नई दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को GDP, बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई को लेकर मोदी सरकार पर हमला बोला| राहुल गांधी ने कहा कि,''बैंक मुसीबत में हैं और GDP भी मुसीबत में हैं | बढ़ती महँगाई और बेरोज़गारी से जनता का मनोबल टूट रहा और सामाजिक न्याय प्रतिदिन कुचला जा रहा है।
राहुल गांधी ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि,''‘बैंक मुसीबत में हैं और GDP भी। महँगाई इतनी ज़्यादा कभी नहीं थी, ना ही बेरोज़गारी। जनता का मनोबल टूट रहा और सामाजिक न्याय प्रतिदिन कुचला जा रहा है। विकास या विनाश?
बता दें कि,'' वहीं भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 24 घंटे में दो बैंकों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उनपर पाबंदी लगा दी है, जिससे बैंक ग्राहक चिंतित हैं। वित्तीय संकट से गुजर रहे निजी क्षेत्र के लक्ष्मी विलास बैंक पर एक महीने तक के लिए पाबंदियां लगाई हैं। जिसके तहत बैंक के खाताधारक अब सिर्फ 25,000 रुपये तक की ही निकासी सकते हैं।''केंद्र सरकार ने मंगलवार को लक्ष्मी विलास बैंक को मोरेटोरियम में रख दिया है|
मोरेटोरियम के आदेश के मुताबिक, लक्ष्मी विलास बैंक आरबीआई की मंजूरी के बिना किसी भी सेविंग्स, करंट या किसी दूसरे जमा अकाउंट में कुल मिलाकर जमाकर्ता को उसके क्रेडिट में 25 हजार से ज्यादा की राशि का भुगतान नहीं करेगा| इस बीच RBI ने सार्वजनिक तौर पर लक्ष्मी विलास बैंक की DBS बैंक (DBIL) के साथ एकीकरण की एक ड्राफ्ट स्कीम पेश की है| सरकार ने डीबीएस इंडिया के साथ लक्ष्मी विलास बैंक के अधिग्रहण की योजना की घोषणा की है।
इसके बाद महाराष्ट्र के जालना जिले में मंता अर्बन कोऑपरेटिव बैंक पर पाबंदी लगाई गई, जो 17 नवंबर 2020 से छह महीने तक प्रभावी होगी। आइए जानते हैं इससे बैंकों और ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा।
आरबीआई ने महाराष्ट्र के जालना जिले में मंता अर्बन कोआपरेटिव बैंक पर धन के भुगतान और कर्ज के लेन देन को लेकर छह माह के लिए पाबंदी लगा दी है।इन निर्देशों के अनुसार, यह बैंक आरबीआई की अनुमति के बिना कोई कर्ज या उधार नहीं दे सकेगा और न ही पुराने कर्जों का नवीनीकरण तथा कोई निवेश कर सकेगा। बैंक पर नई जमा राशि स्वीकार करने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। वह कोई भुगतान भी नहीं कर सकेगा और ना ही भुगतान करने का कोई समझौता कर सकेगा।
रिजर्व बैंक ने लक्ष्मी विलास बैंक के निदेशक मंडल को भी हटा दिया है और केनरा बैंक के पूर्व गैर-कार्यकारी चेयरमैन टीएन मनोहरन को 30 दिनों के लिए उसका प्रशासक नियुक्त किया है। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इसलिए बैकिंग नियमन अधिनियम 1949 की धारा 45 के तहत केंद्र सरकार ने निजी क्षेत्र के बैंक पर पाबंदी लगाई है।