नई दिल्ली: कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन 21वें दिन भी जारी है। दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही है.. रात का पारा 5 डिग्री से भी नीचे लुढ़क चुका है लेकिन दिल्ली के बॉर्डर पर धरने पर बैठे हजारों किसानों के हौसले परवान पर हैं|सरकार कुछ संशोधन पर अडिग है तो किसान कृषि कानूनों को वापस कराने की मांग पर अड़े हैं।
किसान कानूनों के विरोध के लिए यूपी की अलग-अलग जगहों से आए पूर्व सैनिक गाजीपुर बॉर्डर पहुंचे। पूर्व सैनिक संगठन से सूबेदार रहे जे.पी. मिश्रा ने बताया, "ओडिशा से भी और लोग आज आ रहे हैं। साढ़े 10 बजे तक लगभग 200 लोग आ जाएंगे। किसानों के साथ अब संत और सैनिक समाज दोनों खड़े हैं। "
वहीं, आज कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर हो रहे किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। दायर याचिका में कहा गया है कि धरना-प्रदर्शन से आम लोगों को भारी परेशानी हो रही है। किसानों ने आज चिल्ला बॉर्डर जाम कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई शुरू हुई तो सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें मैसेज मिला है कि वकील हरीश साल्वे अदालत में पेश होना चाहते हैं। इस पर सीजेआई एसए बोबडे ने कहा कि आप कोर्ट मास्टर पर टिप्पणी न करें। हम आपसे पूछ रहे हैं कि क्या वकील साल्वे इस मामले में उपस्थित होंगे। एसजी ने कहा कि मुझे अभी मैसेज मिला है। इस पर सीजेआई ने कहा कि हमारे पास कोई जानकारी नहीं है कि वह यहां उपस्थित होंगे। इसके बाद अधिवक्ता दुष्यंत तिवारी ने अदालत से कहा कि आपने अमित साहनी केस(शाहीन बाग मामले में) में जो आदेश दिया था उसका पैरा संख्या 19 देखें।
एसजी ने एक बार फिर अदालत से अधिवक्ता हरीश साल्वे को अनम्यूट करने को कहा। इस पर कोर्ट मास्टर ने अदालत को जानकारी दी कि किसी एओआर ने साल्वे के उपस्थित होने की जानकारी नहीं दी है। इसके बाद दुष्यंत तिवारी ने अपनी दलीलों में कहा कि याचिकाकर्ता किसान नहीं बल्कि कानून का छात्र है।
इस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि यह इतना महत्वपूर्ण विषय है आप इस पर सही तरीके से बहस क्यों नहीं कर रहे। हम आपसे पूछ रहे हैं कि आप का पक्ष क्या है, आपके मुद्दे और याचना क्या हैं? इसी बीच एसजी ने एक बार फिर अदालत की कार्रवाई में दखल दिया और कहा कि मैं माफी चाहता हूं लेकिन हरीश साल्वे ने एक और मैसेज भेजकर इस मामले में उपस्थित रहने की अपील की है। उनका कहना है कि उनका केस भी ऐसा ही है। तब सीजेआई ने कहा कि हमें परेशान न करें, हमारे पास साल्वे का कोई केस नहीं है।
इसके बाद सीजेआई बोबडे ने कहा कि उनका कोई केस है तो हम उन्हें सुनेंगे। लेकिन उनका कोई केस हमारे सामने नहीं है। इसके बाद ओम प्रकाश परिहार ने अपनी दलीलें देनी शुरू कीं। परिहार ने शाहीन बाग और किसान आंदोलन की परिस्थिति की तुलना की। तब सीजेआई ने पूछा कि कितने लोगों ने वहां सड़क जाम किया था? क्या लोगों की संख्या इसका निर्धारण नहीं करेगी? जिम्मेदारी कौन लेगा? कानून और व्यवस्था की स्थिति में कोई मिसाल नहीं हो सकती?
इसके बाद वकील रीपक कंसल के पेश होने पर सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि क्या संगठनों को जोड़ा गया है। इस पर अधिवक्ता परिहार ने कहा कि उनके शामिल होने की जानकारी नहीं है। तब सीजेआई बोले अखबारों की रिपोर्ट देखिए संस्थाएं मौजूद हैं। इस पर परिहार ने कहा कि हम ऐसा करेंगे तो अदालत कहेगी कि हम अखबारों की रिपोर्ट चल रहे हैं और हमारी याचिका खारिज कर देगी। तब सीजेआई ने कहा कि आपको अदालत को मदद करनी चाहिए। बेवजह हमसे बहस मत करिए।
इसके बाद वकील रीपक कंसल के पेश होने पर सीजेआई ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि क्या संगठनों को जोड़ा गया है। इस पर अधिवक्ता परिहार ने कहा कि उनके शामिल होने की जानकारी नहीं है। तब सीजेआई बोले अखबारों की रिपोर्ट देखिए संस्थाएं मौजूद हैं। इस पर परिहार ने कहा कि हम ऐसा करेंगे तो अदालत कहेगी कि हम अखबारों की रिपोर्ट चल रहे हैं और हमारी याचिका खारिज कर देगी। तब सीजेआई ने कहा कि आपको अदालत को मदद करनी चाहिए। बेवजह हमसे बहस मत करिए।
इस पर वकील रीपक कंसल ने कहा कि संतुलन होना चाहिए। मुक्त आवागमन नहीं हो पा रहा, एंबुलेंस नहीं जा पा रही। यह अनुच्छेद 19(1),(a)(b) और (c) का उल्लंघन है। इसके बाद वकील जीएस मणि ने अदालत में कहा कि उनके पास तमिलनाडु में भूमि है और वह किसानों की तकलीफ समझते हैं क्योंकि वह जब वहां जाते हैं तो खेती करते हैं। मुझे नहीं पता कि यह सरकार की गलती है कि किसानों की। इस पर सीजेआई ने उन्हें लगभग डांटते हुए कहा कि क्या आप चुप रहेंगे और सुनेंगे? आप कहते हैं कि आप पंजाब और हरियाणा के किसानों का दर्द समझ सकते हैं क्योंकि आपके पास तमिलनाडु में भूमि है? आप क्या जानते हैं? तब मणि ने कहा कि वह कड़ाके की ठंड में प्रदर्शन करने का दर्द जानते हैं।
तमाम दलीलों को सुनने के बाद सीजेआई ने एसजी से कहा कि हम देख रहे हैं कि सभी याचिकाएं अजीब हैं और हमारे सामने कोई वैधानिक मुद्दा नहीं रखा गया है। हमारे सामने जिसने रोड ब्लॉक किया है उसमें सिर्फ आप हैं मिस्टर एसजी। इस पर एसजी ने कहा कि मैंने रोड ब्लॉक नहीं की है। इस पर सीजेआई ने कहा कि नहीं, नहीं, नहीं। किसने रोड ब्लॉक की है? तब एसजी ने जवाब दिया किसान आंदोलन कर रहे हैं और सड़क दिल्ली पुलिस ने ब्लॉक की है। तब सीजेआई बोले कि असल में कोई रोड ब्लॉक करने वाला है तो वो आप हैं।
सीजेआई ने कहा कि वो कौन से पक्ष हैं जो प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं? एसजी ने बताया भारतीय किसान यूनियन। सरकार किसानों के हित के विरुद्ध कोई काम नहीं करेगी। पहले किसान सरकार के साथ बैठें और हर धारा पर चर्चा करें, तब जाकर खुले मन से कोई चर्चा या वाद-विवाद संभव है। इस पर सीजेआई ने कहा कि आपकी बातचीत ने काम नहीं किया। आपको बातचीच की इच्छाशक्ति दिखानी होगी और हमारे सामने किसान को लाना होगा जो बातचीत के लिए राजी हो। हमें यूनियन का नाम दीजिए। एसजी बोले कि मैं आपको दस मिनट में नाम दे सकता हूं, अभी मुझे भारतीय किसान का नाम याद आ रहा है।
इसके बाद वकील राहुल मेहरा ने कहा कि किसान कड़कती ठंड में हैं। वो यहां मजबूरी के चलते हैं। यह इच्छा से नहीं किया गया है। तब एसजी बोले कि ऐसा लगता है आप किसी किसान संगठन की तरफ से पेश हुए हैं। तब अधिवक्ता मेहरा बोले मैं भी कह सकता हूं कि आप किसी और चीज के लिए उपस्थित हुए हैं। बाद में अदालत ने एसजी को बताया कि कोर्ट तुरंत एक कमेटी बनाएगी जिसमें पूरे देश के किसान संगठनों के किसान होंगे। नहीं तो ये जल्द ही एक राष्ट्रीय मुद्दा बन जाएगा। ऐसा लगता है कि सरकार नहीं संभाल पाएगी। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर कल तक जवाब मांगा है।