नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है| राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि अपने मित्रों के लिए PM दौलत की ताकत बनाते जा रहे हैं और जनता को टैक्स और बेरोज़गारी से कमज़ोर करते जा रहे हैं| क्या WEF में इन आंकड़ों की चर्चा भी होगी? होनी चाहिए| इससे पहले राहुल गांधी ने बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधा था| कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट कर लिखा,''अपने मित्रों के लिए PM दौलत की ताक़त बनाते जा रहे हैं और जनता को टैक्स व बेरोज़गारी से कमज़ोर करते जा रहे हैं। क्या WEF (World Economic Forum) में इन आँकड़ों की चर्चा भी होगी? होनी चाहिए!
दरअसल विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन आयोजित होने जा रहे दावोस एजेंडा शिखर सम्मेलन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले दिन संबोधित करेंगे| पांच दिवसीय यह शिखर सम्मेलन 17 जनवरी से आरंभ हो रहा है, जिसमें अन्य वैश्विक नेता भी 2022 के लिए विश्व को लेकर अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे|
बता दें कि,''ऑक्सफैम (Oxfam Report) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के दौरान लोगों की इनकम का गैप बढ़ा जिससे भारत में 84 प्रतिशत परिवारों की आय में 2021 में गिरावट आई, लेकिन साथ ही साथ भारतीय अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई|
ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में पिछले साल गरीबों की संख्या दोगुनी हो गई है, जबकि देश में 40 नए अरबपति बने हैं। इस बीच भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में दुनिया के कई देशों से आगे निकल चुका है। देश के अरबपतियों में गौतम अडाणी की संपत्ति में पिछले साल जोरदार इजाफा दर्ज किया गया।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दावोस एजेंडा से पहले रविवार को जारी ऑक्सफैम की रिपोर्ट, "इनइक्वलिटी किल्स", में ये भी कहा गया है कि जैसे-जैसे कोविड का प्रसार भारत में हुआ, देश के स्वास्थ्य बजट में 2020-21 के संशोधित अनुमान से 10% की गिरावट देखी गई|
ऑक्सफैम की रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा के लिए आवंटन में 6% की कटौती की गई, जबकि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन कुल केंद्रीय बजट के 1.5% से घटकर 0.6% हो गया| इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2021 में, भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की सामूहिक संपत्ति 57.3 लाख करोड़ रुपये (775 बिलियन अमरीकी डालर) के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई| जबकि इसी साल, राष्ट्रीय संपत्ति में नीचे की 50 प्रतिशत आबादी का हिस्सा मात्र 6 प्रतिशत था|
दुनिया के
कई देशों से आगे निकला भारत
बिलियनेयर्स इंडेक्स पर अगर नजर डालें तो दुनिया के 500 सबसे ज्यादा अमीर लोगों ने पिछले साल अपनी नेट वर्थ में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की है। ऑक्सफैम ने कहा कि भारत, जहां शहरी बेरोजगारी पिछले मई में 15 फीसदी तक बढ़ गई थी और खाद्य असुरक्षा खराब हो गई थी, अब फ्रांस, स्वीडन और स्विटजरलैंड की तुलना में अधिक अरबपति वाला देश बन चुका है।
अरबपतियों की संपत्ति में दोगुना इजाफा
रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी से दुनिया परेशान है और अब ओमिक्रॉन वैरिएंट ने फिर से चिंता के बादल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि कोरोना काल में एक ओर जहां गरीबों के सामने खाने का संकट पैदा हो गया है, लेकिन वहीं अमीर लोगों की संपत्ति में जोरदार इजाफा हुआ है। कोरोना काल में भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति दोगुनी हो गई।
अमीरों की संख्या में 39% की तेजी
ऑक्सफैम के मुताबिक, देश में अरबपतियों की संख्या में 39 फीसदी की दर से तेजी आई है और 40 नए अरबपति बने। इस बढ़ोतरी के साथ वर्तमान में देश के अरबपतियों की कुल संख्या 142 हो गई है। ऑक्सफैम ने सोमवार को प्रकाशित बढ़ती असमानता पर एक रिपोर्ट में कहा कि देश के अरबपतियों के पास संयुक्त संपत्ति लगभग 720 अरब डॉलर (करीब 53 लाख करोड़ रुपये) है, जो कि देश की सबसे गरीब 40 फीसदी आबादी से अधिक है।
गौतम अडाणी की संपत्ति में जोरदार इजाफा
रिपोर्ट के अनुसार, अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी की संपत्ति में पिछले साल सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला है। अडाणी के पास पिछले साल भारत में सबसे ज्यादा संपत्ति थी और वैश्विक स्तर पर उन्होंने अपनी संपत्ति में दुनिया में पांचवीं सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की थी। गौतम अडाणी की संपत्ति में 42.7 अरब डॉलर जुड़े, इसके साथ ही उनकी संपत्ति अब 90 अरब डॉलर है। 2021 में मुकेश अंबानी की कुल संपत्ति 13.3 बिलियन डॉलर चढ़ गई और अब उनका मूल्य 97 बिलियन डॉलर हो गया है।
मोदी सरकार ने महामारी के समय अपने ‘मित्र’ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया: कांग्रेस
कांग्रेस ने भी देश में अरबपतियों की संपत्ति बढ़ने संबंधी एक रिपोर्ट को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार ने महामारी के समय अपने ‘मित्र’ पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया और आम लोगों को कोई राहत नहीं दी। प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि,''अगर मैं हिंदी में कहूं तो मोदी जी की आर्थिक नीति को तीन लाइनों में लिख सकता हूं। पहला – अमीरों का विकास। दूसरा - गरीबों का नहीं दिया साथ और तीसरा - अब मोदी सरकार के जुमलों पर देश को नहीं है विश्वास।
कांग्रेस प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि,''जो कल ऑक्सफैम की रिपोर्ट आई, जिससे कि देश में इंकम इनइक्वेलिटी का एक आंकड़ा देश के समक्ष आया। बहुत चौंकाने वाला आंकड़ा है। क्या कहता है वो आंकड़ा कि देश में बिलेनियर्स, खरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई है। लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि है खरबपतियों की संख्या में, पर 2021 में 84 प्रतिशत भारतीयों की आय घटी है। ये मोदीनॉमिक्स है। मतलब एक तरफ तो खरबपति की संख्या 40 प्रतिशत से बढ़ रही है और दूसरी और अगर हम कहें तो हम ये पाएंगे कि जो 84 प्रतिशत जो हाउस होल्ड हैं, उनकी आय में 2021 में कमी आ गई है। ये मोदीनॉमिक्स का सफरनामा है। Richest 98 इंडियन जो देश के सबसे अमीर 98, जो खरबपति हैं, उनकी आय देश के 55.20 करोड़ लोगों के बराबर है। मतलब अगर हम 98 लोगों की आय जो सबसे अमीर हैं, उनकी आय, उनकी वेल्थ जो देश में 55.2 करोड़ अर्थात् 40 प्रतिशत जनसंख्या की जो वेल्थ है, वो जो टॉप 98 लोगों की वेल्थ के बराबर है। मोदी जी खामोश हैं। मोदी जी के वित्त मंत्री जी को इसके बारे में पता भी नहीं होगा, शायद उन्होंने पढ़ा भी नहीं होगा इसके बारे में।
उन्होंने कहा,''इस ऑक्सफैम की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि जो देश फर्स्ट और सेकंड वेव का सामना कर रहा था कोरोना में, जब देश में फर्स्ट और सेकंड वेव अपने चरम पर थी, उस दौरान खरबपतियों की आय और खरबपतियों की संख्या बढ़ रही थी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि,''मैं आपको आंकड़ा देना चाहता हूं कि जो खरबपतियों की कुल संपत्ति मार्च, 2020 में थी, 23.14 लाख करोड़, मतलब लगभग 23 लाख करोड़। वो बढ़कर 2021 में हो जाती है, 53.16 लाख करोड़। अर्थात् जो मार्च, 2020 से लेकर नवंबर, 2021 के बीच खरबपतियों की वेल्थ में इजाफा होता है 30 लाख करोड़ का और ध्यान रहे साथियों, देश का जो एनुअल बजट आया था 2021-22 का, वो था 34.8 लाख करोड़ का अर्थात् जो एनुअल बजट था देश का, उसकी लगभग 86 प्रतिशत of annual budget size में एक साल में खरबपतियों की वेल्थ में वृद्धि हो जाती है और हम यहाँ पर बोल रहे हैं कि हमारी 'वी' शेप रिक्वरी हो गई। ये 'वी' शेप रिक्वरी नहीं है, इसको कहते हैं 'के' शेप रिक्वरी, जिसमें 86 प्रतिशत हिंदुस्तानियों की आय घट रही है, मात्र कुछ खरबपतियों की आय बढ़ रही है और वो कौन हैं, उनका ब्यौरा भी मैं लेकर आया हूं और ये ऑक्सफैम रिपोर्ट आगे कहती है कि ऐसा क्यों हुआ, ऐसा क्या हुआ कि देश में 84 प्रतिशत लोगों की आय तो घटी और मात्र कुछ खरबपतियों की आय बढ़ी।
उन्होंने कहा,' पिछले साल 2021 में 4 करोड़ 60 लाख इंडियन एक्सट्रीम पॉवर्टी में चले गए। हमने 2003 से लेकर 2014 तक मनरेगा से लोगों को गरीबी से बाहर निकाला, करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के आधार पर लगभग 14 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और यहाँ पर एक साल में मोदी सरकार ने अपनी गलत नीतियों के कारण, अपनी ऐसी नीति जो अमीर लोगों को ज्यादा फेवर करती है, मध्यम आय वर्गीय लोगों को और निम्न आय वर्गीय लोगों को कोई फायदा नहीं देती, ऐसी नीतियों के कारण 4 करोड़ 60 लाख हिंदुस्तानियों को गरीबी में झोंक दिया।