नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधिवत भूमि पूजन के बाद नए संसद भवन की आधारशिला रख दी है। पीएम मोदी द्वारा नए संसद भवन की शिलान्यास भूमि पूजन के बाद लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने भूमि पूजन सामग्री अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन की स्मृति पट्टिका का अनावरण किया।
टाटा ट्रस्ट के अध्यक्ष रतन टाटा, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश,केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी नए संसद भवन के शिलान्यास समारोह में मौजूद रहे। ।टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को परियोजना का अनुबंध दिया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,''नए संसद भवन का निर्माण, नूतन और पुरातन के सह-अस्तित्व का उदाहरण है। यह समय और जरूरतों के अनुरूप खुद में परिवर्तन लाने का प्रयास है। इसमें ऐसी अनेक नई चीजें की जा रही हैं, जिनसे सांसदों की Efficiency बढ़ेगी और उनके Work Culture में आधुनिक तौर-तरीके आएंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि,''संसद भवन की शक्ति का स्रोत, उसकी ऊर्जा का स्रोत हमारा लोकतंत्र है। लोकतंत्र भारत में क्यों सफल हुआ, क्यों सफल है और क्यों कभी लोकतंत्र पर आंच नहीं आ सकती, यह हमारी आज की पीढ़ी के लिए भी जानना-समझना जरूरी है।
मोदी ने कहा कि,''भारत में लोकतंत्र एक संस्कार है। भारत के लिए लोकतंत्र जीवन मूल्य है, जीवन पद्धति है, राष्ट्र जीवन की आत्मा है। भारत का लोकतंत्र सदियों के अनुभव से विकसित हुई व्यवस्था है। भारत के लिए लोकतंत्र में जीवन मंत्र भी है, जीवन तत्व भी है और व्यवस्था का तंत्र भी है।अलग-अलग विचार और दृष्टिकोण एक Vibrant Democracy को सशक्त करते हैं। Policies में अंतर हो सकता है, Politics में भिन्नता हो सकती है, लेकिन हम Public की सेवा के लिए हैं, इसमें मतभेद नहीं होना चाहिए। वाद-संवाद संसद में हों या बाहर, राष्ट्रहित के प्रति समर्पण लगातार झलकना चाहिए।
PM मोदी ने कहा कि,''नया संसद भवन तब तक एक इमारत ही रहेगा, जब तक उसकी प्राण-प्रतिष्ठा नहीं होगी। इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे, इसमें चुनकर आने वाले जन-प्रतिनिधि। उनका समर्पण, उनका सेवा भाव, उनका आचार-विचार-व्यवहार, इस मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा करेगा।जब देश वर्ष 2047 में अपनी स्वतंत्रता के 100वें वर्ष में प्रवेश करेगा, तब हमारा देश कैसा हो, इसके लिए हमें आज संकल्प लेकर काम शुरू करना होगा। जब हम देशहित को सर्वोपरि रखते हुए काम करेंगे तो आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत का निर्माण कोई रोक नहीं सकता।