मुंबई: इस साल जनवरी में आई अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बाद क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) द्वारा अडानी ग्रुप (Adani Group) से जुड़े लोगों पर अपने ही शेयर खरीदकर भारतीय शेयर बाजार में करोड़ो डॉलर का निवेश करने समेत कई गंभीर आरोप लगाए है| क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) द्वारा अडानी ग्रुप के खिलाफ लगाए गए नए आरोपों के बाद अडानी समूह की लिस्टेड कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को जबरदस्त टूट देखने को मिली|
अडानी मामले को लेकर मुंबई पहुंचे कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है| राहुल गांधी ने कहा, आज सुबह एक बहुत गंभीर मामला उठाया गया है। दुनिया के दो फाइनेंशियल न्यूज पेपर ने लिखा कि एक परिवार जो मोदी जी के काफी करीब है, उसने अपने खुद के शेयर गुपचुप तरीके से खरीदे और फिर शेयर मार्केट में निवेश किया।
राहुल गांधी ने कहा, ''1 बिलियन डॉलर हिन्दुस्तान से अडानी जी के कंपनी के नेटवर्क के जरिए अलग-अलग देशों में गया और फिर वापस आया। फिर उस पैसे से अडानी जी ने अपने शेयर रेट को बढ़ाया और वे अब हिन्दुस्तान की पूंजी को खरीद रहे हैं।
ऐसे में तीन सवाल उठते हैं-
• ये पैसा किसका है? ये अडानी जी का पैसा है या किसी और का पैसा है? अगर किसी और का है तो किसका है?
• इस पूरे काम में मास्टरमाइंड विनोद अडानी है। इसमें दो और लोग- नासिर अली शाबान अहली और चीनी नागरिक चैंग-चुंग लिंग शामिल हैं। अडानी जी, जब देशभर का इन्फ्रास्ट्रक्चर खरीद रहे हैं, पोर्ट्स और डिफेंस में काम करते हैं तो इन सब में चीनी नागरिक चैंग-चुंग लिंग कैसे शामिल है? ये राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है।
• SEBI की जांच में जिस व्यक्ति ने अडानी को क्लीन चिट दी, वह आज अडानी जी के चैनल NDTV में डायरेक्टर है।
राहुल गांधी ने कहा, ''अब सवाल है कि इसके बारे में प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? कुछ करते क्यों नहीं? CBI, ED जैसी एजेंसियां अडानी जी की जांच क्यों नहीं कर रही हैं?
अडानी समूह विवाद पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा, "यह G20 का समय है और यह दुनिया में भारत की स्थिति के बारे में है। भारत जैसे देश के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण बात है कि हमारी आर्थिक स्थिति और यहां संचालित होने वाले व्यवसायों में समान अवसर और पारदर्शिता हो। आज सुबह दो वैश्विक वित्तीय अखबारों ने एक बेहद अहम सवाल उठाया है। ये कोई रैंडम समाचार पत्र नहीं हैं। ये समाचार पत्र भारत में निवेश और शेष विश्व में भारत के बारे में धारणा को प्रभावित करते हैं...|"
राहुल गांधी ने कहा,पहला सवाल यह उठता है कि- ये किसका पैसा है? ये अडानी का पैसा है या किसी और का है? इसके पीछे के मास्टरमाइंड विनोद अडानी नामक एक सज्जन हैं जो गौतम अडानी के भाई हैं। पैसे की इस हेरा-फेरी में दो अन्य लोग भी शामिल हैं। एक सज्जन हैं जिनका नाम नासिर अली शाबान अहली है और दूसरे एक चीनी सज्जन हैं जिनका नाम चांग चुंग लिंग है। तो, दूसरा सवाल उठता है कि- इन दो विदेशी नागरिकों को उन कंपनियों में से एक के मूल्यांकन के साथ खेलने की अनुमति क्यों दी जा रही है जो लगभग सभी भारतीय बुनियादी ढांचे को नियंत्रित करती है|
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा,''जांच हुई, सेबी को सबूत दिए गए और सेबी ने गौतम अडानी को क्लीन चिट दे दी...तो साफ है कि यहां कुछ गड़बड़ है|
राहुल गांधी ने कहा,''G20 के नेताओं के यहां आने से ठीक पहले वे पूछ रहे होंगे कि यह कौन सी विशेष कंपनी है जिसका स्वामित्व प्रधानमंत्री के करीबी सज्जन के पास है और भारत जैसी अर्थव्यवस्था में इस सज्जन को मुफ्त यात्रा क्यों दी जा रही है?|
कांग्रेस सांसद ने कहा, यह बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना नाम साफ करें और स्पष्ट रूप से बताएं कि क्या चल रहा है। कम से कम JPC की अनुमति दी जानी चाहिए और गहन जांच होनी चाहिए। मुझे समझ नहीं आ रहा कि प्रधानमंत्री जांच क्यों नहीं करवा रहे हैं? वे चुप क्यों हैं और जो लोग ज़िम्मेदार हैं क्या उन्हें सलाखों के पीछे डाल दिया गया है? G20 नेताओं के यहां आने से ठीक पहले यह प्रधानमंत्री पर बहुत गंभीर सवाल उठा रहा है... यह महत्वपूर्ण है कि उनके (G20 नेताओं) आने से पहले इस मुद्दे को स्पष्ट किया जाए|
कांग्रेस सांसद ने कहा, ''आज हिंदुस्तान की इज्जत दांव पर लगी है। देश में G-20 होने से पहले सब के सामने भ्रष्टाचार के ऐसे उदाहरण है। 1 बिलियन डॉलर हिंदुस्तान से बाहर जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर और संपत्तियां खरीदी जा रही हैं। जिसने जांच की उसे अडानी ने अपनी कंपनी में नौकरी दे दी। ये मामला हिंदुस्तान की छवि को खराब कर रहा है, इसलिए PM मोदी को एक्शन लेना चाहिए। प्रधानमंत्री को कहना चाहिए कि इस मामले की जांच JPC करेगी। साथ ही अडानी जी पर भी गहनता से जांच होगी।
संसद के विशेष सत्र पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा,''मुझे लगता है कि शायद यह थोड़ी घबराहट का सूचक है। उसी तरह की घबराहट जैसी घबराहट तब हुई थी जब मैंने संसद भवन में भाषण दिया था, घबराहट की वजह से अचानक उन्हें मेरी संसद सदस्यता रद्द करनी पड़ी। इसलिए मुझे लगता है कि यह घबराहट की बात है क्योंकि ये मामले प्रधानमंत्री के बहुत करीब हैं। जब भी आप अडानी का मामला छेड़ते हैं तो प्रधानमंत्री बहुत असहज और घबरा जाते हैं | बता दें,''केंद्र सरकार ने 18 से 22 सितंबर के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है| इसमें कुल 5 बैठकें होंगी। इससे पहले 20 जुलाई से 11 अगस्त तक संसद का मॉनसून सत्र चला था |