम् 20.6982 प्रतिशत पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी। इसके उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जातियों के लिए संगणित पदों में आने वाली कमी को ऐसे जिलों जहाँ अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का प्रतिशत 20.6982 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा। यदि किसी जिले में प्रमुखों के कुल पदों की संख्या 10 तथा अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 24.00 हो तो भी सर्वप्रथम जिले में प्रमुखों के कुल पदों के 20.6982 प्रतिशत पद अर्थात 2 पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी और इसके उपरान्त राज्य स्तर पर अनुसूचित जातियों के लिए संगणित पदों अर्थात् 171 पदों में आने वाली कमी को, इस जिले सहित ऐसे सभी जिलों जहाँ अनुसूचित जातियों की ग्रामीण जनसंख्या का प्रतिशत 20.6982 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा।
इसी प्रकार प्रत्येक जिले में पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संगणना सर्वप्रथम निम्नलिखित फार्मूला से की जायेगी :
जिला में पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के पदों की संख्या= जिले में कुल क्षेत्र पंचायतों कीसंख्या *जिला में पिछड़े वर्गो के लिए की ग्रामीण जनसंख्या / जिला की कुल ग्रामीण जनसंख्या
परन्तु इस प्रकार पिछड़े वर्गो के लिए आरक्षित किये जाने वाले प्रमुखों के संगणित पदों की संख्या यदि जिले की कुल क्षेत्र पंचायतों की संख्या के 27.00 प्रतिशत से अधिक आती है तो उसे 27.00 प्रतिशत तक ही सीमित रखा जायेगा। उपर्युक्तानुसार प्रमुखों के पदों की संख्या की संगणना के उपरान्त राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों के संगणित पदों की संख्या अवितरित रहने की दशा में, उन्हें जिले की कल ग्रामीण जनसंख्या में पिछडे वर्गो की ग्रामीण जनसंख्या के अनपात के अवरोही क्रम में, मात्र उन्हीं जिलों में पुनर्वितरण किया जायेगा जिनमें पिछड़े वर्गो की ग्रामीण जनसंख्या का जिले की ग्रामीण जनसंख्या में अनपात, राज्य में उनकी जनसंख्या का राज्य की कल ग्रामीण जनसंख्या के अनुपात जो वर्ष 2015 के त्वरित सर्वेक्षण के अनुसार 53.33 है, से अधिक हो। पुनर्वितरण हेतु ऐसे जिलों को सर्वप्रथम एक-एक पद का वितरण किया जायेगा तथा यथावश्यक यह प्रक्रिया तब तक चलायी जायेगी जब तक समस्त अवितरित पदों का वितरण नहीं हो जाता है।
उदाहरण : सर्वप्रथम प्रत्येक जिले में पिछड़े वर्गो की जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार परन्तु अधिकतम् 27.00 प्रतिशत पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी। इसके उपरान्त राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए संगणित पदों में आने वाली कमी को ऐसे जिलों जहाँ पिछड़े वर्गो की जनसंख्या का प्रतिशत 53.33 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा। यदि किसी जिले में प्रमुखों के कुल पदों की संख्या 10 तथा पिछड़े वर्गो की जनसंख्या का प्रतिशत 35. 00 हो तो भी सर्वप्रथम जिले में प्रमुखों के कुल पदों की संख्या का 27.00 प्रतिशत अर्थात 2 पदों की संगणना आरक्षण हेतु की जायेगी और इसके उपरान्त राज्य स्तर पर पिछड़े वर्गों के लिए संगणित पदों अर्थात् 223 पदों में आने वाली कमी को, ऐसे सभी जिलों जहाँ पिछड़े वर्गो की जनसंख्या का प्रतिशत 53.33 से अधिक है, में 1-1 पद का वितरण कर पूरा किया जायेगा।
आरक्षित प्रमुख पदों का आवंटन व चक्रानुक्रम
1. प्रस्तर-3 में उल्लिखित क्रमावली के क्रम में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के लिये आरक्षित प्रमुखों के पदों की संख्या उस जिले में भिन्न-भिन्न क्षेत्र पंचायतों को उनके प्रादेशिक क्षेत्र की कुल जनसंख्या में क्रमशः अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या के अनुपात के अवरोही क्रम में आवंटित की जायेगी अर्थात् उस जिले की क्षेत्र पंचायतों में से वह क्षेत्र पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जनजातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी, और वह क्षेत्र पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी, और वह क्षेत्र पंचायत जिसके प्रादेशिक क्षेत्र में पिछड़े वर्गों की जनसंख्या का अनुपात सबसे अधिक हो, उनको आवंटित की जायेगी, किन्तु इस प्रकार कि जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात् पंचायतों के सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 तथा वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजातियों को आवंटित क्षेत्र पंचायत अनुसूचित जनजातियों को आवंटित नहीं की जायेगी, अनुसूचित जातियों को आवंटित क्षेत्र पंचायत अनुसूचित जातियों को आवंटित नहीं की जायेगी और पिछड़े वर्गों को आवंटित क्षेत्र पंचायत पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं की जायेगी।
2 प्रतिबन्ध यह है कि अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गो की किसी क्षेत्र पंचायत में जनसंख्या दो व्यक्ति से कम हो तो ऐसे क्षेत्र पंचायत के प्रमुख का पद, यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों को आवंटित नहीं किया जायेगा।
3. अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों को आवंटित क्षेत्र पंचायतों की एक तिहाई से अन्यून क्षेत्र पंचायतें यथास्थिति, अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों तथा पिछड़े वर्गों की स्त्रियों को आवंटित की जायेगी।
4.उपर्युक्तानुसार स्त्रियों के लिये आवंटित प्रमुखों के पदों को सम्मिलित करते हुए जिले में प्रमुखों के पदों की कुल संख्या के एक तिहाई से अन्यून प्रमुखों के पदों को स्त्रियों को आवंटित किया जायेगा। किन्तु इस प्रकार कि जिन क्षेत्र पंचायतों के प्रादेशिक क्षेत्रों में सामान्य वर्ग की अधिक जनसंख्या, (जिसमें अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों की जनसंख्या सम्मिलित नहीं है), हो, वे उनको आवंटित की जायेगी, किन्तु इस प्रकार कि जहाँ तक हो सके, पूर्ववर्ती निर्वाचनों अर्थात् पंचायतों के सामान्य निर्वाचन वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 तथा वर्ष 2015 में स्त्रियों को आवंटित क्षेत्र पंचायतें स्त्रियों को आवंटित नहीं की जायेंगी।
5. पूर्ववर्ती निर्वाचनों में अगर कोई पद अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ी जाति व स्त्रियों के लिए अभी तक आरक्षित नहीं हुआ है, तो उन्हें सर्वप्रथम उस श्रेणी के लिए आरक्षित किया जायेगा एवं क्रमावली के अनुसार सर्वप्रथम वह पद महिला के लिए आरक्षित किया जायेगा।
6. उपर्युक्तानुसार ही पंचायतों के आगामी सामान्य निर्वाचन 2021 के आरक्षण में चक्रानुक्रम (रोटेशन) लागू किया जायेगा। इसके फलस्वरूप पिछले सामान्य निर्वाचनों ( वर्ष 1995, वर्ष 2000, वर्ष 2005, वर्ष 2010 तथा वर्ष 2015) में आरक्षित वर्गों (अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जातियों, पिछड़े वर्गों तथा स्त्रियों) के लिये जिन क्षेत्र पंचायतों को आरक्षित किया गया था, उन्हें आगामी निर्वाचन में संबंधित आरक्षित वर्ग के लिये आरक्षित नहीं किया जायेगा बल्कि वर्ग के लिए तैयार किये गये अवरोही क्रम में अगले स्टेज पर आने वाली क्षेत्र पंचायत से आरक्षण शुरू किया जायेगा।
7. पदों के आवंटन के लिए जनपद की समस्त क्षेत्र पंचायतों को अनुसूचित जनजाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पद का आवंटन उन क्षेत्र पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी भी अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित हुई क्षेत्र पंचायतों में ऊपर से अनुमन्य संख्या में क्षेत्र पंचायतें अनुसूचित जनजाति स्त्री के लिए आरक्षित कर दी जायेंगी। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त क्षेत्र पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और अनुसूचित जनजाति के क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए जिले की क्षेत्र पंचायतों के अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन क्षेत्र पंचायतों को आरक्षित किया जायेगा, जो कि वर्ष 2015 में अनुसूचित जनजाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों।
8.पदों के आवंटन के लिए जनपद की समस्त क्षेत्र पंचायतों को अनुसूचित जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पद का आवंटन उन क्षेत्र पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी भी अनुसूचित जाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित हुई क्षेत्र पंचायतों में ऊपर से अनुमन्य संख्या में क्षेत्र पंचायतें अनुसूचित जाति स्त्री के लिए आरक्षित कर दी जायेंगी। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त क्षेत्र पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और अनुसूचित जाति के क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए जिले की क्षेत्र पंचायतों को अनुसूचित जाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन क्षेत्र पंचायतों को आरक्षित किया जायेगा, जो कि वर्ष 2015 में अनुसूचित जाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों।
9. पदों के आवंटन के लिए इसी प्रकार पिछड़ी जाति के क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों के आवंटन के लिए अनुसूचित जनजाति व अनुसूचित जाति हेतु आरक्षित क्षेत्र पंचायतों को हटाते हुए शेष बची क्षेत्र पंचायतों को पिछड़ी जाति की आबादी के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में लगाते हुए सर्वप्रथम पदों का आवंटन उन क्षेत्र पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी पिछड़ी जाति श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। सर्वप्रथम आवंटित क्षेत्र पंचायतों में ऊपर से पिछड़ी जाति महिला पदों के लिए आरक्षित कर दी जायेगी। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त क्षेत्र पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और प्रदेश में पिछड़ी जाति के क्षेत्र पंचायत प्रमुख के पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए शेष बची हुई क्षेत्र पंचायतों को पिछड़ी जाति की जनसंख्या के प्रतिशत के आधार पर अवरोही क्रम में उन क्षेत्र पंचायतों को आरक्षित किया जाएगा जो कि वर्ष 2015 में पिछड़ी जाति श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हों।
10. पदों के आवंटन के लिए स्त्री के लिए आरक्षित क्षेत्र पंचायत प्रमुख पदों का आवंटन जिले की क्षेत्र पंचायतें, जो अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति व पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित हो चुकी हैं उनको हटाते हुए जो शेष हैं, उन्हें सामान्य वर्ग की जनसंख्या के आधार पर अवरोही क्रम में लगाया जायेगा। सर्वप्रथम स्त्री पद का आवंटन उन क्षेत्र पंचायतों में किया जाएगा, जो पूर्ववर्ती निर्वाचनों में कभी स्त्री श्रेणी में आवंटित नहीं रही हैं। इस प्रकार आवंटन के पश्चात अगर समस्त क्षेत्र पंचायतें एक बार इस श्रेणी में आरक्षित हो गयी हैं और जनपद में स्त्री श्रेणी के क्षेत्र पंचायत प्रमुख के पदों का आवंटन शेष है तो उसके लिए जिले में शेष क्षेत्र पंचायतों को सामान्य वर्ग की जनसंख्या के आधार पर अवरोही क्रम में उन क्षेत्र पंचायतों को आरक्षित किया जाएगा, जो वर्ष 2015 में स्त्री श्रेणी में आरक्षित नहीं रही हैं।
बता दें कि इस नियमावली के आधार पर ही अगले एक माह में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के वार्डों का आरक्षण निर्धारण होगा। दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक आरक्षण प्रक्रिया पूरी करके 30 अप्रैल तक पंचायतों के चुनाव कराने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में अप्रैल माह में 58194 ग्राम पंचायतों, 731813 ग्राम पंचायत सदस्यों, 75855 क्षेत्र पंचायत सदस्यों, 3051 जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद 826 ब्लाक प्रमुखों व 75 जिला पंचायत अध्यक्षों का निर्वाचन होगा।