मुख्य सामग्री पर जाएँ
25 अगस्त 2026

किसानों को धोखा देना और उनके साथ विश्वासघात करना बंद करे मोदी सरकार, कानून के आने के बाद MP में 47 मंडियां बंद हो गई: कांग्रेस का वार

नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली की सीमा पर बैठे लाखों किसानों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी वीडियो कॉन्फ्रेंस से मध्य प्…

किसानों को धोखा देना और उनके साथ विश्वासघात करना बंद करे मोदी सरकार, कानून के आने के बाद MP में 47 मंडियां बंद हो गई: कांग्रेस का वार
किसानों को धोखा देना और उनके साथ विश्वासघात करना बंद करे मोदी सरकार, कानून के आने के बाद MP में 47 मंडियां बंद हो गई: कांग्रेस का वार | फ़ोटो: TVL News

नई दिल्ली: कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली की सीमा पर बैठे लाखों किसानों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी वीडियो कॉन्फ्रेंस से मध्य प्रदेश में किसानों से वार्तालाप का ढोंग और प्रपंच कर रहे हैं। सच्चाई यह है कि हिमालय की चोटी से भी ऊंचे अहंकार में डूबी मोदी सरकार के हाथ 24 अन्नदाताओं के खून से सने हैं, जो किसान 21 दिन से हाड़ तोड़ती सर्दी में लाखों की संख्या में राजधानी दिल्ली के चारों ओर न्याय की गुहार लगा रहे हैं। मोदी सरकार अब ईस्ट इंडिया कंपनी से भी बड़ी व्यापारी कंपनी बन गई है, जो किसान की मेहनत की गंगा को मैली कर मुट्ठीभर पूंजीपतियों को पैसा कमवाने को आमादा है।



कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'मोदी सरकार को किसान सेछल, कपट, ढोंग और प्रपंच बंद करना चाहिए। प्रधानमंत्री जी 3 खेती विरोधी काले कानूनों की दीवारों की दरार को सरकारी दष्प्रुचार और झूठे इश्तिहारों से ढकना चाहते हैं। ऐसा नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी  नेइन काले कानूनों के क्रूरप्रहार से पहली बार देश के किसानों पर वार किया हो। सत्ता संभालते ही एक के बाद एक, एक के बाद एक मोदी सरकार ने पूंजीपतियों पर सारे संसाधन वार कर किसानों पर प्रहार किया है और आज देश को ये जानना आवश्यक है।



पहला वार – 12 जून, 2014 का ये पत्र है, जब मोदी सरकार ने सारे राज्यों को पत्र लिखकर फरमान जारी किया कि अगर किसानों को फसल पर बोनस देंगे, तो फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया फसल की खरीद उन राज्यों से नहीं करेगी। ये पहला वार था। 



2nd वार– दिसंबर, 2014 मेंमोदी सरकार किसानों की भूमि के उचित मुआवजा कानून को खत्म करने के लिए अध्यादेश लेकर आई और एक के बाद एक तीन अध्यादेश तब भी लाई, ताकि किसानों की जमीन आसानी से छीनकर औने-पौने दामों में बेची जा सके । राहुल गांधी जी, कांग्रेस और विपक्ष दलों के संघर्ष के बाद ये बात रुक पाई। 




तीसरा वार – मोदी जी सत्ता में आए थे ये कहकर कि लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा दूंगा किसान को फसल का। पर तीसरा वार किया फरवरी, 2015 में, जब नरेन्द्र मोदी सरकार ने शपथ पत्र दिया सुप्रीम कोर्ट में और ये कहा कि किसान को लागत पर 50 प्रतिशत मुनाफा कभी नहीं दिया जा सकता, क्योंकि उससे बड़े –बड़े व्यापारियों के बाजार भाव बिगड़ जाएंगे। 



चौथा वार- 2016 के खरीफ़ सीजन मेंबड़ेशानो-शौकत सेप्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लेकर आए। उसकी सच्चाई ये है कि 2016 से 2019 तक जितना बीमा प्रीमियम दिया गया, उस पर 26 हजार करोड़ रुपए इन बीमा कं पनियों नेमुनाफा कमाया। ये किसान बीमा योजना नहीं, येप्राईवेट बीमा कं पनी मुनाफा योजना बन गई।




पांचवा वार – आज मोदी जी खेत के कर्जके लोन वेवर की चर्चा कर रहे थे, पर जून, 2017 में संसद में मोदी जी के वित्त मंत्री माननीय अरुण जेटली जी ने कहा कि भारत सरकार किसान का कर्ज माफ नहीं कर सकती। एक फूटी कौड़ी की राहत किसान को कर्ज माफी की नहीं दे सकती। यूपीए कांग्रेस सरकार ने 72 हजार करोड़ माफ किया, पर मोदी जी ने नहीं। 3 लाख 75 हजार करोड़ मुट्ठीभर उद्योगपतियों का कर्जमाफ कर दिया जाएगा, विजय माल्या और छोटे मोदी, नीरव मोदी का कर्ज माफ होगा, पर देश के अन्नदाता किसान का नहीं।



छठा वार- प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि 6 हजार रुपए किसान सम्मान निधि का दे रहे हैं, पर ये नहीं बताते कि पिछले 6 सालों में 15 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर अतिरिक्त टैक्स किसान पर लगा दिया। 25 रुपए लीटर तो अकेले डीजल के दाम में वृद्धि कर दी। डीजल के अलावा कीटनाशक से लेकर ट्रैक्टर से लेकर, खाद से लेकर पहली बार देश के इतिहास में 5 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक जीएसटी लगा दिया और इस प्रकार 15 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर उसकी जेब से निकाल लिया। एक तरफ आप किसानों की पॉकेट मार रहे हैंऔर दूसरी तरफ ऑटो का भाड़ा देने का स्वांग रच रहे हैं। इन तीन काले कानूनों के दष्पुरिणाम तो मध्य प्रदेश की मंडियों से ही आने लगे हैं और उन मध्य प्रदेश की मंडियों के कागज आज हम आपके पास लेकर आए हैं।





रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री आज जब मध्य प्रदेश के किसान को संबोधित करने का स्वांग रच रहे थे, तो काश! वो मध्य प्रदेश की मंडियों का हाल तो जान लेते। मध्य प्रदेश में 269 सरकारी कृषि उपज खरीद मंडियां हैं। इस कानून के आने के बाद मध्य प्रदेश में 47 मंडियां बंद हो गई। मैं फिर दोहराता हूं – 47 मंडियां पूरी तरह से बंद हो गई, जहाँ एक पैसे का कारोबार नहीं हो पाया और यही नहीं 143 मंडियां ऐसी हैं मध्य प्रदेश में, जहाँ पर कारोबार होना तो दूर 50 प्रतिशत कारोबार बंद हो गया। ये वो लिस्ट है, जो एन.एम.पोर्टल से निकालकर लाए, हैं जो दिखाते हैं कि कारोबार जीरो हो गया है। इतना ही नहीं, मध्य प्रदेश में 1,850 रुपए के समर्थन मूल्य का मक्का 810 रुपए में बिक रहा है| मोदी जी, और बिहार में 900 रुपए में।





रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'काश, अगर आप ये जान लेते और एक रसीद है हमारे पास जो हम वहाँ से, ये है वो रसीद – मध्य प्रदेश के उसी किसान की, जिसे आप संबोधित कर रहे थेऔर ये हम लेकर आए है झाबुआ से। 510 रुपए मक्का बिका है 1,850 रुपए क्विंटल का। ये आपके काले कानूनों का सबूत है और काले कानून आते ही किसान समर्थन मूल्य से कम बेचने पर मजबूर हो गए। ये हम नहीं कह रहे, एक निजी न्यूज ऐजेंसी ने हाल ही में 15 राज्यों की 291 मंडियों का सर्वे किया। उसमें पाया गया कि ये 3 काले कानून आने के बाद धान का समर्थन मूल्य यूपी में 47 प्रतिशत गिर गया, गुजरात में 83 प्रतिशत गिरा, कर्नाटक में 63 प्रतिशत गिरा, तेलंगाना में 60 प्रतिशत गिरा और पूरे देश में 77 प्रतिशत किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिला।




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,' इससे बड़ा झूठ और क्या होगा मोदी जी? और किसान को आप बात करते हैं दालों की। किसान को लूटने के लिए मोदी सरकार जब उनकी फसल आती है, तो विदेशों से आयात करती है। इसके दो उदाहरण मैं पेश करुंगा – मक्का के किसानों पर मोदी सरकार ने आघात करते हुए जैसे ही मक्का की फसल इस बार आई, तो इम्पोर्ट ड्यूटी दलालों के साथ मिलकर 50 प्रतिशत से घटाकर, मक्का की इम्पोर्टड्यूटी 15 प्रतिशत कर दी। ऐसा क्यों किया आपने, क्योंकि 5 लाख मीट्रिक टन सस्ता मक्का विदेशों से मोदी जी ने मंगवा लिया और हिंदुस्तान के मक्का पैदा करने वाले किसान का रेट साढ़े 1,800 रुपए से गिरकर 700 रुपए हो गया। बता दीजिए ये सही है या नहीं?




रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,'यही नहीं, दाल की बात करते थे, तो वो भी सुन लीजिए। कांग्रेस ने ये साबित किया था कि साल 2016 में आपने 15 महीने में 37 से 41 रुपए किलो पर दाल मंगवा कर देशवासि??ों को 150 रुपए बिकवा कर ढाई लाख करोड़ की लूट करवाई थी। और साल 2020-21 में तो हद हो गई है – साल 2020-21 में अब जब किसान की दालें आएंगी, तो मोदी सरकार ने 30 लाख टन, चौंकिए मत, 30 लाख टन विदेशों से दाल मंगवाने का निर्णय कर लिया है। इससे बड़ा आघात किसान के ऊपर होगा क्या? एक सीधा सवाल मोदी जी से है, मोदी जी, प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री मोदी की बात क्यों नहीं मानते, उससे किसान की सारी समस्या हल हो जाएगी, यही किसान की मांग है..? मोदी, मोदी की बात क्यों नहीं मानते, क्या इसका जवाब देश के किसान को देंगे प्रधानमंत्री जी? ये वो रिपोर्ट है, वर्किंग ग्रुप की, जो मुख्यमंत्री मोदी ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह जी को सौंपी थी। ये है गुजरात मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की रिपोर्ट और इस रिपोर्ट के अंदर गुजरात मुख्यमंत्री मोदी ने लिखा है कि किसानों को न्यूनतन समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दे देनी चाहिए। 




जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने लिखा कि,'' किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी देनी चाहिए और मैं इस रिपोर्ट का वो पैरा आपको पढ़कर बताना चाहूंगा। पैरा B-3, In respect of all essential commodities we should protect farmers’ interests by mandating through statutory provisions that no farmer-trader transaction should be below MSP, wherever prescribed. 




मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साफ लिखा रिपोर्ट में दस्तख्त करके लिखा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य का कानून बनाकर लागू करना चाहिए। आज जब देश के लाखों किसान प्रधानमंत्री मोदी से यही मांग करते हैं, तो मोदी – मोदी की बात क्यों नहीं मानते...? और प्रधानमंत्री जी किसानों को देशद्रोही बता अपमानित करना बंद कीजिए और माफी मांगिए। 





मनोहर लाल खट्टर जी किसानों को खालिस्तानी बताते हैं, पीयूष गोयल जी उनको नक्सलवादी बताते हैं, रवि शंकर प्रसाद जी उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग बताते हैं, जेपी दलाल, कृषि मंत्री, हरियाणा किसानों को चीन और पाकिस्तान का एजेंट बताते हैं, केंद्रीय कृषि मंत्री, नरेन्द्र तोमर जी उन्हें राजनीतिक कठपुतली बताते हैं। देश के अन्नदाता का ये अपमान मत करिए, देश का अन्नदाता आपकी गाली सुनने नहीं आया। वो अपनी आजीविका और रोटी मांगने आया है, न्याय मांगने आया है। प्रधानमंत्री को किसानों स माफी मांगनी चाहिए।



रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि,' वीडियो वार्तालाप कभी कच्छ में और कभी रायसेन(मध्य प्रदेश) में करने की बजाए सीमा पर बैठे किसानों सेबात करिए, तीनों काले कानून वापस करिए, यही राजधर्म है। राजहठ छोड़िए, राजधर्म अपनाईए। 





किसानों के आंदोलन के संदर्भ में प्रधानमंत्री के ब्यान बारे पूछे ए,क प्रश्न के उत्तर में सुरजेवाला ने कहा कि हम हाथ जोड़कर देश के प्रधानमंत्री जी से आग्रह करते हैं कि उनकी सरकार के हाथ 24 किसानों के खून से सने हैं। कितने और किसानों की जान लेगी मोदी सरकार, कितने और किसानों को कुर्बानी देनी पड़ेगी मोदी सरकार की हठधर्मिता के आगे..? देश का किसान देश की राजधानी में क्यों नहीं आ सकता? किससे पूछ कर मोदी जी आपने ये तीन काले कानून रात के अंधेरे में अध्यादेश के माध्यम से बनाए थे..? क्यों आपने ये कानून मोदी जी जबरन संसद में पारित करवाए थे..? क्यों आप देश के अन्नदाता किसान और उसके बेटा, बेटी, देश के जवान की हाय और पुकार नहीं सुन रहे...? प्रधानमंत्री जी आप इतने निष्ठुर क्यों हैं? प्रधानमंत्री जी आप इतने निर्दयी क्यों हैं...? इतने निर्मम क्यों हैं? क्या आपको एक और दो डिग्री, जीरो डिग्री टैंप्रेचर में कंप कंपाता, न्याय मांगता पीड़ित, धरतीपुत्र की पुकार, क्या आप देश की सत्ता की अट्टालिकाओं में बैठे हुए प्रधानमंत्री को सुनती नहीं...? हमारा उनसे हाथ जोड़कर अनुरोध है, कांग्रेस से दश्मुनी है, तो मोदी जी जरुर निकालिए। आपको कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी जी से नफरत है, तो हम सबको जेल भेज दीजिए। सब किसानों को जेल में भेज दीजिए, पर तीन काले कानून वापस ले लीजिए, यही वक्त की मांग है।




किसानों के आंदोलन के संदर्भ में प्रधानमंत्री के ब्यान बारे एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार ने रात के अंधेरे में तीन या चार उद्योगपतियों के द्वारा लिखे गए कानून जबरन मंत्री मंडल में पारित किए। क्या आदरणीय मोदी जी बताएंगे कौन से किसान संगठन ने इन काले कानूनों की मांग रखी थी...? कौन से राजनीतिक दल ने मोदी जी को ये कहा था कि ये कालेकानून पारित करिए...? कौन से किसान विशेषज्ञ या कृषि विशेषज्ञ ने ये कहा था कि इन काले कानूनों को लेकर आईए..? 





लॉकडाउन के दौरान चोरी छुपेचोर दरवाजे से कॉर्पोरेट के लिखे कानूनों को आपने मंत्रिमंडल में क्यों पारित किया और जब कांग्रेस ने विरोध जताया, विपक्षी दलों ने विरोध जताया, तो लोकसभा और राज्यसभा में खास तौर से ध्वनि मत से बगैर बहुमत के इन कानूनों को क्यों पारित करवाया? और आज भी बहुमत का हवाला देकर 307 सांसदों का अहंकार जता कर, आप किसानों से बातचीत करने से क्यों कतरा रहे हैं? 




अगर प्रधानमंत्री कच्छ जाकर 5 भाजपा कार्यकर्ताओं को किसान बताकर उनसे बात कर सकते हैं, अगर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भाजपा कार्यकर्ताओं को किसान बताकर बात कर सकते हैं, तो दिल्ली के बॉर्डर पर बैठे किसानों से क्यों नहीं...? अगर सीखना है तो राजीव गांधी जी से सीख लीजिए, 402 सांसद थे राजीव गांधी जी के पास 1988 में, जब किसानों ने कहा कि वो दिल्ली कूच करेंगे और आएंगे। दिल्ली के सारे रास्ते राजीव गांधी जी ने खोल दिए थे, कांग्रेस सरकार ने। एक लाख के करीब किसान राजपथ पर बैठा रहा। कांग्रेस की सरकार ने एक डंडा तक नहीं मारा, वॉटर कैनन नहीं चलाया, सड़कें नहीं खोदी, मंत्रिमंडल समूह ने बात की और हल निकाला। हमारे पास 402 सांसद थे, आपके पास 307 हैं। कांग्रेस के पास संपूर्णब हुमत था जब अन्ना हजारे का आंदोलन हुआ। हमने हमारे विरोधी होते हुए भी उनको रामलीला ग्राउंड से कांग्रेस का विरोध करने का अख्तियार दिया।





पहली बार 73 साल के इतिहास में देश का अन्नदाता किसान जिसका बेटा देश का जवान है, आपने चुनी हुई सरकार ने, क्रेन लगाकर राष्ट्रीय राजमार्ग खोद दिए। खट्टर और दुष्यंत चौटाला ने मिलकर वहाँ बॉल्डर, वहाँ सीमेंट और बजरी के ट्रक उल्टा दिए। किसान ने सड़कें नहीं रोकी हुई|ये सड़कें मोदी सरकार ने रोक रखी हैं।





किसान तो शांतिप्रिय तरीके से दिल्ली के अंदर आकर अपना विरोध जताना चाहता है। क्या बिगड़ जाएगा मोदी जी अगर वो रामलीला ग्राउंड या फिर जंतर-मंतर या राजपथ पर बैठ जाएंगे...? ये राजपथ पर, नोर्थ और साउथ ब्लॉक पर जो आप बैठे हैं ना, ये उस किसान की बदौलत बैठे हैं और जिस दिन देश का अन्नदाता किसान और उसका बेटा जवान दोनों सामने खड़े हो गए, तो सत्ता की अट्टालिकाओं में बैठे लोगों को धराशायी होने में देर नहीं लगेगी। 





एक अन्य प्रश्न के उत्तर मेंश्री सुरजेवाला नेकहा कि याद करिए जिस दिन ये अध्यादेश आए, राहुल गांधी पहले व्यक्ति थे देश में, जिन्होंने विरोध जताया। कांग्रेस पार्टी ने इन अध्यादेशों का घोर विरोध किया। फिर इन अध्यादेशों को मोदी जी संसद के अंदर लेकर आए। लोकसभा मेंकांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने भरपूर विरोध किया। जब वहाँ बहुमत के आधार पर पारित करवा लिए, तो हमने राज्यसभा में माहौल बनाया। मोदी जी के मित्र भी कांग्रेस के साथ आकर खड़े हो गए। जब लगा कि ये कानून अब हार जाने वाले हैं, तो ध्वनि मत से जबरन बगैर गिनती करवाए ये कानून पारित करवाए। क्या ये सही नहीं कि उसके बावजूद भी हमारे सांसद 3-3 दिन और 3-3 रात महात्मा गांधी जी की मूर्ति के नीचे विरोध में बैठे रहे, उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। क्या ये सही नहीं कि राहुल गांधी जी ट्रैक्टर यात्रा लेकर पूरे पंजाब में गए, हरियाणा में गए, इन कानूनों का विरोध किया। 




आज भी कांग्रेस और विपक्ष किसानों के साथ है और हम 32 किसान यूनियनों की इस मांग का आदर करते हैं, जब उन्होंने कहा कि अगर राजनीतिक दल यहाँ आएंगे, तो भाजपा दष्प्रुचार करेगी। इसलिए हमने उनका आदर करते हुए उनकी बात स्वीकारी। ये कांग्रेस बनाम भाजपा की लड़ाई नहीं है, ये विपक्ष बनाम सत्तापक्ष की भी लडाई नहीं है। ये देश के 62 करोड़ लोगों की आजीविका की लड़ाई है। इस देश को मारिए मत, अगर अन्नदाता सामने खड़ा हो गया, तो फिर राजगद्दी बच नहीं पाएगी। इसे चेतावनी मान लें।





एक अन्य प्रश्न के उत्तर में सुरजेवाला ने कहा कि आज भी सरकार का मंत्रिमंडल समूह मानता है कि इन कानूनों में 22 संशोधनों की आवश्यकता है। जो कानून बने और बनते ही जिसमें 22 संशोधन चाहिए तो वो कानून सही कैसे हो सकते हैं..? मोदी जी, हमारी आपसे हाथ जोडकर विनती है, विनम्र आग्रह है इस देश के अन्नदाता की ओर से कि हठ छोड़िए, 4 उद्योगपतियों का मुनाफा छोड़िए, 25 लाख करोड़ का खेती की उपज का कारोबार जो आप 4 आदमियों के हाथ में देना चाहते हैं, वो जिद्द छोड़िए|  इन काले कानूनों को खत्म करिए। उसके बाद नए सिरेसे किसान यूनियन को बुलाईए, उनसे बात करिए, स्टेक होल्डर को बुलाईए, उनसे बात करिए, राजनीतिक दलों को बुलाईए, उनसे बात करिए, फिर कोई कानून बनाईए, यही सही रास्ता है। 





एक अन्य प्रश्न पर कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि किसानों से लगातार बातचीत हो रही है, क्या कहेंगे..? जिसपर सुरजेवाला ने कहा कि पहली बात तो बातचीत हो ही नहीं रही। एक अंग्रेजी का मुहावरा है, मोदी सरकार कह रही है, our way or high way, या हमारी बात मान लो, ये कानून लागू रहेंगे और नहीं तो घर चले जाएं । क्या इस माहौल में बातचीत हो सकती है..? जवाब नहीं में हैं। 




किसानों ने क्या कहा, किसानों ने और दलों ने यही कहा, आपने किसी से राय ही नहीं ली। कोई चर्चा ही नहीं हुई। याद करिए मोदी जी ने सब उद्योगपति बुलाए थे और उनसे कहा कि आप बताईए आपके लिए मैं कानून में क्या संशोधन करुं...? क्या मोदी जी ने कभी किसानों को बुलाया, खेत मजदर को बुलाया, किसान संगठनों को बुलाया, किसान यूनियन को बुलाया, स्टेक होल्डर को बुलाया, राजनीतिक दलों को बुलाया, अगर इन सबका जवाब नहीं में है तो ,बातचीत कहाँ हो रही है? दूसरी बात, जैसा एक और मित्र ने पूछा था, किसान यूनियन, जो भारतीय किसान यूनियन के नीचे 32 संगठन है, उन्होंने ये कहा, साफ तौर से कहा कि राजनीतिक दल हमारे आंदोलन में आकर हमारे साथ बैठेंगे, तो भारतीय जनता पार्टी को दष्प्रुचार का मौका मिलेगा। राहुल गांधी जी हों या दूसरे विपक्ष के नेता हों, हमने इसे स्वीकारा है, परंतु हमारा राजनीतिक समर्थन, हमारा सामाजिक समर्थन, हमारा नैतिक समर्थन इस देश के अन्नदाता के साथ है।







tvlnews

TVL News (TheViralLines) के संवाददाता। यह रिपोर्ट स्थानीय स्रोतों और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी की पुष्टि के बाद प्रकाशित की गई है। किसी तथ्य में सुधार के लिए संपर्क करें या +91 99996 56869 पर WhatsApp करें।

मुफ़्त अलर्ट

ऐसी हर खबर सबसे पहले पाएँ

बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अपडेट सीधे आपके WhatsApp पर।

इन्हें भी पढ़ें

टॉप न्यूज़ की सभी खबरें

इस खबर से जुड़े सवाल

यह खबर कब प्रकाशित हुई और आखिरी बार कब अपडेट की गई?

यह रिपोर्ट 18 दिसंबर 2020 को TVL News पर प्रकाशित हुई और 9 मई 2025 को अपडेट की गई। नई जानकारी मिलने पर खबर को अपडेट किया जाता है।

इस क्षेत्र की और खबरें कहाँ पढ़ें?

इस क्षेत्र की ताज़ा खबरें TVL News के ज़िला सेक्शन में पढ़ी जा सकती हैं। thevirallines.net पर बस्ती, गोंडा, अयोध्या, गोरखपुर और लखनऊ के अलग-अलग पेज हर दिन अपडेट होते हैं।

इस खबर में कोई तथ्य ग़लत लगे तो क्या करें?

TVL News हर सुधार को गंभीरता से लेता है। +91 99996 56869 पर WhatsApp करें या thevirallines@gmail.com पर लिखें — पुष्टि के बाद खबर तुरंत सुधारी जाती है।