वीडीए प्रशासन अब अवैध निर्माण को संज्ञेय अपराध के रूप में लेगा. इस पर सीजीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराएगा.
साथ ही भवन स्वामी से एकमुश्त 50 हजार रुपये जुर्माना लेकर जब तक निर्माण नहीं रोका जाता, प्रतिदिन ढाई हजार रुपये वसूलेगा.
अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान के बाद भी अंकुश न लगने के कारण उप्र नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 26 एवं 27 के तहत प्राधिकरण के अधिकारों का प्रयोग किया जाएगा.
भवन स्वामी पर इस धारा में मुकदमा दर्ज होने के कारण अब थाने से जमानत नहीं होगी और उनको सीजीएम कोर्ट ही जाना होगा.
इन धाराओं में अवैध निर्माण को आपराधिक कृत्य मानते हुए वीडीए कार्यवाही करेगा. अब तक अवैध निर्माण को सील करके वीडीए संबंधित थानों की निगरानी में सौंप देता है.
लेकिन ऐसे तमाम उदाहरण मिले हैं जिनमें पुलिस ही सुविधा शुल्क लेकर अवैध निर्माण कराती है. मुकदमा होने पर थाने से आसानी से जमानत भी मिल जाती है.
वीडीए उपाध्यक्ष पुलकित गर्ग ने बताया कि अवैध निर्माण पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई होगी. धारा 26 (1) में सीजीएम कोर्ट में केस दर्ज कराया जाएगा.
नक्शे का सही उपयोग न होना भी अपराध आवासीय नक्शा पास कराकर वाणिज्यिक गतिविधियां करने पर धारा 26 (2) में एकमुश्त 25 हजार रुपये जुर्माना लिया जाएगा.
गतिविधि बंद होने तक या नक्शे में संशोधन तक रोज12500 रुपये जुर्माना लगेगा.