पटना: राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने आज फिर कोरोना जांच में घोटाला और मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं पर दर्ज गंभीर आपराधिक केस के मामले को लेकर CM नीतीश कुमार पर हमला बोला| बिहार में कोरोना जांच में घोटाले के मामले पर तेजस्वी यादव ने CM नीतीश कुमार का विधानसभा का VIDEO ट्वीट करते लिखा है,'',''हम जमीनी लोग है जनता से सीधा फ़ीडबैक लेते है इसलिए महीनों पूर्व कोरोना घोटाले का अंदेशा होने पर जाँच की माँग रखी थी।CM ने सदन में आश्वस्त भी किया लेकिन आज तक कमेटी नहीं बनाई क्योंकि चुनाव पूर्व अरबों का बंदरबाँट करना था।CM सदन में भी झूठ बोलने से नहीं कतराते? सदन को गुमराह किया?
तेजस्वी यादव ने कहा कि,'अरबों का कोरोना घोटाला सामने आने के बाद नीतीश जी दिखावटी तौर पर जैसा कि पूर्व के 61 घोटालों में करते आए है छोटे स्तर के कर्मचारियों को बर्खास्त करने का नाटक रच, धन उगाही कर JDU को चुनावी चंदा देने वाले उच्च अधिकारियों को बचायेंगे। यही नीतीश कुमार की स्थापित नीति, नीयत और नियम है।
उन्होंने कहा कि,''बिहार में टेस्टिंग की संख्या 4 महीनों तक देश में सबसे कम रही।विपक्ष और जनदबाव में नीतीश जी ने विपदा के बीच ही आँकड़ों की बाज़ीगरी नहीं करने वाले 3 स्वास्थ्य सचिवों को हटा दिया। फिर उन्होंने अपने जाँचे-परखे आँकड़ों की बाज़ीगिरी करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को नियुक्त किया।उसके बाद अगले 3 दिनों में ही टेस्टिंग की संख्या दुगनी हो गई और लगभग 15 दिनों में यह संख्या एक लाख और 25 दिनों में दो लाख तक पहुँच गई। उसी स्वास्थ्य संरचना से मात्र एक महीने से भी कम समय में यह प्रतिदिन जाँच का आँकड़ा इतना गुणा कैसे बढ़ गया? सारा माजरा आँकड़ों के अमृत मंथन का है।
मंत्रिमंडल में शामिल नेताओं के खिलाफ गंभीर आपराधिक केस दर्ज को लेकर तेजस्वी यादव ने कहा कि,''बिहार के महान कुर्सीवादी मुख्यमंत्री को पता ही नहीं है कि उनके मंत्रिमंडल में शामिल 18 मंत्रियों के खिलाफ हत्या,लूट,भ्रष्टाचार, यौन शोषण,आर्म्स एक्ट,चोरी,जालसाजी,धोखाधड़ी जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज है? क्या इतने भोले-भाले मुख्यमंत्री को कुर्सी पर बने रहने का नैतिक अधिकार है?
दरअसल जब,'CM नीतीश कुमार से पूछा गया,'' आप के मंत्रिमंडल में शामिल 18 मंत्रियों के खिलाफ गंभीर आपराधिक केस दर्ज है,''तो उन्होंने कहा,''मुझे नहीं पता है.., नीतीश कुमार ने आगे कहा,''अगर ऐसी बात होगी है तो मुझे भी बतायेगा है..हमको भी जानकरी देना है|लेकिन हमें ऐसा कुछ नहीं लगा रहा है |तेजस्वी यादव ने इस बयान को लेकर , नीतीश कुमार पर निशाना साधा है|
कोरोना काल में बिहार सरकार द्वारा आम जनता की जान से किया गया खिलवाड़ और उनके पैसों से मचायी गयी बंदरबांट की सारी असलियत सामने आ गई है।बिहार में टेस्टिंग की संख्या 4 महीनों तक देश में सबसे कम रही।विपक्ष और जनदबाव में नीतीश जी ने विपदा के बीच ही आँकड़ों की बाज़ीगरी नहीं करने वाले 3 स्वास्थ्य सचिवों को हटा दिया। फिर उन्होंने अपने जाँचे-परखे आँकड़ों की बाज़ीगिरी करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को नियुक्त किया।
उसके बाद अगले 3 दिनों में ही प्रतिदिन टेस्टिंग की संख्या दुगनी हो गई और लगभग 15 दिनों में यह संख्या एक लाख के पार हो गई और लगभग 25 दिनों में दो लाख तक पहुँच गई!
यह आश्चर्यजनक बात है कि उसी स्वास्थ्य संरचना से मात्र एक महीने से भी कम समय में यह प्रतिदिन जाँच का आँकड़ा इतना गुणा कैसे बढ़ गया! अब समझ में आ रहा है कि यह सारा माजरा आँकड़ों के अमृत मंथन का है!
अरबों रुपयों का भारी बंदरबांट सामने आने के बाद नीतीश कुमार दिखावटी तौर पर जैसा बाक़ी 61 घोटालों में करते आए है छोटी मछलियों यानि छोटे स्तर के कर्मचारियों को बर्खास्त करने का नाटक करेंगे और भ्रष्टाचार से उगाही कर जेडीयू को चुनावी चंदा देने वाले उच्च अधिकारियों की बचायेंगे। यही इनकी स्थापित नीति, नीयत और नियम है।