नई दिल्ली: वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने PM मोदी पर निशाना साधा है| नये वन संरक्षण नियम (Forest Conservation Act 2022) को लेकर मोदी सरकार पर हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि,''मोदी-मित्र' सरकार की दोस्ती अपने चरम पर पहुंच चुकी है।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा,''मोदी-मित्र' सरकार की दोस्ती अपने चरम पर पहुंच चुकी है। वन भूमि को 'आसानी से छीनने' के लिए, भाजपा सरकार यूपीए के वन अधिकार अधिनियम, 2006 पर प्रहार करते हुए नए FC नियम 2022 लेकर आई है।
राहुल गांधी ने कहा,'जल, जंगल और ज़मीन की रक्षा की लड़ाई में कांग्रेस पार्टी हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों के साथ मजबूती से खड़ी है।
मोदी सरकार के आदिवासियों और जंगल में रहने वालों की सहमति के बिना जंगलों को काटने की मंजूरी' देने फैसले पर कांग्रेस ने भी हमला बोला है|नए वन संरक्षण अधिनियम को लेकर एक खबर का हवाला देते हुए कहा कांग्रेस महासचिव और सांसद जयराम रमेश ने कहा, ‘‘यदि आदिवासियों के हितों की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार की सच्ची नियत को कुछ दर्शाता है, तो ये निर्णय है, जो वन क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों आदिवासियों और अन्य लोगों को असहाय कर देगा|
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खबर के मुताबिक, सरकार ने निजी कंपनियों को जंगल में रहने वालों की पहले से स्वीकृति लिए बिना वनों की कटाई कर सकने वाले नए नियम बनाए हैं| 28 जून को केंद्र सरकार के वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वन संरक्षण नियम 2022 को नोटिफाई किया, जो केंद्र सरकार की, आदिवासियों के उनके पारम्परिक जंगलों पर अधिकारों को सुनिश्चित करने और वनों को काटने से पहले उनकी रजामंदी की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर डाल देंगे|
नए नियम केंद्र सरकार को जंगल में रहने वालों की स्वीकृति लिए बिना ही उसे काट देने की मंजूरी देने का अधिकार देते हैं| जो संबंधित राज्य सरकार को आदिवासियों और अन्य वन क्षेत्र के निवासियों से मंजूरी सुनिश्चित करने के लिए मजबूर कर देगा|
पुराने कानून के मुताबिक, पहले केंद्र सरकार की यह जिम्मेदारी होती थी कि वह वन को काटने से पहले, वहां के निवासियों की रजामंदी और वन्य भूमि पर उनके अधिकार उसे काटने से पहले सुनिश्चित करे| लेकिन अब, सरकार वन्य भूमि का हस्तांतरण और उसकी एवज में वनरोपण की रकम निजी डेवलपर से पहले ही ले सकती है भले ही राज्य सरकार ने वनवासियों के अधिकार सुनश्चित करके उनकी रजामंदी न ली हो|