सार
लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों तथा सभी प्रत्याशियों के साथ समीक्षा बैठक की हैं।उत्तर प्रदेश के हालिया विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। बसपा की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने रविवार को इस मामले में एक गंभीर समीक्षा बैठक की, जिसमें कई अहम फैसले लि| बसपा की चुनावी हार पर समीक्षा बैठक में बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपी विधानसभा आमचुनाव में बी.एस.पी. की अपेक्षा के अनुरूप नतीजे नहीं आने पर यहाँ पार्टी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में आगे की रणनीति को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिये|
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा, मुस्लिम समाज का एकतरफा वोट लेकर तथा दर्जन भर संगठनों/पार्टियों से गठबन्धन करके चुनाव लड़ने के बावजूद भी सपा सत्ता में आने से काफी दूर रह गई है। ऐसे में अब सपा कभी भी आगे यहाँ सत्ता में वापिस नहीं आ सकती है तथा ना ही यह पार्टी बीजेपी को सत्ता में आने से रोक सकती है। हालाँकि अब हमेशा की तरह मुस्लिम समाज के लोग सपा को वोट देकर काफी ज्यादा पछता रहे हैं और इनकी इसी कमजोरी का सपा यहाँ यूपी में बार-बार फायदा भी उठा रही है जिसे रोकने के लिए अब हमें इन भटके व दिशाहीन हुये लोगों से कतई भी मुँह नहीं मोड़ना है बल्कि इनको सपा के शिकंजे से बाहर निकाल कर अपनी पार्टी में पुनः वापिस लाने का भी पूरा-पूरा प्रयास करना है। अन्य सभी हिन्दू समाज को भी अब फिर से बी.एस.पी. में सन् 2007 की तरह ही कैडर के जरिये जोड़ना है।
उन्होंने कहा,'दलितों में भी मेरी जाति को छोड़कर जो अन्य दलित समाज की जातियों के लोग हैं उन्हें भी इन पार्टियों के हिन्दुत्व से बाहर निकाल कर बी.एस.पी. में ही जोड़ना है। बीजेपी ने इस चुनाव में एक सोची-समझी रणनीति व साजिश के तहत् अपने आरएसएस (RSS) संगठन के जरिये हमारे लोगों में यह काफी गलत प्रचार करवाया है कि यूपी में बी.एस.पी. की सरकार नहीं बनने पर हम आपकी बहनजी को देश का राष्ट्रपति बनवा देंगे। इसीलिए आपको बीजेपी को सत्ता में आने देना चाहिये, जबकि मेरे लिए देश का राष्ट्रपति बनना तो बहुत दूर की बात है बल्कि इस बारे में मैं सपने तक में भी ऐसा कुछ सोच भी नहीं सकती हूँ।
मायावती ने कहा,''हालाँकि इनको यह भी मालूम है कि बहुत पहले ही मान्यवर श्री कांशीराम जी ने इनका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था और मैं तो उनके पदचिन्हों पर चलने वाली उनकी मजबूत शिष्या हूँ। जब-जब भी यूपी के मुस्लिम समाज ने सपा को एकतरफा वोट दिया है तथा जोड़ तोड़ के आधार पर जब भी सपा सत्ता में आई है तब-तब यहाँ बीजेपी और भी ज्यादा मजबूत बनकर उभरी है, लेकिन बी.एस.पी. जब यहाँ चुनाव में मजबूत होकर उभरी है तथा चार बार सरकार बनाई है तब-तब यहाँ बीजेपी काफी कमजोर हई है तथा सत्ता से भी बाहर हुई है और यह सब होते हुये यहाँ मुस्लिम समाज ने भी देखा है। अब आगे इनको ऐसी कोई गलती नहीं करनी चाहिये जिससे बीजेपी को और भी ज्यादा मजबूती मिले। ऐसी मैं उनसे पूरजोर अपील भी करती हूँ।
मायावती ने कहा,'' यूपी में अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाने के लिए यहाँ कदम-कदम पर सभी जातिवादी, पूँजीवादी व सामन्तवादी ताकतों से काफी कड़ा संघर्ष व सामना करना होगा और इसके लिए अब मैंने भी यह सोचकर फिर से अपनी कमर कस ली है। अब मेरा जीवन ही संघर्ष है और संघर्ष ही मेरा जीवन है अर्थात् अब मेरी जिन्दगी का एक-एक पल पूरे देश में अपनी पार्टी को हर स्तर पर मजबूत बनाने पर ही लगेगा। लोगों के हताश व निराश होने से यहाँ अपनी पार्टी का मूवमेन्ट व जनाधार आगे नही बढ़ सकता है तथा ना ही हमारी पार्टी यहाँ आगे सत्ता में भी आ सकती है बल्कि इसके लिए आप लोगों को अपने पूरे हिम्मत व हौसले से तथा पूरी जिद्द के साथ ही अपनी पार्टी की मूवमेन्ट को तथा जनाधार को भी आगे बढ़ाना है।
विस्तार
बसपा की हार के लिए सपा और मुस्लिम समाज ही पूरे तौर से जिम्मेवार व कसूरवार भी है
समीक्षा बैठक में मायावती ने कहा,'''यू.पी. के बी.एस.पी. के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधिगण, आज आपकी यह अति-महत्वपूर्ण व अति-जरूरी बैठक खासकर यूपी विधान सभा आमचुनाव में बी.एस.पी. की अपेक्षा के मुताबिक नतीजे नहीं आने को लेकर इसके सही तथ्य सामने रखने तथा ऐसे हालात में भी फिर से अपनी पार्टी को मजबूत बनाने हेतु जरूरी दिशा-निर्देश देने के लिए बुलाई गयी है। हालाँकि इस बार यू.पी. विधानसभा आमचुनाव के नतीजे बी.एस.पी. की अपेक्षा के अनुरूप नहीं थ ही इतने ज्यादा खराब नतीजे आये हैं जिसकी किसी को भी ऐसी कोई उम्मीद नहीं थी और अब इन नतीजो की काफी छानबीन करने के बाद केवल एक ही बात ज्यादातर हमारे सामने उभरकर यह आ रही है कि इस चुनाव में जब बी.एस.पी. से भी जुड़ा मुस्लिम समाज का वोट एकतरफा सपा में जाते दिखा तब फिर यहाँ हिन्दू समाज ने भी बीजेपी सरकार की नीतियों व कार्यशैली से दुःखी होते हुये भी यह सोचकर अपना अधिकांशः वोट बीजेपी को ही दे दिया कि कहीं यहाँ फिर से सपा का गुण्डा, माफिया, आतंकी, हल्ला बोल व भ्रष्ट राज आदि वापिस ना आ जाये, जिसकी खास वजह से सपा तो सत्ता में नहीं आ सकी है| बल्कि बीजेपी ही पुनः यहाँ सत्ता में जरूर वापिस आ गई है और इसका फिर बी.एस.पी, को भी काफी जबरदस्त राजनैतिक नुकसान हुआ है, जिसके लिए यहाँ समाजवादी पार्टी व अधिकांशः मुस्लिम समाज ही पूरे तौर से जिम्मेवार व कसूरवार भी है। जबकि समाजवादी पार्टी ने लगभग एक दर्जन छोटे-मोटे संगठनों व पार्टियों आदि से गठबन्धन करके यह चुनाव लड़ा है, लेकिन इसके बावजूद भी सपा सत्ता में आने से काफी दूर रह गई है। ऐसे में अब सपा कभी भी आगे यहाँ सत्ता में वापिस नहीं आ सकती है तथा ना ही यह पार्टी बीजेपी को सत्ता में आने से रोक सकती है।
बीजेपी को सत्ता में आने से सिर्फ बसपा ही रोक सकती है
मायावती ने कहा,'''और इस मामले में सच्चाई तो यह है कि यू.पी. में सपा नहीं बल्कि बी.एस.पी. ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो बीजेपी को सत्ता में आने से जरूर रोक सकती है जिसका बेस वोट व खासकर मेरी खुद की जाति का दलित वोट ऐसे हालातों में भी बिल्कुल नहीं भटका है तथा ना ही गुमराह हुआ है जिन पर मुझे बहुत ज्यादा नाज (गर्व) भी है और इसके लिए मैं उनकी परे तहेदिल से अति आभारी भी हैं. जिसे मद्देनजर रखते हुये यहाँ मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि यदि इस चुनाव में मुस्लिम समाज का वोट 50 प्रतिशत भी हमारी पार्टी को मिल जाता तो फिर बीजेपी से नाराज चल रहा हिन्दू वोट व उसमें भी खासकर ब्राह्मण समाज का वोट हमें जरूर मिल जाता और तब फिर यहाँ बीजेपी सत्ता से किन दुर्भाग्यपूर्ण ऐसा नहीं हो सका है जिसको लेकर उ.प्र. सहित पूरे देश में हमारी पार्टी के लोग बहुत ज्यादा दुःखी व चिन्तित भी है।
उन्होंने कहा,'''फिर मैने इसके सही कारणों व तथ्यों आदि की काफी बारीकी व गहराई से छानबीन करके इसकी पूरी सच्चाई को फिर 11 मार्च को खुलकर मीडिया के जरिये अपने लोगों के सामने रखा है जिसके बारे में मैंने शुरू में ही काफी कुछ आपको बता दिया है, उसे मैं फिर से यहाँ दोहराना नहीं चाहती हूँ। हालाँकि अब हमेशा की तरह मुस्लिम समाज के लोग भी यहाँ काफी ज्यादा पछता रहे हैं और इनकी इसी कमजोरी का सपा यहाँ यू पी. में बार-बार फायदा भी उठा रही है जिसे रोकने के लिए अब हमे इन भटके व दिशाहीन हुये लोगों से कतई भी मुँह नहीं मोड़ना है बल्कि इनको सपा के शिकंजे से बाहर निकाल कर उन्हें अपनी पार्टी में पुनः वापिस लाने का भी पूरा-पूरा प्रयास करना है इनके साथ-साथ अपरकास्ट समाज व अति पिछड़ा वर्ग भी जो सपा सरकार में खासकर इनके अधिकांशः यादवों, गुण्डों व माफियों आदि के आतंक से काफी ज्यादा भयभीत व डरा हुआ रहता है, तो इन सभी को अब हमें फिर से बी.एस.पी. में सन् 2007 की तरह ही कैडर के जरिये, जोड़ना है जबकि बीजेपी की सरकार में मुसलमानों के साथ-साथ इन वर्गों का भी हर स्तर पर काफी ज्यादा शोषण व उत्पीड़न हुआ है। और अब बीजेपी ने इन वर्गों के लोगों को रोजगार देने की बजाय इन्हें थोड़ा मुफ्त राशन देकर इन्हें अपना गुलाम व लाचार ओर बना दिया है। जिससे भी हमें इनको जरूर बाहर निकालना है।
दलितों को BJP से बाहर निकालकर बीएसपी में ही जोड़ना: मायावती
मायावती ने कहा,'''इन वर्गों के साथ-साथ दलितों में मेरी जाति को छोड़कर जो अन्य दलित जाति के लोग है उन्हें भी इन पार्टियों के हिन्दुत्व से बाहर निकालकर बी.एस.पी. में ही जोड़ना है और आपको यह करना इसलिए भी बहुत जरूरी है क्यों कि बीजेपी व अन्य कोई भी जातिवादी पार्टी यदि किसी भी दलित को सांसद व विधायक या मन्त्री, उपमुख्यमन्त्री एवं राष्ट्रपति आदि भी क्यों ना बना दे तो वह दलित व्यक्ति केवल अपना तो उद्धार व तरक्की आदि जरूर कर सकता है। लेकिन अपने दलित समाज का उद्धार व तरक्की आदि कतई भी नहीं कर सकता है और यदि वह इसके लिए कुछ प्रयास भी करता है तो फिर उसे ये जातिवादी पार्टियाँ अपनी पार्टी व सरकार से निकालकर बाहर कर देती है। ऐसी स्थिति में फिर ऐसे दलितों को केवल उनका गुलाम ही बनकर रहना है जो यह सब यहाँ दलित समाज के उज्जवल भविष्य के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा,'''इसीलिए बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने भी इन सबकी वजह से ही कानूनी मन्त्री पद से इस्तीफा देकर अपने समाज को एकजुट करने का फैसला लिया था। साथ ही, उन्हें अपनी अलग से राजनैतिक पाटी बनाकर केन्द्र व राज्यों की भी सत्ता खुद अपने हाथों में लेने की भी सलाहा दी थी ताकि वे कानूनी अधिकारों का पूरा लाभ ले सकें जिनसे प्रेरित होकर ही फिर मान्यवर श्री कांशीराम जी ने दिनांक 14 अप्रैल सन् 1984 को बी.एस.पी. का गठन करके हमे अपना एक अलग से राजनैतिक प्लेटफार्म दिया है, जिसे अब सभी जातिवादी पार्टियाँ व जातिवादी मीडिया तथा अन्य सभी जातिवादी ताकते भी किस्म-किस्म के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डे इस्तेमाल करके अक्सर हमारी पार्टी को कमजोर करने में ही लगे रहते हैं।
बीजेपी ने सोची-समझी रणनीति के तहत RSS के जरिये के दलितों में गलत प्रचार करवा कर वोट लिया:मायावती
मायावती ने कहा,'''साथ ही, इस चुनाव में यहाँ बी.एस.पी. को कमजोर व खत्म करने के लिए बीजेपी ने भी एक सोची समझी रणनीति व साजिश के तहत् अपने आर.एस.एस. (RSS) संगठन के जरिये इस बात का भी हमारे लोगों के बीच में यह काफी गलत प्रचार करवाया है कि यू.पी. में बी.एस.पी. की सरकार नहीं बनने पर फिर हम आपकी बहनजी को देश का राष्ट्रपति बनवा देंगे। इसीलिए आपको बीजेपी को सत्ता में आने देना चाहिये, जबकि वास्तव में मेरे लिए देश का राष्ट्रपति बनना तो बहुत दूर की बात है बल्कि इस बारे में मैं अपने सपने तक में भी ऐसा बनने को लेकर कुछ सोच भी नहीं सकती हूँ। हालाँकि इनको यह भी मालूम है कि बहुत पहले ही मान्यवर श्री कांशीराम जी ने इनका यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था और मैं तो उनके पदचिन्हों पर चलने वाली उनकी मजबूत शिष्या हूँ। अर्थात् जब इन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया। तो भला फिर मैं यह पद कैसे स्वीकार कर सकती हूँ क्योंकि हमें यह मालूम है कि ऐसा करने से फिर अन्त में हमारी पार्टी ही खत्म हो जायेगी इसलिए आज मैं अपनी पार्टी के सभी छोटे-बड़े पदाधिकारियों को फिर से यह स्पष्ट कर देना चाहती व मूवमेन्ट के हित में कभी भी बीजेपी व अन्य किसी पाटी का भी राष्ट्रपति का पद स्वीकार नहीं कर सकती हूँ और इससे अब पार्टी के लोगों को आगे कभी भी गुमराह नहीं होना है।
उन्होंने कहा,'''इस प्रकार से इनकी ऐसी सभी चुनौतियों व हथकण्ड़ों आदि का भी सामना करके हमे अपनी पाटी में फिर से कैडर के जरिये यहाँ दलितों, अति पिछड़े वगों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से खासकर गरीब, दुःखी व पीड़ित लोगों को भी जोड़ना है। साथ ही, आप लोगों को इस चुनाव के आये नतीजों से तथा उसके खास कारणों व तथ्यों आदि से भी काफी कुछ सबक सीखकर फिर से यहाँ अपनी पार्टी की मूवमेन्ट को व जनाधार को भी काफी आगे बढ़ाना है और इसके लिए खासकर अपने सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों आदि के जीवन संघर्ष से भी काफी कुछ सबक सीखना है।
जब भी मुस्लिम समाज ने सपा को वोट दिया तब-तब बीजेपी और भी ज्यादा मजबूत बनकर उभरी है:मायावती
इसके साथ-साथ, विशेषकर मुस्लिम समाज को भी समाजवादी पार्टी से दूर रखने के लिए उन्हें यह भी एहसास कराना बहुत जरूरी है। यू.पी. का अभी तक का इतिहास यही बताता है कि जब-जब भी यू.पी. के मुस्लिम समाज ने सपा को एकतरफा अपना वोट दिया है तथा जोड़-तोड़ के आधार पर जब भी यह पार्टी सत्ता में आई है तब-तब यहाँ बीजेपी और भी ज्यादा मजबूत बनकर उभरी है। लेकिन वहीं दसरी तरफ जब-जब चनाव में यहाँ बी.एस.पी. मजबत बनकर उभरी है तथा चार बार सत्ता में भी आसीन हुई है तब-तब ऐसी स्थिति में यहाँ बीजेपी काफी कमजोर हुई है तथा सत्ता से भी बाहर हुई है और यह सब होते हुये यहाँ मुस्लिम समाज ने भी देखा है। इसलिए इन सब बातों को भी ध्यान में रखकर अब यहाँ मुस्लिम समाज को आगे ऐसी कोई भी गलती नहीं करनी चाहिये जिससे बीजेपी को और भी ज्यादा मजबूती मिले। ऐसी मैं उनसे पूरजोर अपील भी करती हूँ।इतना ही नहीं बल्कि हमारी पार्टी इनको बार-बार गुमराह होने व भटकने से रोकने के लिए भी हमेशा पूरा-पूरा प्रयास करती रहेगी और वैसे भी आपको यह मालूम है कि किसी परिवार में यदि कोई भी सदस्य अपने रास्ते से भटक जाता है या दिशाहीन हो जाता है तो पि उसे अपने से अलग नहीं करता है बल्कि उसे सही रास्ते पर लाने के लिए हर प्रकार के पूरे-पूरे प्रयास करता है।
मायावती ने कहा,'''इसीलिए मैं खुद भी पार्टी की मुखिया होने के नाते यह पूरी-पूरी कोशिश करूँगी कि यूपी में बी.एस.पी. से जुड़ा अपरकास्ट, पिछड़ा वर्ग व मुस्लिम समाज भी अब आगे किसी भी चुनाव में बीजेपी व सपा आदि के बहकावे में कतई भी ना आये और वे फिर से बी.एस.पी. से जुड़कर यहाँ बीजेपी को सत्ता में आने से भी जरूर रोकेंगे। और अब संक्षेप में मेरा यही कहना है कि इस चुनाव में भटके व दिशाहीन एवं गुमराह हुये मुस्लिम समाज के साथ-साथ अपरकास्ट समाज व अन्य पिछड़े हुये समाज के लोगों को भी आपको फिर से बी.एस.पी. में वापिस लाना है। तथा इनको अपने से कतई भी अलग नहीं करना है, अर्थात् हमारी पार्टी, ऐसे विपरीत हालातों में भी, इन सभी को जोड़ने के लिए अपनी सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की नीतियों पर अभी भी कायम व प्रयास-रत है जिसे मद्देनजर रखते हुये ही आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को चुनाव लड़ाने का फैसला लिया है।
भीम राजभर यूपी के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे: मायावती
उन्होंने कहा,''और अब ऐसे बदले हुये राजनैतिक हालातों को खास ध्यान में रखकर ही हमारी पार्टी ने यहाँ खासकर यूपी, में अपने संगठन के स्वरूप में भी कुछ जरूरी तब्दीली की हैं जिसपर आपको सही से अमल करना है। इसके इलावा यहाँ मैं आप लोगों को यह भी बता देना चाहती हूँ कि यू.पी. स्टेट का बी.एस.पी. का अध्यक्ष नहीं बदला जायेगा अर्थात् श्री भीम राजभर ही यू.पी. स्टेट के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे।
अब प्रत्येक तीन मंडल पर एक ज़ोन होगा
उन्होंने कहा,'''इसके साथ-साथ, वर्तमान राजनैतिक हालातों में अब देश के अन्य राज्यों की तरह यू.पी. स्टेट का भी पार्टी के तीन वरिष्ठ लोगों को यहाँ का स्टेट का प्रभारी यानि की स्टेट कोओर्डिनेटर भी बना दिया गया है जो प्रदेश के सभी 18 मण्डलों में इकट्ठा जाकर मेरे सभी दिशा-निर्देशों का समय से व सही से पूरा पालन करायेंगे जिनकी ये तीनों लोग मिलकर हर महीने मुझे रिपोर्ट भी जरूर देंगे।
यूपी स्टेट के जिन तीन लोगों को यूपी स्टेट का प्रभारी बनाया गया है वे है 1. मुनकाद अली, पूर्व सांसद मेरठ से 2. श्री राजकुमार गौतम, बुलन्दशहर से तथा 3. डा. विजय प्रताप, पूर्व एम.एल.सी. आजमगढ़ से अर्थात् इन तीन लोगों को ही पार्टी यूपी स्टेट का प्रभारी बनाया गया है। इसके इलावा, मुझे यह भी मालूम है कि इस बार चुनाव में हमारी पार्टी के बड़े नेताओं से ज्यादा अच्छी भूमिका विधानसभा कमेटी की रही है जिनकी मैं काफी आभारी भी हूँ।
विकट व विपरीत परिस्थितियों में भी कतई हताश व निराश नहीं होना: मायावती
मायावती ने कहा,'''अब मेरा यही कहना है कि आप लोगों को विकट व विपरीत परिस्थितियों में भी कतई भी हताश व निराश नहीं होना है बल्कि आप लोगों को अपने सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों में भी खासकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर व मान्यवर श्री काशीराम जी आदि के जीवन संघर्ष से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ते ही रहना है तथा आपको कठिन से कठिन दौर से भी बाहर निकलना है और अब आप लोगों को वर्तमान हालात में पार्टी संगठन में नई रणनीति के तहत् चलकर फिर से अपनी पार्टी को यहाँ आगे सत्ता में लाने का पूरा-पूरा प्रयास करना है जिसकी शुरूआत हमें इससे पहले यहाँ शहरी निकाय व लोकसभा आमचुनाव में बेहतरीन नतीजा लाकर करनी है।
मीडिया के चक्कर में अब कतई भी नहीं पड़ना: मायावती
उन्होंने कहा,'''साथ ही मीडिया आदि के चक्कर में तो आपको अब कतई भी नहीं पड़ना है। अफवाहों से भी दूर रहना है। साथ ही आप लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों में जुल्म ज्यादती से पीड़ित अपने लोगों की पूर्व की तरह ही मदद करते रहना है। लेकिन इसके लिए. आपको धरना/प्रदर्शन आदि नहीं करना है।
2007 वाली स्थिति लाने के लिए दिन-रात मेहनत कर सर्वसमाज को बीएसपी में जोड़ना है: मायावती
इन्हीं जरूरी बातों के साथ ही, अब मैं आपसे यही अनुरोध करती हूँ कि आप लोगों को यहाँ य.पी. में अपनी पार्टी की सन 2007 वाली स्थिति लाने के लिए उस समय की तरह ही फिर से आपको दिन-रात मेहनत करके यहाँ सर्वसमाज को कैडर के आधार पर ही बी.एस.पी. में जोड़ना है। इसके लिए मैंने पार्टी की यहाँ वर्तमान राजनैतिक स्थिति को देखकर पार्टी संगठन में जो भी जरूरी तब्दीली की है तो उस पर आपको पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अमल करके फिर से यहाँ अपनी पार्टी को हर स्तर पर मजबूत बनाना है और इस कार्य के लिए अभी से ही आपको परे जी-जान से लग जाना है। इतना ही नहीं बल्कि आपको यह भी मानकर चलना है अब यू.पी. में अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में लाने के लिए यहाँ कदम-कदम पर आपको सभी जातिवादी, पूँजीवादी व सामन्तवादी ताकतों से भी काफी कडा संघर्ष व सामना करना होगा।
....अब मेरा जीवन ही संघर्ष है और संघर्ष ही मेरा जीवन: मायावती
मायावती ने कहा,'''और इसके लिए अब मैंने भी यह सोचकर फिर से अपनी कमर कस ली है। अब मेरा जीवन ही संघर्ष है और संघर्ष ही मेरा जीवन है अर्थात् अब मेरी जिन्दगी का एक-एक पल पूरे देश में अपनी पार्टी को हर स्तर पर मजबूत बनाने पर ही लगेगा। इस कार्य में अब मैं श्री आकाश आनन्द को भी, जिनको मैंने आल इण्डिया का अपनी पार्टी का नेशनल कोओडीनेटर भी बनाया हुआ है। इनको भी कुछ समय के बाद मैं यहाँ यूपी में पार्टी के कार्यों की सही प्रगृति रिपोर्ट लेने के लिए भी बीच-बीच में भेजती रहूँगी जिससे यहाँ अपने नौजवानों में भी पार्टी के प्रति काफी उर्जा पैदा होगी।
और अब मैं अन्त में आज की इस अति महत्वपर्ण व अति जरूरी बैठक में आने के लिए आप सभी का दिल से आभार प्रकट करते हये अपनी बात यहीं समाप्त करूँ. ले से आपसे यही कहना चाहती हूँ कि आप लोगों के हताश व निराश होने से यहाँ अपनी पार्टी का मवमेन्ट व जनाधार आगे नहीं बढ़ सकता है तथा ना ही हमारी पार्टी यहाँ आगे सत्ता में भी आ सकती है बल्कि इसके लिए आप लोगों को अपने परे हिम्मत व हौसले से तथा परी जिद्द के साथ ही अपनी पार्टी की मूवमेन्ट को तथा जनाधार को भी आगे बढ़ाना है तभी फिर अपनी पार्टी को यहाँ आगे सत्ता में लाया जा सकता है। किन्तु इससे पहले आपको यहाँ होने वाले शहरी निकाय चुनाव व लोकसभा उपचुनाव एवं आमचुनाव में भी अपनी पार्टी का बेहतर रिजल्ट लाना होगा। जो यह वर्तमान हालातों में बहुत जरूरी भी है|