पटना: बिहार विधानसभा में CM नीतीश कुमार ने कहा,''कोई शराब पीने गया और ज़हरीली शराब पीकर उसकी मृत्यु हो गई, शराब तो है ही ख़राब। शराबबंदी लागू करना चाहिए। शराब पीना बुरा है.. बापू ने भी कहा है और जो बापू की बात भी नहीं सुनता वो महा पापी है। कानून बनाए जाते हैं लेकिन उसका पालन कोई नहीं करता है| नीतीश कुमार ने कहा,'कितना भी हम प्रयास करे लेकिन कुछ लोग गड़बड़ करते ही हैं। हम नियम बनाते हैं लेकिन कुछ लोग उसका सही से पालन नहीं करते हैं। दुनियाभर में शराब का बुरा असर है इसके ख़िलाफ अभियान चलाना चाहिए। हमारे सर्वेक्षण के अनुसार बिहार में 1.74 करोड़ लोगों ने शराब छोड़ी है|
बिहार में शराबबंदी कानून में बुधवार को बड़े बदलाव को विधानसभा की हरी झंडी मिल गई। शराबबंदी संशोधन विधेयक विधानसभा में पास हो गया है। आबकारी मंत्री सुनील कुमार ने सदन में मद्य निषेध और उत्पाद संशोधन विधेयक 2022 पेश किया। संशोधन को नीतीश कैबिनेट ने पहले ही मंजूरी दे दी थी। संशोधिक विधेयक को राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। इसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा।
शराबबंदी कानून में सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि अब शराब पीकर पहली बार पकड़े जाने वाले को जेल नहीं जाना पड़ेगा। मजिस्ट्रेट जुर्माना लेकर छोड़ सकेंगे। जुर्माना नहीं देने पर जेल जाना पड़ेगा। लेकिन बार-बार शराब पीकर पकड़ाने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है। हालांकि अभी जुर्माने की राशि तय नहीं हुई है। संशोधित कानून में और क्या-क्या प्रावधान होंगे इसकी नियमावली बनेगी।
बिहार सरकार को शराबबंदी कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट से भी कुछ गाइडलाइन मिली थी। इसके बाद सरकार ने कानून में संशोधन करने का निर्णय लिया। सूबे में अप्रैल 2016 को शराबबंदी लागू हुई थी। काफी संख्या में निर्दोष लोगों को जेल भेजने के आरोप लगे थे।
आबकारी मंत्री सुनील कुमार ने कहा,''आज शराबबंदी के कानून में कुछ संशोधन किए गए हैं। हमारा उद्देश्य है कि क़ानून को लागू करने में जो व्यवहारिक कठिनाइयां आ रही हैं और दोषियों को जल्द से जल्द सजा कैसे दिला सकते हैं। इस संबंध में कुछ बदलाव किए गए हैं| जो व्यक्ति शराब पीते हुए पकड़ा जाएगा या शराब पीकर घूम रहा होगा। उसे कोर्ट के समक्ष नहीं एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाएगा। एक ज़ुर्माना लगाया जाएगा। बार-बार ऐसा करने पर 1 महीने की जेल भी हो सकती है|
शराबबंदी क़ानून पर हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने कहा,''कोई भी बात तुरंत ख़त्म नहीं होती है धीरे-धीरे उसके गुण दोष देखे जाते हैं। सरकार ने 2016 में क़ानून बनाया बीच में समीक्षा हुई आज फिर से प्रस्ताव आया। इसमें क्या विकृति आएगी उसपर सरकार सोंचेगी| मांझी ने कहा,''मैं कहना चाहता हूं कि नीतीश कुमार को जो लोग रिजिड समझ रहे हैं वे रिजिड नहीं हैं बल्कि वे लोगों की बातों को समझने की कोशिश कर इसमें सुधार करने की कोशिश कर रहे हैं|