भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने बेरोजगारी की परिभाषा बदलते हुए युवाओं को नया नाम देने की योजना बनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब राज्य में बेरोजगार युवाओं को ‘आकांक्षी युवा’ कहा जाएगा। हालांकि, सरकार की ओर से इस फैसले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इस कदम पर राजनीतिक और सामाजिक बहस छिड़ गई है।
बेरोजगारी या अवसर की प्रतीक्षा?
राज्य सरकार का मानना है कि युवा सिर्फ बेरोजगार नहीं हैं, बल्कि वे अच्छे अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसी तर्क के आधार पर अब उन्हें ‘आकांक्षी युवा’ कहा जाएगा।
भोपाल के प्रकाश सेन, जिन्होंने कंप्??ूटर साइंस में बीएससी की डिग्री प्राप्त की, बड़े सपने लेकर निकले थे। उनका लक्ष्य था कि वे गूगल या फेसबुक जैसी टेक कंपनियों में काम करें। लेकिन हकीकत कुछ और निकली—आज वे अपनी चाय की दुकान चला रहे हैं। प्रकाश जैसे हजारों युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद सरकारी या निजी नौकरियों के अभाव में छोटे-मोटे काम करने को मजबूर हैं।
नाम बदलने से बदलेगी स्थिति?
सरकार द्वारा सड़कों, जिलों और योजनाओं के नाम बदलने की नीति अब बेरोजगारी तक पहुंच गई है। इस फैसले को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोगों का कहना है कि नाम बदलने से रोजगार की स्थिति नहीं सुधरेगी और सरकार को नई नौकरियां पैदा करने पर ध्यान देना चाहिए।
युवाओं के सवाल
सरकार के इस कदम पर युवा वर्ग में असमंजस और नाराजगी देखी जा रही है। एक छात्र ने सोशल मीडिया पर लिखा,
"अगर नौकरी न मिलने को आकांक्षा कहा जा रहा है, तो क्या हमें भूख लगने पर यह कहना चाहिए कि हम सिर्फ भोजन के आकांक्षी हैं?"
फिलहाल, मध्य प्रदेश में इस नई परिभाषा पर बहस जारी है और लोग इंतजार कर रहे हैं कि सरकार इस फैसले पर औपचारिक बयान कब देती है।