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24 अगस्त 2026

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्यों है शराब माफ़िया?, 64% फ़ीसदी मंत्रियों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं: तेजस्वी

पटना. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर शराबबंदी के मामले पर नीतीश सरकार को घेरा है| गुरुवार को तेजस्वी यादव ने नीतीश कैबिनेट के मंत्री रामसूरत राय को तत्काल प्रभाव से बर्ख…

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्यों है शराब माफ़िया?, 64% फ़ीसदी मंत्रियों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं: तेजस्वी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्यों है शराब माफ़िया?, 64% फ़ीसदी मंत्रियों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं: तेजस्वी | फ़ोटो: TVL News

 पटना. बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एक बार फिर शराबबंदी के मामले पर नीतीश सरकार को घेरा है| गुरुवार को तेजस्वी यादव ने नीतीश कैबिनेट के मंत्री रामसूरत राय को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर देने की मांग की| तेजस्वी यादव ने कहा कि,''लाखों लीटर बिहार में शराब आती है, मंत्रियों के स्कूल शराब के अड्डे बने हुए हैं, मुख्यमंत्री शराब माफियाओं के साथ देखे जाते हैं, संरक्षण कौन दे रहा है, किसको फायदा हो रहा है|



 गुरुवार को पटना में पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि, मंत्री रामसूरत राय के एक प्लाट से भारी मात्रा में शराब की बरामद हुई है। नीतीश कुमार जी लगातार कहते हैं कि शराबबंदी पूरी तरह सफल है। नीतीश जी के मंत्रीमंडल में लगभग 64% मंत्री दागी हैं। कई मंत्रियों पर बलात्कार, अपहरण और हत्या के गंभीर मामले हैं| सबूत हैं तब भी विधानसभा में मंत्री और मुख्यमंत्री ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। एक एजेंसी ने रिसर्च स्टडी में कहा है कि बिहार में लगभग 30 लाख लीटर से अधिक शराब लाया जा चुका है। पुलिस खुद स्वीकार करती है कि उसने 9 लाख लीटर शराब बरामद किया है|




तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया,''बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार क्यों है शराब माफ़िया? आज की प्रेस वार्ता के मुख्य बिंदु



● नीतीश जी के मंत्रिमंडल में 64% फ़ीसदी मंत्रियों के ऊपर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह कैसा 'सुशासन' है जिसमें दागी मंत्री ही शासन चला रहे हैं?



● भ्रष्टाचार, बलात्कार, हत्या, अपहरण, यौन शोषण, जालसाजी जैसे गंभीर मामलों में लिप्त व्यक्तियों को मंत्री बनाने के पीछे की मजबूरी नीतीश कुमार जी को सबके सामने बतानी चाहिए।




● नीतीश कुमार जी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे मेवालाल चौधरी और अशोक चौधरी सरीखे लोगों को मंत्री बनाने से एक क्षण के लिए भी हिचकिचाते नहीं हैं। एक मंत्री जिनके ऊपर सपरिवार भ्रष्टाचार और जालसाजी का केस है वह विगत 9 महीनों से किसी सदन के भी सदस्य नहीं है और मंत्री बने बैठे है। आश्चर्यजनक है कि जिन्हें इनके विरुद्ध जाँच को धार देकर इनके विरुद्ध त्वरित कार्रवाई को अंजाम देना चाहिए, वही इन्हें सर आँखों पर बिठाकर पीड़ित विभाग की लगाम थमा रहे हैं।




● मुख्यमंत्री जी को पता ही नहीं है कि कौन मंत्री और उनके परिजन कब सरकारी कार्यक्रमों का उद्घाटन कर रहे है? उनके मंत्री के स्कूल परिसर से शराब बरामद होती है लेकिन वो कोई कारवाई नहीं करते? इसका जवाब तो मुख्यमंत्री जी ही देंगे? 




● नीतीश सरकार शराब सेवन की समस्या को एक सामाजिक बुराई के बजाय कानून और व्यवस्था की समस्या की तरह देखती है और यही कारण है कि शराबबंदी के कारण राज्य में अन्य कई समस्याओं की शुरुआत हुई है जिनका निदान करने के बजाय बिहार सरकार उन्हें झुठलाने में लगा रहता है।




●आज बिहार में शराब का धंधा करना सबसे अधिक मुनाफे का धंधा बन गया है। पढ़े लिखे और बेरोजगार युवा तेजी से इस धंधे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री खुद शराब माफिया है क्योंकि उनके अधीनस्थ विभाग इसके विरुद्ध कोई ठोस कारवाई नहीं कर रहा।

● शराब माफिया की स्वयं मुख्यमंत्री जी के ड्रॉइंग रूम तक पहुँच है। 



●शराबबंदी के कारण राज्य में पुलिस बल की अवैध कमाई का हिस्सा क्या मुख्यमंत्री आवास जाता है? शराबबंदी के कारण बिहार के युवाओं में ड्रग्स के चलन में जबरदस्त उछाल आया है। ड्रग्स की तस्करी किसके इशारे पर हो रही है?



● राज्य में 20 हज़ार करोड़ की एक अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था की चल रही है। क्या बिना मुख्यमंत्री के संरक्षण के ऐसा हो सकता है? राजस्व के नुक़सान और माफिया की लगातार बढ़ती ताकत के आगे कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली संस्थाएँ नतमस्तक क्यों नज़र आती हैं। 



● इंडिया स्पेंड नामक एक संस्था के अनुसार 30 लाख लीटर से अधिक की शराब पकड़ी गई है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने करोड़ लीटर की शराब बिहार में अवैध रूप से लोगों तक पहुँच चुकी होगी। लेकिन सरकार ने कितने उच्च पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त किया? इसका जवाब मुख्यमंत्री दें? 




● मई 2017 में बिहार पुलिस ने दावा किया था कि 9 लाख लीटर शराब बिहार में चूहे पी गए। क्या ऐसा संभव है?

●2020 में जदयु के प्रदेश उपाध्यक्ष का शराब पीकर नाचने का वीडियो वायरल हुआ था। जदयु विधायकों के शराब पीकर बार बालाओं के साथ नाचने के कई वीडियो वायरल हो चुके हैं। लेकिन उन पर आजतक कोई कारवाई नहीं की गयी।



 ● बिहार पुलिस का शराब माफिया के साथ तालमेल बैठा हुआ है यह पूर्व DGP तक मान चुके हैं। स्वयं मुख्यमंत्री के फोटो जब शराब का अवैध कारोबार करनेवालों के साथ सार्वजनिक पटल पर सबके सामने आएँगे तो इससे लोगों में क्या संदेश जाएगा? एक तरफ आम जनता हतोत्साहित होगी तो दूसरी ओर शराब माफिया और उनका साथ दे रहे भ्रष्ट पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा!




 ● शराबबंदी कानून में बिहार में जितने भी लोग पकड़े गए हैं लगभग शत प्रतिशत वो दलित व अतिपिछड़े और बहुत ही निर्धन वर्गों के हैं।

● शराबबंदी कानून की सबसे अधिक मार अनुसूचित जाति के लोगों को पड़ी है जिनमें बिहार में सबसे अधिक गरीबी है। ये लोग जुर्माना या जमानत की राशि भरने की स्थिति में भी नहीं होते हैं जिसके कारण इनका परिवार हमेशा के लिए पूरी तरह से बर्बाद हो जाता है।







tvlnews

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यह रिपोर्ट 11 मार्च 2021 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

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