मुख्य सामग्री पर जाएँ
26 अगस्त 2026

एससीसीएल के निजीकरण का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन नहीं: पीएम मोदी

रामागुंडम: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज तेलंगाना के रामागुंडम में 9500 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया।प्रधानमंत्री ने रामागुंडम में उर्व…

एससीसीएल के निजीकरण का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन नहीं: पीएम मोदी
एससीसीएल के निजीकरण का कोई प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास विचाराधीन नहीं: पीएम मोदी | फ़ोटो: TVL News

रामागुंडम: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज तेलंगाना के रामागुंडम में 9500 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का शिलान्यास किया और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया।प्रधानमंत्री ने रामागुंडम में उर्वरक संयंत्र राष्ट्र को समर्पित किया जिसकी रामागुंडम परियोजना की आधारशिला भी 7 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी।  इससे पहले आज प्रधानमंत्री ने रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (आरएफसीएल) संयंत्र का दौरा किया। ये परियोजना रामागुंडम फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (आरएफसीएल) के तत्वावधान में स्थापित की गई है, जो कि नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) और फर्टिलाइजर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एफसीआईएल) की एक संयुक्त उद्यम कंपनी है। ये संयंत्र तेलंगाना राज्य के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में किसानों को यूरिया उर्वरक की पर्याप्त और समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा



सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है और जिनके लिए आज आधारशिला रखी गई, वे कृषि और कृषि विकास दोनों को बढ़ावा देंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक तरफ पूरी दुनिया कोरोना महामारी से निपट रही है और दूसरी तरफ युद्ध तथा सैन्य कार्रवाइयों की विकट स्थितियों से प्रभावित हो रही है। 



प्रधानमंत्री ने कहा कि "लेकिन इन सबके बीच विशेषज्ञ भविष्यवाणी कर रहे हैं कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञ ये भी कह रहे हैं कि 90 के दशक से 30 वर्षों में जितना विकास हुआ है, उसके बराबर विकास अगले कुछ वर्षों में हो जाएगा। उन्होंने कहा, "इस धारणा का मुख्य कारण है बीते 8 वर्षों के दौरान देश में हुआ बदलाव। भारत ने पिछले 8 वर्षों में काम करने के अपने दृष्टिकोण को बदल दिया है। इन 8 वर्षों में गवर्नेंस की सोच के साथ-साथ नजरिए में भी बदलाव आया है।" उन्होंने कहा कि इस तब्दीली को बुनियादी ढांचे, सरकारी प्रक्रियाओं, ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और बाकी परिवर्तनों में देखा जा सकता है जो कि भारत के आकांक्षी समाज से प्रेरित हो रहे हैं।


उन्होंने कहा, "एक नया भारत खुद को आत्मविश्वास और विकास की आकांक्षाओं के साथ दुनिया के सामने पेश कर रहा है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास लगातार जारी रहने वाला मिशन है जो देश में साल के 365 दिन चलता रहता है। उन्होंने कहा कि जब एक परियोजना को समर्पित कर दिया जाता है तो उसके साथ-साथ नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाता है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई है, उनके ???िकास को गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं और रामागुंडम परियोजना इसका स्पष्ट उदाहरण है। रामागुंडम परियोजना की आधारशिला 7 अगस्त 2016 को प्रधानमंत्री द्वारा रखी गई थी।



प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करके आगे बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की कि "जब हमारा उद्देश्य महत्वाकांक्षी है तो हमें नई पद्धतियों का इस्तेमाल करना होता है और नई सुविधाओं का निर्माण करना होता है।" श्री मोदी ने कहा कि भारत का उर्वरक क्षेत्र केंद्र सरकार के ईमानदार प्रयासों का प्रमाण है। जब भारत उर्वरकों की मांग पूरी करने के लिए विदेशों पर निर्भर करता था, उस समय को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि रामागुंडम संयंत्र सहित पहले जो कई उर्वरक संयंत्र स्थापित किए गए थे, वे अप्रचलित प्रौद्योगिकियों के कारण बंद होने के लिए मजबूर हो गए थे। उन्होंने कहा कि यूरिया जो अत्यधिक ऊंची कीमत पर आयात किया जाता था, उसकी किसानों तक पहुंचने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए कालाबाजारी कर दी जाती थी।





2014 के बाद केंद्र सरकार ने जो सबसे पहले कदम उठाए उनमें से एक था यूरिया की 100% नीम कोटिंग सुनिश्चित करना और कालाबाजारी रोकना। उन्होंने कहा कि सॉयल हेल्थ कार्ड अभियान ने किसानों के बीच उनके खेतों की इष्टतम जरूरतों के बारे में ज्ञान सुनिश्चित किया। कई बरसों से बंद पड़े पांच बड़े उर्वरक संयंत्रों को फिर से शुरू किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में गोरखपुर संयंत्र ने उत्पादन शुरू कर दिया है, और रामागुंडम संयंत्र भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है। जब ये पांच संयंत्र पूरी तरह से काम करने लगेंगे तो देश को 60 लाख टन यूरिया मिलेगा, जिससे आयात में भारी बचत होगी और यूरिया की उपलब्धता आसान होगी। 



उन्होंने बताया कि रामागुंडम उर्वरक संयंत्र तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में किसानों को सेवाएं देगा। ये संयंत्र आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को गति देगा और इस इलाके में लॉजिस्टिक्स से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार द्वारा निवेश किए गए 6000 करोड़ रुपये तेलंगाना के युवाओं को कई हजार रुपये का लाभ देंगे।" प्रधानमंत्री ने उर्वरक क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के बारे में भी बात की और कहा कि नैनो यूरिया इस क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाएगा। प्रधानमंत्री ने कृषि के महत्व पर जोर दिया और ज़िक्र किया कि कैसे महामारी और युद्ध के कारण बढ़ी उर्वरकों की वैश्विक कीमतों का भार किसानों पर नहीं पड़ने दिया गया है। किसान को 2000 रुपये की यूरिया की बोरी 270 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4000 रुपये की कीमत वाले डीएपी के एक बैग पर 2500 रुपये की सब्सिडी दी जाती है।



प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि "बीते 8 वर्षों में केंद्र सरकार तकरीबन 10 लाख करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है ताकि किसानों पर उर्वरकों का बोझ न पड़े।" उन्होंने कहा कि भारत के किसानों के लिए सस्ती खाद उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने इस साल अब तक 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम किसान सम्मान निधि के तहत किसानों के बैंक खातों में लगभग 2.25 लाख करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं। प्रधानमंत्री ने बाजार में उपलब्ध उर्वरकों के ढेर सारे ब्रांडों का जिक्र किया जो दशकों से किसानों के लिए चिंता का विषय बने हुए थे। उन्होंने कहा, “यूरिया का अब भारत में केवल एक ब्रांड होगा और ये भारत ब्रांड कहलाएगा। इसकी गुणवत्ता और कीमत पहले से ही निर्धारित है।" ये इस बात का एक स्पष्ट उदाहरण है कि सरकार किस प्रकार इस क्षेत्र में सुधार कर रही है, खासकर छोटे किसानों के लिए।



प्रधानमंत्री ने कनेक्टिविटी इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौती के बारे में भी बात की। मौजूदा सरकार हर राज्य को आधुनिक राजमार्ग, हवाई अड्डे, जलमार्ग, रेलवे और इंटरनेट राजमार्ग उपलब्ध कराकर इस चुनौती से निपटने के लिए काम कर रही है। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान से इसे नई ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने कहा कि समन्वय और जानकारी पूर्ण कार्यशैली से परियोजनाओं के लंबे समय तक लटकने की संभावना अब खत्म हो रही है। उन्होंने कहा कि भद्राद्री कोठागुडेम जिले और खम्मम को जोड़ने वाली रेलवे लाइन 4 साल में तैयार हुई है और इससे स्थानीय आबादी को बहुत फायदा मिलेगा। इसी तरह आज जिन तीन राजमार्गों पर काम शुरू हुआ है जिससे इस इंडस्ट्रियल बेल्ट, गन्ना और हल्दी उत्पादकों को लाभ होगा।


देश में जब विकास कार्य गति पकड़ते हैं तब जो अफवाहें उठती हैं उनका जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ ताकतें हैं जो राजनीतिक फायदे के लिए अड़ंगा लगाती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तेलंगाना में 'सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड-एससीसीएल' और विभिन्न कोयला खदानों को लेकर ऐसी ही अफवाहें फैलाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि “तेलंगाना सरकार की एससीसीएल में 51% हिस्सेदारी है, जबकि केंद्र सरकार की 49% हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार अपने स्तर पर एससीसीएल के निजीकरण से संबंधित कोई भी निर्णय नहीं ले सकती है।" उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार के पास एससीसीएल के निजीकरण का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।



प्रधानमंत्री ने कोयला खदानों से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपयों के अनगिनत घोटालों को याद किया जिन्होंने देश की नाक में दम कर दिया था। उन्होंने बताया कि हमारे देश के साथ-साथ श्रमिकों, गरीबों और उन क्षेत्रों को भारी नुकसान हुआ जहां ये खदानें स्थित थीं। उन्होंने कहा कि देश में कोयले की बढ़ती आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ कोयला खदानों की नीलामी की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने डीएमएफ यानी जिला खनिज कोष भी बनाया है ताकि जहां से खनिज निकाले जाते हैं उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को लाभ दिया जा सके। इस फंड के तहत राज्यों को हजारों करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।




tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 12 नवंबर 2022 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 24 अगस्त 2026 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।