बस्ती: बस्ती जिला अस्पताल में 9 माह के बच्चे के इलाज में लापरवाही होने से उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में बच्चे के पिता ने एसआईसी से लेकर डीएम तक से गुहार लगाई थी। वहीं, मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं एसीएमओ ने जांच की थी। इसमें चिल्ड्रेन वार्ड में तैनात सिस्टर इंचार्ज सर्वेश राय, सीनियर नर्स ललिता कुमारी, स्टाफ नर्स राजेश्वरी, अंजली चौधरी, सरिता यादव को देरी से इलाज शुरू करने का दोषी पाया गया था।
पीड़ित के मुताबिक जांच टीम में शामिल एसडीएम न्यायिक हर्रैया नीरज प्रसाद पटेल और एसीएमओ डॉ. फखरेयार हुसैन ने अपनी जांच आख्या सितम्बर माह में दे दी थी। बावजूद इसके, आरोपियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पीड़ित ने कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी से मुलाकात की। जांच आख्या रिपोर्ट देते हुए सभी बिंदुओं से अवगत भी कराया। तब जाकर जिला अस्पताल में कार्यरत आरोपी स्टाफ के विरूद्ध लापरवाही पूर्वक इलाज करने और बच्चे को ओवरडोज देने से मौत होने के मामले में कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। एसपी आशीष श्रीवास्तव के निर्देश पर मामले में आरोपियों के विरूद्ध कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
आपको बता दें कि कलवारी थाना क्षेत्र के भैरोपुर गांव निवासी मो0 आसिफ ने अपने 9 माह के बच्चे फैजान को उल्टी, दस्त, बुखार की शिकायत पर 19 अगस्त 21 को जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ विजय प्रकाश यादव ने बच्चे को देखा और चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया। मो0 आसिफ का आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ से इलाज करने के लिए कहने के बाद भी आधा घंटा बीत गया। तो उसने डॉक्टर को फोन कर शिकायत की, साहब आधा घंटा बीत गया लेकिन बच्चे का इलाज शुरू नहीं हुआ। उनके कहने से मौजूद सिस्टर सर्वेश राय से बात कराई।
इस पर उन्होंने डॉक्टर की बात सुनकर गुस्से में फोन काट दिया और कहा कि तुम वार्ड में चलो, हम तुम्हारे बच्चे का ऐसा इलाज करेंगे कि जीवन भर याद रखोगे। जांच टीम ने आरोपी स्टाफ नर्सो और अन्य मरीजों के तीमारदारों के बयान लिए थे। इसमें सभी स्टाफ को देरी से इलाज करने और लापरवाही करने का दोषी मानते हुए अपनी रिपोर्ट दी थी। बावजूद इसके, जिम्मेदारों ने आरोपियों के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की। 10 सितम्बर को कार्रवाई की संस्तुति के साथ दी गई जांच आख्या पर जब लगभग 3 माह बीत गए और कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने एसपी से मिलकर गुहार लगाई। इसके बाद मामला दर्ज हो सका।