बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा,'''यूपी की आज़मगढ़ लोकसभा की सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव में बी.एस.पी. ने भी शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को चुनाव के मैदान में उतारा है, जो हमारे यह उम्मीद्वार यहाँ के स्थानीय निवासी हैं तथा यह बी.एस.पी. से कई बार विधायक भी रहे हैं। इन्होंने कोरोना के अति-कठिनकाल में व बाढ़ आदि के समय में भी यहाँ के दुःखी एवं पीड़ित लोगों की काफी मद्द की है। वैसे भी यह अक्सर ज़रूरतमन्द लोगों की काफी मदद करते रहते हैं और मदद भी केवल इन्होंने यहाँ अकेले अपने खुद के समाज के लोगों की ही नहीं की है बल्कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर व मानवता एवं इन्सानियत के नाते यहाँ सभी वर्गों व धर्मों के मानने वाले लोगों की अपने सामर्थ्य के हिसाब से हर स्तर पर पूरी-पूरी मद्द की है जबकि दूसरी पार्टियों के उम्मीद्वार ऐसे समय में हमें कहीं भी यहाँ नज़र नहीं आते है।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा,''इसके साथ ही, बी.एस.पी. का अकेला एक ऐसा हमारा यह उम्मीदवार है जो अधिकाशः आपके यानी की आज़मगढ़ की जनता के बीच में ही रहता है और दूसरी पार्टियों की तरह ना ही किसी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करता है। ऐसे व्यक्तित्व को हमने यहाँ कि आम जनता की चाहत व उनके हितों को भी ध्यान में रखकर अपना प्रत्याशी बनाया है।
मायावती ने कहा,''वैसे यूपी विधानसभा आमचुनाव के बाद यह पहला मौका है जब बी.एस.पी. यहाँ यह उपचुनाव लड़ रही है। हालाँकि यह उपचुनाव है, किन्तु लोगों के लिए यह इस मायने में खास व महत्त्वपूर्ण है कि वे एक तीर से दो शिकार करके पहले भाजपा को हराकर उसकी अग्निपथ आदि जैसी जनविरोधी नीतियों व बुलडोजर वाली अहंकारी कार्यशैली का सबक सिखा सकते हैं, और साथ ही, सपा को भी बीजेपी से उसकी अन्दरुनी मिलीभगत आदि की भी सज़ा दे सकते हैं, जिससे यह पुनः स्थापित हो जाएगा कि ख़ासकर यूपी में भाजपा को चुनाव में पराजित करने के लिए सपा नहीं, बल्कि बी.एस.पी. ही सर्वाधिक शक्तिशाली माध्यम है।
उन्होंने कहा,'''हॉलाकि यह भी जगजाहिर है कि भाजपा व सपा एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं तथा ये दोनों हमेशा एक-दूसरे के पूरक ही रहें हैं। साथ ही, इन दोनों पार्टियों की नीति व कार्यशैली एक-दूसरे को अन्दर-अन्दर राजनीतिक तौर पर मदद व मजबूत बनाने की ही रही है, जिसके एक नहीं बल्कि अनेकों उदाहरण लोगों के सामने मौजूद हैं, जिसका खामियाजा औरों से कहीं अधिक यहाँ अकलियतों व समाज के अन्य उपेक्षित वर्गों के लोगों को ही उठाना पड़ता है।
BSP प्रमुख ने कहा,;इतना ही नहीं बल्कि पिछले विधानसभा आमचुनाव में भी, इन दोनों पार्टियों के भारी षड्यंत्र एवं आपसी मिलीभगत के तहत ही बी.एस.पी. को बीजेपी की 'बी' टीम बताने व चुनाव को घोर हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक रंग देने का ही नतीजा था कि बीजेपी यहाँ दोबारा से सत्ता में वापिस आ गई और अब लोग अपने आपको यहाँ काफी ठगा हुआ सा महसूस करने लगे हैं।
मायावती ने कहा,',''वास्तव में वैसी गलती खासकर विशेष समुदाय के लोगों को अब यहाँ आगे नहीं दोहरानी चाहिए। खासकर आज़मगढ़ के लोकसभा उपचुनाव में तो यह गलती बिल्कुल भी नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा,''इसके साथ ही यह भी बहुत उम्मीद है कि इस चुनाव के परिणाम बी.एस.पी. के पक्ष में आने की सम्भावना की वजह से भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों व कार्यशैली आदि पर काफी हद तक अंकुश भी लग सके, जिसका फिर लाभ सर्वसमाज के लोगों को जरूर मिलेगा। इसीलिए अब आज़मगढ़ के सभी वर्गों व धर्मों के लोगों से मेरी यही पूरजोर अपील है कि वे यहाँ से बी.एस.पी. के उम्मीदवार को जिताकर प्रदेश व देश को जनहित व देशहित का बड़ा संदेश ज़रूर दें।
● यूपी की आजमगढ़ लोकसभा सीट पर BSP की तरफ से शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को टिकट दिया गया है। इन्होंने दलगत राजनीति से उठकर सभी धर्मों के लोगों की मदद की है। जनता के पास मौका है कि BSP को जीताकर सपा को बीजेपी से उनकी मिलीभगत का सबक सिखा सकते हैं। जिससे यह पुनः स्थापित हो जाएगा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने के लिए सपा नहीं बल्कि BSP ही एक माध्यम है|
● आज़मगढ़ लोकसभा उपचुनाव लोगों के लिए इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि वे एक तीर से दो शिकार करके पहले भाजपा को हराकर उसकी 'अग्निपथ' आदि जैसी जनविरोधी नीतियों व बुलडोजर वाली अहंकारी कार्यशैली का सबक सिखा सकते हैं। साथ ही, सपा को भी बीजेपी से उसकी अन्दरुनी मिलीभगत आदि की सजा दे सकते हैं, जिससे यह पुनः स्थापित हो जाएगा कि ख़ासकर यूपी में भाजपा को चुनाव में पराजित करने के लिए सपा नहीं, बल्कि बी.एस.पी. ही सर्वाधिक शक्तिशाली माध्यम है।