नई दिल्ली: सरकारी बैंकों के निजीकरण (privatization of public sector banks) को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला बोला है| RBI को कोट करते हुए कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,"RBI का एक बुलेटिन आया और उसमें साफ तौर पर कहा गया कि यह जो सरकारी बैंकों का अंधाधुंध निजीकरण चल रहा है, उसके बहुत ज्यादा दुष्परिणाम होंगे|
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,"केंद्र सरकार के दबाव के कारण RBI जैसी संस्था को अपनी इस रिपोर्ट से 'यू-टर्न' करना पड़ा। सरकार के दबाव के बाद RBI द्वारा एक प्रेस रिलीज जारी की गई जिसमें उन्होंने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया|
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,यह पहली बार नहीं है जब RBI जैसी संस्था को सरकार का दबाव झेलना पड़ रहा है। इस दबाव का सबसे बड़ा दुष्परिणाम नोटबंदी के रूप में याद रखिएगा | RBI कभी नहीं चाहता था कि नोटबंदी हो लेकिन उसके मना करने के बावजूद केंद्र सरकार ने इस देश पर नोटबंदी थोप दी। आज भी हम नोटबंदी के कुप्रभाव से उबर नहीं पाए हैं |
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,हम यह पूछना चाहते हैं कि RBI पर दबाव क्यों बनाना पड़ा? Reserve Bank of India को 'Reverse Bank of India' क्यों बनना पड़ा?
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 27 सरकारी बैंक घटकर 12 हो चुके हैं और उसका परिणाम देश भुगतेगा।
सरकारी बैंक सिर्फ लाभ कमाने का जरिया नहीं वह -
-Agents of Change
-Agents of Growth
- Agents of Development हैं
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने का काम सरकारी बैंकों ने किया है। खेतिहर मजदूर हो या किसान, Priority sector lending हो या Infrastructure lending सबको ऋण पहुंचाने का काम सरकारी बैंकों ने किया है |
उन्होंने कहा, ‘यह रिपोर्ट कहती है कि Global Financial Crisis के दौरान, प्राइवेट सेक्टर बैंकों से पैसा निकालकर पब्लिक सेक्टर बैंकों में डाला गया। इसके अनुसार अगर मजबूत सरकारी बैंक न होते तो Global Financial Crisis का प्रभाव हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा प्रभाव डालता |
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि,‘यह रिपोर्ट कहती है कि जो पैसा सरकार, सरकारी बैंकों के Capital infusion में डालती है, सरकारी बैंकों ने पिछले 14 सालों में इसका 4 गुना Operating profit दिया है | सरकार इस देश के सामने एक व्हाइट पेपर लेकर आए और बताए कि बैंक प्राइवेटाइजेशन के मुद्दे पर उनकी क्या मंशा है? इसके साथ ही संस्थाओं पर दबाव बनाने का काम बंद होना चाहिए|
उन्होंने कहा,श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने बैंकिंग की Monopoly को तोड़ने की हिम्मत दिखाई थी। जब बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ तो उसका लक्ष्य था कि कुछ लोगों के हाथों से पैसा निकालकर गरीब, किसान व खेतिहर मजदूरों तक पहुंचाया जाए|