नई दिल्ली: 'दिल्ली की कई सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों का आंदोलन आज 37वां दिन है। कृषि कानूनों के खिलाफ सिंघु बॉर्डर पर किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 37वें दिन भी जारी है। किसान मज़दूर संघर्ष कमेटी के सुखविंदर सिंह सभरा ने बताया, "तीन कृषि कानून रद्द होने चाहिए, अगर 4 जनवरी को इसका कोई हल नहीं निकलता तो आने वाले दिनों में संघर्ष तेज़ होगा।
बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा पारित 3 कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग लेकर पिछले 36 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर धरने पर बैठे किसानों के साथ केंद्र सरकार बुधवार को छठे दौर की वार्ता की| अगली बैठक 4 जनवरी को होगी| छठे दौर की वार्ता में दोनों पक्षों के बीच 4 में से 2 मुद्दों पर सहमति बनी|
किसान आंदोलन के संदर्भ में सरकार ने आधा विवाद सुलझाने का दावा किया है। हालांकि हकीकत यह है कि इस विवाद के मामले में अभी तक कुछ खास नतीजा नहीं निकला है। जिन दो प्रमुख मुद्दों तीनों कृषि कानून की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी पर पेच फंसा है, उन मामलों में बीच का रास्ता निकालना सरकार के लिए आसान नहीं है। बीच का रास्ता निकालने के लिए सरकार में शुक्रवार से माथापच्ची का दौर शुरू होगा।
चार जनवरी को किसान संगठनों से होने वाली सातवें दौर की बातचीत के कुछ मामले में सरकार का रुख अभी से स्पष्ट है। सरकार कानून वापसी की मांग स्वीकार नहीं करेगी। इसके अलावा एमएसपी पर खरीद व्यवस्था को जारी रखने संबंधी कानूनी गारंटी देने के लिए समय दिए जाने की मांग करेगी। इससे पहले सरकार किसान संगठनों को इस विवाद के निपटारे के लिए समिति का गठन संबंधी प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए राजी करेगी।
बुधवार की बैठक के बाद तोमर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि,',''कार्यसूची में 4 विषय थे, इनमें से 2 पर रजामंदी हो गई है। इससे दोनों पक्षों में एक अच्छा माहौल बना। किसान यूनियन 3 क़ानूनों को वापिस लेने की बात करती रही हैं। हमने ये बताने की कोशिश की है कि जहां समस्या है, वहां सरकार विचार करने को तैयार है|क़ानून के विषय में और MSP के विषय में चर्चा पूरी नहीं हुई है, चर्चा जारी है।
उन्होंने कहा था,सरकार कहती रही है कि एमएसपी जारी रहेगा। हम इसे लिखित रूप में देने के लिए तैयार हैं। लेकिन किसानों की यूनियनों को लगता है कि एमएसपी को कानूनी दर्जा मिलना चाहिए। इसलिए हम लोग 4 तारीख (4 जनवरी 2021) को दोपहर 2 बजे फिर से इकट्ठा होंगे और चर्चा को आगे बढ़ाएंगे| MSP और अन्य मुद्दों के कानूनी पहलू पर चर्चा रहेगी|
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था,''बैठक में किसान यूनियन के नेताओं ने जो 4 विषय चर्चा के लिए रखे थे, उनमें से 2 विषयों पर आपसी सहमति सरकार और किसान यूनियनों के बीच हो गई हैं| तोमर ने कहा कि,'पहला मुद्दा पर्यावरण से संबंधित एक अध्यादेश था। पर्यावरण से संबधित अध्यादेश है उसमें पराली और किसान सम्मिलित हैं। उनकी शंका थी किसान को इसमें नहीं होना चाहिए। इसपर दोनों पक्षों में सहमति हो गई है|
तोमर ने कहा था कि,''किसानों को लगता है कि अगर बिजली अधिनियम में सुधार किया जाता है, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा। यूनियनें चाहती थीं कि सिंचाई के लिए राज्यों द्वारा किसानों को दी जाने वाली बिजली की सब्सिडी जारी रहे। इस मुद्दे पर भी सहमति बनी|
सरकार के सूत्र के मुताबिक बुधवार की बैठक में ही कृषि मंत्री ने साफ कर दिया है कि सरकार कानूनों की वापसी की मांग नहीं मानेगी। कृषि मंत्री ने किसान संगठनों से तीनों कानूनों को रद्द करने के अलावा दूसरे विकल्प मांगे हैं। सरकार चाहती है कि किसान संगठन कानून रद्द करने के बदले कानून के उन प्रावधानों पर चर्चा करे, जिससे उसे समस्या है। सातवें दौर की बैठक में भी सरकार अपने इसी रुख पर कायम रहेगी।
कृषि मंत्रालय में एमएसपी पर नया प्रस्ताव देने पर माथापच्ची का दौर बृहस्पतिवार से शुरू हो गया है। सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार या शनिवार को सातवें दौर की वार्ता की रणनीति बनाने के लिए सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच बैठकों का दौर शुरू होगा। इन्हीं बैठकों में किसानों के सामने वार्ता के दौरान दिए जाने वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाएगा।