नई दिल्ली: परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के 5वें संस्करण के दौरान तालकटोरा स्टेडियम में 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों से बात करते हुए प्रधानमंत्री कहा कि,'दिन भर में कुछ पल ऐसे निकालिए, जब आप ऑनलाइन भी नहीं होंगे, ऑफलाइन भी नहीं होंगे बल्कि इनरलाइन होंगे। जितना अपने अंदर जाएंगे, आप अपनी ऊर्जा को अनुभव करेंगे| प्रधानमंत्री कहा कि,' ऑनलाइन पाने के लिए है और ऑफलाइन बनने के लिए है। मुझे कितना ज्ञान अर्जित करना है मैं अपने मोबाइल फोन पर ले आऊंगा, जो मैंने वहां पाया है ऑफलाइन में मैं उसे पनपने का अवसर दूंगा। ऑनलाइन का अपना आधार मजबूत करने के लिए उपयोग करें और ऑफलाइन में जाकर उसे साकार करना है|
प्रधानमंत्री कहा कि,''दोष ऑनलाइन या ऑफलाइन का नहीं, असली मसला मन का है। समय बदलता है तो माध्यम भी बदलता है। माध्यम समस्या नहीं है, ये मन समस्या है। अगर मन जुड़ा है तो ऑनलाइन या ऑफलाइन में कोई फर्क नहीं पड़ता|
प्रधानमंत्री कहा कि,'शिक्षा का एक हिस्सा है ज्ञान अर्जन करना। दुनिया के किसी भी छोड़ का ज्ञान हम ऑनलाइन ले सकते हैं जबकि ऑफलाइन, ऑनलाइन मिले ज्ञान को पनपने का अवसर दे सकते हैं| खेलना खिलने के लिए बहुत अनिवार्य होता है, जो आपको खुलने का अवसर देता है|
PM ने कहा,''''हम जितनी बारीकी से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को समझेंगे और जमीन पर उसको उतारेंगे तो इसके कई फायदे आपके सामने होंगे|जब हम बच्चे की शक्ति व सीमाएं, रुचि और प्रगति, अपेक्षा व आकांक्षाओं को जानने का प्रयास नहीं करते तो बच्चों पर अनजाने में बोझ बढ़ाते हैं|
उन्होंने कहा,''परीक्षा जीवन का एक सहज हिस्सा है। हमारी विकास यात्रा का एक छोटा पड़ाव है। आप पहले कई एग्जाम दे चुकें हैं, अपने इस अनुभव को छोटा न समझें। अपने आत्मविश्वास को कमजोर न होने दें| प्रेशर के बीच हमें उन चीजों को स्वीकार करना है जो हममें सहज भाव से उपलब्ध है। उस पर जी-जान से जुट जाइये तो कोई बोझ महसूस नहीं होगा|
PM ने कहा,'' कभी-कभी कुछ चीजों को ऑबजर्व करने से भी बहुत प्रेरणा मिलती है। कोई चीज मुश्किल होने पर भी अपनी कोशिशें न छोड़ें। अपनी कमियों को शक्ति बनाएं| कभी-कभी आप खुद की भी एग्जाम लें। अपनी तैयारियों पर मंथन करें। रीप्ले करने की आदत बनाएं, इससे आपको नई दृष्टि मिलेगी| अनुभव को आत्मसात करने वाले रीप्ले बड़ी आसानी से कर लेते हैं। जब आप खुले मन से चीजों से जुड़ेंगे तो कभी भी निराशा आपके दरवाजे को दस्तक नहीं दे सकती है|
उन्होंने कहा,''अगर किसी पल को आप जी भर के जीते हैं तो वह आपकी शक्ति बन जाता है। जो इस वर्तमान को जी पाता है उसके लिए भविष्य का कोई सवाल नहीं होता है| मेमोरी का जीवन से संबंध होता है। मेमोरी जीवन के विस्तार का बहुत बड़ा प्रेरक एजेंट है। इसलिए हम अपनी स्मृति को परीक्षा तक सीमित न करें, उसका जितना विस्तार करेंगे तो चीजें उतनी अपने-आप जुड़ती जाएंगी| हमें हमेशा जागृत रूप से प्रयास करना चाहिए कि क्या मैं जो समय लगा रहा हूँ, उसका मुझे आउटकम मिलता है कि नहीं। ध्यान दें कि जितना समय इन्वेस्ट किया, उतना परिणाम मिला कि नहीं|