नई दिल्ली: बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू देश की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं| उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हरा दिया है| द्रौपदी मुर्मू को भारत की राष्ट्रपति चुने जाने पर यशवंत सिन्हा ने उन्हें जीत पर बधाई दी और कहा कि मुझे उम्मीद है वो बिना किसी डर या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में काम करेंगी|
विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने कहा ,''21 जुलाई 2022 मैं राष्ट्रपति चुनाव 2022 में द्रौपदी मुर्मू जी की जीत पर उन्हें दिल से बधाई देता हूं। मैं उम्मीद करता हूं - वास्तव में, भारत के लोग उम्मीद करते हैं - कि भारत के 15वें राष्ट्रपति के रूप में वह बिना किसी डर या पक्षपात के संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करें। मैं देशवासियों के साथ उन्हें शुभकामनाएं देता हूं।
यशवंत सिन्हा ने कहा ,इस चुनाव में मुझे सर्वसम्मति से अपना उम्मीदवार चुनने के लिए मैं विपक्षी दलों के नेताओं का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मैं उन सभी सदस्यों को भी धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे वोट दिया।
मैंने विपक्षी दलों के प्रस्ताव को भगवद गीता में भगवान कृष्ण द्वारा दिए गए कर्म योग के दर्शन की तरह स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने कहा था - "फल की अपेक्षा किए बिना अपने कर्तव्य का निर्वहन करो।" मैंने निष्ठापूर्वक अपने देश के प्रति ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया है। मैंने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जो मुद्दे उठाए थे, वे प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कहा,,परिणाम चाहे जो भी रहे हों, मेरा मानना है कि इस चुनाव से भारतीय लोकतंत्र को दो फायदे हुए हैं। पहला, अधिकांश विपक्षी दल एक मंच पर आए। ये वास्तव में समय की मांग है। मैं विपक्ष के नेताओं से अपील करता हूं कि राष्ट्रपति चुनाव के बाद भी न सिर्फ एकता बनाए रखें बल्कि इसे और मजबूत करें। उपराष्ट्रपति के चुनाव में ये स्पष्ट रूप से दिखना चाहिए।
यशवंत सिन्हा ने कहा,"दूसरा, अपने चुनाव अभियान के दौरान, मैंने देश और आम लोगों के समक्ष प्रमुख मुद्दों पर विपक्षी दलों के विचारों, चिंताओं और प्रतिबद्धताओं को स्पष्टता से रखने का प्रयास किया। विशेष रूप से, विपक्षी दलों और उनके नेताओं के खिलाफ ईडी, सीबीआई, आयकर विभाग और यहां तक कि राज्यपाल कार्यालयों को हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर गहरी चिंता जताई।
उन्होंने कहा,,"इन ऐजेंसियों का दुरुपयोग दलबदल करवाने और विपक्षी दलों द्वारा चलाई जा रही राज्य सरकारों को गिराने के लिए भी किया जा रहा है। भारत के लोगों ने ऐसा राजनीतिक भ्रष्टाचार कभी नहीं देखा था। ध्रुवीकरण की जहरीली राजनीति भारत में लोकतंत्र और सांप्रदायिक सदभाव के लिए एक गंभीर खतरा बन गई है। मुझे खुशी है कि जिन राज्यों का मैंने दौरा किया वहां के मुख्यमंत्रियों, नेताओं, सांसदों और विपक्षी दलों के विधायकों के बीच मेरे विचारों को जोरदार समर्थन मिला। आम लोगों ने भी मेरे विचारों का समर्थन किया।
सिन्हा ने कहा,"अंत में मैं एक प्रतिज्ञा लेता हूं। मैं आखरी सांस तक, उस उद्देश्य के लिए काम करना जारी रखूगा जिस पर मुझे विश्वास है- जिसने मुझे गणतंत्र के सर्वोच्च पद हेतु चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया।
द्रौपदी मुर्मू को मिले 2824 वोट, यशवंत सिन्हा को 1877 वोट
गौरतलब है,''बीजेपी के नेतृत्व वाली NDA की प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में विजयी घोषित किया गया। राष्ट्रपति चुनाव 2022 में द्रौपदी मुर्मू को 2824 वोट मिले जबकि यशवंत सिन्हा को 1877 वोट मिले हैं | द्रौपदी मुर्मू को 2824 वोट मिले जिनका मूल्य 6,76,803 था और यशवंत सिन्हा को 1877 वोट मिले, जिनका मूल्य 3,80,177 था|