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25 अगस्त 2026

जीने नहीं दे रहे हैं जानवर...इतना जानवर छोड़े हैं कि खेती का नुकसान हो गया, क्या बोए-क्या खाएं, क्या करें? : डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में भड़के किसान

रायबरेली: भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई की पुण्य तिथि पर बीजेपी ने देश भर में किसान गोष्ठी का आयोजन रखा था। रायबरेली में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित हुआ। सूबे के डिप्टी सीएम एवं…

जीने नहीं दे रहे हैं जानवर...इतना जानवर छोड़े हैं कि खेती का नुकसान हो गया, क्या बोए-क्या खाएं, क्या करें? : डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में भड़के किसान
जीने नहीं दे रहे हैं जानवर...इतना जानवर छोड़े हैं कि खेती का नुकसान हो गया, क्या बोए-क्या खाएं, क्या करें? : डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में भड़के किसान | फ़ोटो: TVL News

रायबरेली: भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई की पुण्य तिथि पर बीजेपी ने देश भर में किसान गोष्ठी का आयोजन रखा था। रायबरेली में इस तरह का कार्यक्रम आयोजित हुआ। सूबे के डिप्टी सीएम एवं जिले के प्रभारी मंत्री दिनेश शर्मा इसमें शामिल हुए। लेकिन किसानों के हित की सरकार के दावों की पोल उस समय खुल गई जब एक ओर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन चल रहा था और दूसरी ओर किसान भड़के हुए थे।



रायबरेली के सिविल लाइन एरीये में किसान गोष्ठी का आयोजन हुआ था। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा किसानों को संबोधित करके मंचासीन थे। देश के प्रधानमंत्री का वर्चुअल संबोधन जारी था। ठीक उसी समय पब्लिक की कतारों में कुर्सी पर बैठा बुजुर्ग किसान भड़क गया।  पहले तो किसानों ने लंच पैकेट न मिलने से नाराजगी जताई और फिर एक सुर किसानों ने कहना शुरू कर दिया कि इतना जानवर छोड़े हैं कि खेती का नुकसान हो गया, ये लोग देख रहे हैं। क्या बोए-क्या खाएं, क्या करें? दिक्कत ये है जानवर जीने नहीं दे रहे, जो बो रहे वो खा डाल रहे हैं। कोई सुविधा नही दे रहे, पूछ तक नही रहा। खैर डीएम वैभव श्रीवास्तव ने स्वयं किसानों के बीच पहुंचकर मोर्चा संभाला तब कहीं जाकर किसान शांत हुए।



बता दें कि आज हुए किसान गोष्ठी कार्यक्रम में डिप्टी सीएम ने कहा कि किसान का जीवन खेती-किसानी पर निर्भर करता है। ऐसे देश में हम लोग जानते हैं की हम आत्म निर्भरता के युग से आगे गुजरे हैं। एक समय ये था किसान अपनी खेती करता था और खेती करने के बाद जो उसकी उपज आती थी, उसमे वो एक समय वो सिंचाई करता था और बाकी समय छोटे-छोटे उद्योगों को करता था। अग्रेजों के समय में ऐसा कुशासन चला कि उन्होंने ये किया कि जो किसान आत्म निर्भर रहता था उस किसान से उन्होंने खेती-किसानी का स्तर बदला। छोटे-छोटे उद्योग धंधों के स्थान पर बड़े-बड़े उद्योग धंधे लगा दिए।




जिससे जो किसान खाली समय में अन्य आय को प्राप्त कर लेता था और आत्म निर्भर रहता था उस किसान को दूसरों पर निर्भर रहना पड़ा। ये जो कठिनाई थी वो आजादी के बाद भी तत्कालीन कांग्रेस के समय में भी था और उसमें कोई विशेष परिवर्तन नही किया गया। 2014 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी और 2017 में योगी आदित्यनाथ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने इन्होंने हमेशा एक ही उपाय रखा के कैसे हम किसान भाइयों की आय को दुगुना कर दें। उनकी हमेशा एक ही इच्छा रही के गांव में रहने वाला जो हमारा अन्नदाता है उसकी आय दो गुनी होनी चाहिए।








रिपोर्ट- अभिषेक बाजपेयी


tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

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