देहरादून: UKSSSC सचिवालय गार्ड भर्ती परीक्षा पेपर लीक: उत्तराखंड अधीनस्थ कर्मचारी चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) एग्जाम पेपर लीक घोटाले के बाद अब उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सचिवालय गार्ड भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक की पुष्टि हुई है। सचिवालय गार्ड भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में प्राथमिक जांच के बाद एसटीएफ ने देहरादून के रायपुर थाने में छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। आरोपियों ने परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र 10-10 लाख रुपये में बेचा था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को कहा,'उत्तराखंड एसटीएफ ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) सचिवालय गार्ड परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में पहली गिरफ्तारी की| गिरफ्तार आरोपित द्वारा पेन ड्राइव के माध्यम से प्रश्न पत्र चुराया गया और अपने साथियों की मदद से परीक्षार्थियों को 10-10 रुपये में बेचा था।
मामले में देहरादून के रायपुर थाने में दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में छह लोगों को आरोपी बनाया गया है।छह आरोपियों में से पांच को पहले यूकेएसएसएससी स्नातक स्तर के पेपर लीक मामले में (प्रदीप को छोड़कर )गिरफ्तार किया गया था। इनमें देहरादून के जयजीत दास, टिहरी गढ़वाल निवासी दीपक चौहान, उत्तर प्रदेश के बिजनौर निवासी कुलवीर सिंह, चंपावत के मनोज जोशी और अल्मोड़ा के मनोज जोशी हैं|
एसटीएफ एसएसपी ने बताया,''उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सचिवालय गार्ड भर्ती परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई है। परीक्षार्थियों को प्रश्न पत्र 10-10 लाख रुपये में बेचा गया। सभी 6 आरोपी स्नातक स्तर की भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में भी नामजद आरोपी है|
सचिवालय गार्ड परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में पहली गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश के बाराबंकी का रहने वाले प्रदीप पाल के रूप में हुई है|बताते चलें कि, यूकेएसएसएससी एग्जाम पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने रिम्स कंपनी लखनऊ (यूपी) के मालिक राजेश चौहान को गिरफ्तार किया है, जो कि इस मामले की 25वीं गिरफ्तारी है। साथ ही एसटीएफ ने रिम्स कंपनी के ही कर्मचारी प्रदीप पाल को भी गिरफ्तार कर लिया था, जो कि यूकेएसएसएससी प्रकरण में 26वीं गिरफ्तारी है , जबकि सचिवालय गार्ड परीक्षा प्रश्न पत्र लीक मामले में पहली गिरफ्तारी है|
राजेश चौहान कंपनी की रिम्स का कर्मचारी आरोपी प्रदीप पाल यूकेएसएसएससी के साथ लखनऊ स्थित आरएमएस टेक्नो सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, एक आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से एक कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में जुड़ा था। लखनऊ स्थित आयोग की आउटसोर्स प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर प्रदीप पाल ने Printing प्रक्रिया के दौरान प्रश्न पत्र की सॉफ्ट कॉपी चुरा ली और अन्य आरोपियों को एक पेन ड्राइव में सौंप दिया और उन्होंने इसे परीक्षार्थियों को 10 लाख की कीमत पर बेच दिया।
बताया जा रहा है, प्रदीप पाल ने यह पेपर परीक्षा से एक दिन पहले पेन ड्राइव में लिया और दूसरे कर्मचारी जयजीत को दे दिया था। जयजीत ने यह पेपर पीआरडी के कर्मचारी मनोज जोशी निवासी सेरा, पाटी, जिला चंपावत को दे दिया। वहां से यह पेपर सितारगंज न्यायालय के कनिष्ठ सहायक मनोज जोशी को दिया गया था।
इसके बाद कुलवीर सिंह निवासी सादीपुर, बास्टा, चांदपुर, बिजनौर और दीपक चौहान निवासी मखडै़त पटवारी, टिहरी गढ़वाल को मुहैया कराया गया। सभी आरोपियों ने पेपर अभ्यर्थियों को 10-10 लाख रुपये में बेचा था। इस मामले में प्रदीप पाल, जयजीत, कुलवीर सिंह, दीपक चौहान, मनोज जोशी, मनोज जोशी (न्यायालय सहायक) के खिलाफ धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
यूकेएसएसएससी) पेपर लीक मामले में रिम्स कंपनी लखनऊ का मालिक समेत 2 गिरफ्तार
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), एसटीएफ अजय सिंह ने कहा कि,''उन्होंने (एसटीएफ) मामले की जांच के दौरान ठोस तकनीकी सबूत इकट्ठा करने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि सचिवालय गार्ड प्रश्न पत्र यूकेएसएसएससी कार्यालय में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में छपा (Printed हुआ) था, जिसका फुटेज आरोपी की गिरफ्तारी में अहम था।
अधिकारी ने अनुचित तरीकों से सचिवालय गार्ड परीक्षा पास करने वाले उम्मीदवारों से जांच में शामिल होने या कार्रवाई का सामना करने का भी आग्रह किया।
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यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले का मास्टरमाइंड हाकम सिंह (भाजपा, उत्तरकाशी के जिला पंचायत सदस्य) का इस मामले (सचिवालय रक्षक भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक) में भी कनेक्शन सामने आया है। हालांकि, प्राथमिक जांच के आधार पर अभी इस मामले में उसे आरोपी नहीं बनाया गया है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी के अनुसार, यूकेएसएसएससी स्नातक स्तर के पेपर लीक के संदिग्ध मास्टरमाइंड हाकम सिंह रावत को भी सचिवालय गार्ड पेपर लीक मामले में आरोपी बनाया जा सकता है, जब उसके खिलाफ ठोस सबूत जुटाए जाएंगे।