लखनऊ: लखीमपुर खीरी कांड की जांच कर रहे उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष जांच दल (SIT) ने कोर्ट में 5,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है| तिकुनिया कांड मामले में जांच टीम ने सोमवार को एक स्थानीय अदालत में पांच हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। जिसमें 208 गवाहों और 14 आरोपियों के नाम हैं। इन आरोपियों में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का एक रिश्तेदार भी शामिल है। मामले का मुख्य आरोपी आशीष मिश्र है। तीन अक्तूबर को लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया कस्बे में हुई हिंसा में चार किसानों और एक पत्रकार सहित आठ लोगों की जान गई थी। लखीमपुर खीरी हिंसा के आज 90 दिन पूरे हो चुके हैं।
इसमें दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था। मामले की जांच उत्तर प्रदेश SIT कर रही है। मामले में SIT ने 14 लोगों को आरोपी बताया गया था। उधर, भाजपा नेता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में अब तक सात आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। लखीमपुर खीरी कांड में मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा मोनू समेत 13 लोग न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। आशीष मिश्रा की जमानत याचिका पर 6 जनवरी को सुनवाई होनी है।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में एसआईटी ने 14 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की| इसमें केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के रिश्तेदार वीरेंद्र कुमार शुक्ला का नाम जोड़ा गया है। वीरेंद्र कुमार शुक्ला पर साक्ष्य मिटाने की धारा 201 के तहत आरोप दायर किए गए हैं। शुक्ला ब्लॉक प्रमुख है। घटना के दिन काफिले में वीरेंद्र शुक्ल की स्कॉर्पियो गाड़ी थी। जोकि संपूर्णानगर से पुलिस ने बरामद की थी।
अभियोजन पक्ष के वकील का कहना है, "एक और व्यक्ति वीरेंद्र शुक्ला का नाम आरोप पत्र में जोड़ा गया है। उस पर आईपीसी की धारा 201 के तहत आरोप लगाया गया है।"तिकोनिया हिंसा मामले में किसानों के अधिवक्ता अमान ने बताया कि एफआईआर में 201 धारा की बढ़ोतरी की गई है। साथ ही वीरेंद्र कुमार शुक्ला के नाम को जोड़ा गया है। मंत्री का भी नाम जोड़ने की प्रार्थना की गई, लेकिन उनका नाम नहीं जोड़ा गया है।
10 अक्तूबर को हुई थी आशीष मिश्र की गिरफ्तारी
तिकुनिया कांड में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र का बेटा आशीष मिश्र मोनू समेत 13 आरोपी जिला कारागार में बंद हैं। आशीष मिश्र की गिरफ्तारी 10 अक्तूबर को हुई थी|
हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई थी
लखीमपुर में 3 अक्टूबर को हुई घटना में चार किसानों, एक स्थानीय पत्रकार समेत आठ लोगों की हत्या हुई थी। आशीष मिश्रा ने अपनी एसयूवी से चार किसानों और एक पत्रकार को रौंद कर मार डाला था| जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। 4 अक्टूबर को तिकुनिया थाने में आशीष मिश्रा समेत कई अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। बाद में SIT की जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि ये एक हादसा नहीं, बल्कि सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिया गया हत्याकांड है।
'पूर्व नियोजित साजिश' थी: 'सोची समझी साजिश' के तहत किसानों को गाड़ी से कुचला गया था
Lakhimpur Violence As Murder Case : इससे पहले, 14 दिसंबर, 2021 को लखीमपुर खीरी के मामले में जांच कर रही एसआईटी की टीम ने बड़ा खुलासा किया था| लखीमपुर खीरी मामले में किसानों पर गाड़ी चढ़ाना एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी| स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (SIT) ने यह बात कही थी| लखीमपुर हिंसा को SIT ने सोची समझी साजिश बताया था।
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच कर रही टीम ने कहा था कि यह घटना एक "पूर्व नियोजित साजिश" थी, जिसमें 5 लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए। जांच अधिकारी ने आरोपियों के खिलाफ धाराएं बढ़ाने के लिए सीज??एम कोर्ट में अर्जी दी थी।
लखीमपुर SIT ने हत्या कांड के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा और बाकी साथियों पर IPC की धाराओं 279,338,304A को हटाकर 307, 326, 34 जैसी सख़्त धाराएँ लगाने के लिए कोर्ट में ऐप्लिकेशन डाली थी। SIT ने कहा था कि लखीमपुर नरसंहार जानबूझकर प्लानिंग करके किया गया था।