द्रौपदी मुर्मू देश की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं| वे इस सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचने वाली देश की पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। गुरुवार को हुई काउंटिंग में नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की प्रत्याशी द्रौपदी ने यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को तीसरे राउंड की गिनती में ही हरा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुर्मू के घर पहुंचकर उन्हें बधाई दी।
द्रौपदी मुर्मू को भारत की राष्ट्रपति चुने जाने पर यशवंत सिन्हा ने उन्हें जीत पर बधाई दी और कहा कि मुझे उम्मीद है वो बिना किसी डर या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में काम करेंगी|
यशवंत सिन्हा ने कहा ,इस चुनाव में मुझे सर्वसम्मति से अपना उम्मीदवार चुनने के लिए मैं विपक्षी दलों के नेताओं का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मैं उन सभी सदस्यों को भी धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे वोट दिया।
उन्होंने कहा,,"मैंने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जो मुद्दे उठाए थे, वे प्रासंगिक हैं। परिणाम चाहे जो भी रहे हों, मेरा मानना है कि इस चुनाव से भारतीय लोकतंत्र को दो फायदे हुए हैं। पहला, अधिकांश विपक्षी दल एक मंच पर आए। ये वास्तव में समय की मांग है। मैं विपक्ष के नेताओं से अपील करता हूं कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद भी न सिर्फ एकता बनाए रखें बल्कि इसे और मजबूत करें। उपराष्ट्रपति के चुनाव में ये स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए।
यशवंत सिन्हा ने कहा,"दूसरा, अपने चुनाव अभियान के दौरान, मैंने देश और आम लोगों के समक्ष प्रमुख मुद्दों पर विपक्षी दलों के विचारों, चिंताओं और प्रतिबद्धताओं को स्पष्टता से रखने का प्रयास किया। विशेष रूप से, विपक्षी दलों और उनके नेताओं के खिलाफ ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग और यहां तक कि राज्यपाल कार्यालयों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर गहरी चिंता जताई।
इन ऐजेंसियों का दुरुपयोग दलबदल करवाने और विपक्षी दलों द्वारा चलाई जा रही राज्य सरकारों को गिराने के लिए भी किया जा रहा है। भारत के लोगों ने ऐसा राजनीतिक भ्रष्टाचार कभी नहीं देखा था। ध्रुवीकरण की जहरीली राजनीति भारत में लोकतंत्र और सांप्रदायिक सदभाव के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। मुझे खुशी है कि जिन राज्यों का मैंने दौरा किया वहां के मुख्यमंत्रियों, नेताओं, सांसदों और विपक्षी दलों के विधायकों के बीच मेरे विचारों को जोरदार समर्थन मिला। आम लोगों ने भी मेरे विचारों का समर्थन किया।